'लिखे जो खत तुझे..' जैसे नग़मों के जादूगर गोपालदास 'नीरज' ने 140 से अधिक गीतों की रचना की
समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट :-
हैदराबाद, 7 फरवरी 2026. 1968 में आई हिंदी फिल्म 'कन्यादान' के गीत 'लिखे जो खत, वो तेरी याद में..' इश्क़ की हसीन यादें ताजा कर देता है। शशि कपूर और आशा पारेख पर फ़िल्माया गया यह बेहद प्यारा नग़मा गीतकार गोपालदास नीरज की क़लम से निकला है। सुनहरे नगमों के जादूगर गोपाल दास 'नीरज' ने 140 से अधिक गीत लिखे। हिंदी लेखक संघ, हैदराबाद की 612 वीं गोष्ठी में देश के विख्यात गीतकार गोपालदास 'नीरज' के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर सारगर्भित साहित्यिक चर्चा की गई. यह आयोजन बच्चन अकादमी एवं कबीर चिंतन के संयुक्त तत्वावधान में मौजमजाही मार्केट स्थित आरोग्य हॉस्पिटल, कैलाश डायग्नोस्टिक केंद्र के सेलार सभागृह में संपन्न हुआ. इस मौके पर कवि गोष्ठी के साथ-साथ इस संगोष्ठी में कवि अशोक दोशी, डॉ. प्रेमलता श्रीवास्तव, कवि अंजनी कुमार गोयल व कवि ठाकुर दिनेश सिंह ने नीरज के साहित्यिक काव्य कृतित्व पर अपने विचार प्रस्तुत किए.
कवि अशोक दोशी ने कहा कि गीतकार गोपालदास 'नीरज' का हिंदी काव्य साहित्य में अमूल्य योगदान रहा है. उनके विचारों में क्रांतिकारी चेतना के साथ-साथ रूमानी संवेदना भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. उन्होंने अपनी कविताओं और गीतों के माध्यम से प्रभावशाली अभिव्यक्त किया है. वहीं, कवि अंजनी कुमार गोयल अपने संस्मरण साझा करते हुए कहा कि वर्ष 1973 में जब वे 14 से 15 वर्ष के थे, तब उन्हें ग्रीन रूम में बैठकर विशिष्ट गीतकार कवि गोपालदास नीरज से मिलने का अवसर प्राप्त हुआ. यह मुलाकात उनके जीवन की अत्यंत प्रेरक अनुभूति रही. उन्होंने कहा कि साहिर लुधियानवी और गोपालदास 'नीरज'- इन दोनों गीतकारों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया.
करवाँ गुजर गया जैसे गीतों के साथ-साथ नीरज की जीवन दृष्टि आज भी उन्हें प्रेरित करती है. नीरज ने 140 से अधिक महत्वपूर्ण गीतों की रचना की, जिनमें से अनेक गीतों को आरडी बर्मन एवं शंकर जयकिशन जैसे महान संगीतकारों ने संगीतबद्ध किया. 'लिखे जो खत तुझे' जैसे गीत आज भी अत्यंत लोकप्रिय हैं. जबकि डॉ. प्रेमलता श्रीवास्तव ने कहा कि कवि व गीतकार गोपाल दास नीरज पर हम चर्चा कर रहे हैं. उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि जब हम नहीं रहेंगे, तब हमें भी लोग इसी तरह याद करेंगे. उन्होंने हैदराबाद में हिंदी साहित्य के विकास में किशोर पांडेय एवं डॉ. रामनिरंजन पांडेय के योगदान को भी विशेष तौर पर रेखांकित किया.
चर्चा के दौरान कवि ठाकुर दिनेश सिंह ने कहा कि नीरज के काव्य रचनाओं में मानव प्रेम की झलक दिखता है. वे अपने गीतों की लोकप्रियता का श्रेय उनकी निर्झर - सी प्रवाहमयी गति और सहज, स्वाभाविक भाषा को देते थे. कार्यक्रम का संचालन गोलकोंडा दर्पण के संपादक एवं तीनों संस्थानों के कार्यदर्शी, कवि गोविंद अक्षय ने किया और लेखक संघ की गतिविधियों के साथ-साथ बच्चन अकादमी व कबीर चिंतन की साहित्यिक गतिविधियों की भी जानकारी दी. वहीं, द्वितीय सत्र में कभी गोष्ठी का आयोजन भी हुआ.
इस दौरान कवि चंपालाल बैद, अंजनी कुमार गोयल, ठाकुर दिनेश सिंह, अशोक दोशी, गोविंद अक्षय ममता मिश्रा, आशा ठाकुर व अनुज कुमार तिवारी सहित अनेक गणमान्य कवियों ने रचनाएं सुनाई और श्रोताओं से भरपूर प्रशंसा के पात्र बने. इस अवसर पर कवियों ने हैदराबाद में कवि नीरज की स्मृतियों का उल्लेख किया और विशिष्ट समाजसेवी डॉ. मोहन गुप्ता द्वारा पद्मश्री एवं पद्म विभूषण से सम्मानित विख्यात कवि गोपालदास नीरज का भव्य कार्यक्रम आयोजित को साहित्य प्रेमियों के लिए यादगार बताया. जबकि विश्वनाथ पेंढारकर और सुंदरम तिवारी को कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए तहे दिल से शुक्रिया अदा किया गया.