• उन्नाव रेप केस : पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को  एससी ने दिल्ली एचसी द्वारा दी गई जमानत पर..

    सुप्रीम कोर्ट ने  उन्नाव रेप केस में  दूसरी कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत पर रोक लगा दी है. दिल्ली हाई कोर्ट ने  7 साल की कैद पूरी होने और सुनवाई की देरी को आधार मानकर  उन्हें जमानत दी थी. सीबीआई और केंद्र की आपत्ति के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केस ए तत्काल सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया. 

    नई दिल्ली, 29 दिसंबर 2025. उन्नाव रेप केस में  दोषी पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट ने  बड़ा झटका दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने  दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा  दी गई जमानत पर रोक लगा दी है. अदालत ने कहा कि वह हाईकोर्ट के आदेश पर अस्थाई रोक लगाने के पक्ष में है . केंद्र सरकार और सीबीआई की आपत्ति के बाद कोर्ट ने  यह निर्णय लिया . इस बीच सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि पीड़िता की उम्र 16 वर्ष से भी कम थी, इसलिए यह मामला अत्यंत गंभीर  सजा की श्रेणी में आता है. उन्होंने कहा कि आईपीसी की धारा 376(2) के तहत न्यूनतम 20 वर्ष और अधिकतम जैविक जीवन के अंत तक  कारावास की सजा निर्धारित है. इस मामले की अगली सुनवाई  4 हफ्ते बाद होगी . सुप्रीम कोर्ट ने दो हफ्ते बाद  रिपोर्ट मांगी है.


    हाई कोर्ट द्वारा दी गई राहत पर उठे सवाल

    दिल्ली हाई कोर्ट ने  सेंगर को इस आधार पर राहत दी थी कि  वह 7 साल से अधिक समय से जेल में है और उसकी अपील की सुनवाई  लगातार टल रही है. कोर्ट ने माना कि सनी में देरी उसके अधिकारों को प्रभावित कर रही है. हालांकि, यह भी उल्लेख किया गया कि कुलदीप सेंगर के खिलाफ पीड़िता के पिता की हत्या का मामला भी लंबित है. अब सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि हाई कोर्ट का आदेश न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप था या नहीं.


    सीबीआई और केंद्र की दलीलें कोर्ट के सामने 

    सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जेनरल ने कहा कि यह मामला केवल धारा 376 तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पॉक्सो एक्ट के प्रावधान भी लागू होते हैं, क्योंकि पीडिता नाबालिग थी. उन्होंने कहा कि कुलदीप सेंगर  एक जनप्रतिनिधि था, ऐसे में गंभीर अपराध में उसे दी गई राहत  आगे अन्य मामलों के लिए गलत नजीर बन सकती है. सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि हाई कोर्ट का आदेश स्थगित किया जाए .
    सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई विस्तृत  
    सुनवाई 

    सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल सुनवाई शुरू कर दी. तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि ट्रायल कोर्ट ने  कुलदीप सेंगर को स्पष्ट रूप से धारा 376 के तहत दोषी ठहराया था, और ऐसे अपराध में कम सजा का आधार नहीं हो सकता. अदालत अब यह तय करेगी कि जमानत रद्द करने पर अंतिम फैसला क्या होगा?


    क्या है पूरा मामला?
     उन्नाव रेप केस 2017 में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में सामने आया, जब 17 वर्षीय नाबालिक लड़की ने भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया. मामले ने तब तूल पकड़ा जब पीड़िता के पिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई, जिसके लिए कुलदीप सेंगर और अन्य आरोपियों को दोषी पाया गया.

    2019 में सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसका परिवार एक गंभीर सड़क हादसे का शिकार हुआ, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और पीड़िता गंभीर रूप से घायल हुई. अदालत ने विस्तृत जांच और सुनवाई के बाद दिसंबर 2019 में कुलदीप सेंगर को आजीवन कारावास  की सजा सुनाई थी.


    दिल्ली हाई कोर्ट ने  सेंगर ए सजा की निलंबित


    हालिया घटनाक्रम में, 23 दिसंबर 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट ने  कुलदीप सेंगर की सजा को निलंबित करते हुए उन्हें जमानत दे दी, यह कहते हुए कि उन्होंने पर्याप्त समय जेल में बिताया है  और उनकी अपील 
    अभी लंबित है . इस फैसले ने  बड़े स्तर पर  विरोध और बहस को जन्म दे दिया. इसके बाद सीबीआई ने  हाई कोर्ट के निर्णय को  सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, यह तर्क देते हुए कि पॉक्सो कानून के तहत  कुलदीप सिंह सेंगर को लोक सेवक मनाना गलत है.