तुम्हारे बिना अब जिंदगी कैसे कटेगी बेटा.. जवान बेटे की मौत पर छलका दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल का दर्द
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल का निधन हो गया है। वह अमेरिका में स्कीइंग के दौरान घायल हो गए थे। उनका अमेरिका के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था लेकिन अचानक दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। अनिल अग्रवाल ने इस पर एक भावुक पोस्ट लिखा है।
नई दिल्ली, 8 जनवरी 2026।दिग्गज उद्योगपति और वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल का निधन हो गया है। वह 49 साल के थे। अमेरिका में एक स्कीइंग हादसे में घायल होने के बाद उनका माउंट सिनाई अस्पताल में इलाज चल रहा था। इस बीच दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। जवान बेटे के यूं चले जाने से अनिल अग्रवाल पर दुखों का पहाड़ टूटा है। उन्होंने इसे अपने जीवन का सबसे काला दिन बताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट लिखा है।
अनिल अग्रवाल ने लिखा, 'मेरा अग्निवेश, मेरा 49 साल का बेटा, आज हमारे बीच नहीं रहा। एक बाप के कंधे पर बेटे की अर्थी जाये इससे बुरा और क्या हो सकता है। अग्निवेश अपने दोस्त के साथ अमेरिका में स्कीइंग करने गया था। वहां एक्सीडेंट हो गया। वो माउंट सिनाई हॉस्पिटल, न्यूयॉर्क में ठीक हो रहा था। हमें लगा सब ठीक हो जाएगा... लेकिन अचानक कार्डियक अरेस्ट हो गया। और हमारा बच्चा हमें छोड़कर चला गया।'
पटना में जन्म
उन्होंने लिखा, '3 जून 1976 को पटना में जब अग्नि हमारी दुनिया में आया, वो पल आज भी आंखों के सामने है। एक मिडिल क्लास बिहारी परिवार में जन्मा था अग्नि। तुम्हारे साथ बिताया गया हर एक पल आज बहुत याद आ रहा है बेटा। अपनी माँ का दुलारा अग्नि बचपन में बेहद चंचल और शरारती था। हमेशा हँसता, हमेशा मुस्कुराता। यारों का यार था वो, और अपनी बहन प्रिया को लेकर सबसे प्रोटेक्टिव भी।'
अग्रवाल लिखते हैं, 'उसने मायो कॉलेज, अजमेर में पढ़ाई की। बेहद स्ट्रॉन्ग पर्सनैलिटी थी अग्नि की बॉक्सिंग चैंपियन, घुड़सवारी का शौकीन, और कमाल का म्यूजिशियन। उसने Fujeirah Gold जैसी शानदार कंपनी खड़ी की और Hindustan Zinc का Chairman भी बना। लेकिन इन सबसे ऊपर अग्नि बेहद सिंपल था। हमेशा अपने friends और colleagues के बीच में ही रहता था। जिससे भी मिलता, उसे अपना बना लेता था। वो हमेशा जमीन से जुड़ा रहा सीधा, सच्चा, जिंदादिली और इंसानियत से भरा।'
हम टूट गए हैं
उन्होंने पोस्ट में लिखा, 'वो सिर्फ बेटा नहीं था - वो मेरा दोस्त था, मेरी शान था, मेरी पूरी दुनिया था। मैं और किरण टूट से गए हैं। बस यही सोच रहे हैं कि हमारा बेटा तो चला गया। लेकिन जो लोग हमारे वेदांता में काम करते हैं, वो सब अग्निवेश ही तो हैं। वो सब हमारे बेटे-बेटियां हैं। अग्नि और मेरा सपना था, हिंदुस्तान को आत्मनिर्भर बनाना। वो हमेशा कहता था - "पापा, हमारे देश में क्या नहीं है? फिर हम किसी से पीछे क्यों रहें?"
पोस्ट में अग्रवाल ने कहा, 'हमारी दिली इच्छा यही रही कि देश का कोई बच्चा भूखा न सोए, कोई बच्चा अनपढ़ न रहे, हर महिला अपने पैरों पर खड़ी हो, और सभी युवाओं को रोज़गार मिले। मैंने अग्निवेश से वादा किया था हमारे पास जितना भी धन आएगा, उसका 75% से ज्यादा समाज के काम में लगायेंगे। आज फिर वो वादा दोहराता हूँ। अब और भी सादगी से जीवन जीऊंगा। और अपनी बाकी जिंदगी इसी में लगा दूंगा।'
'हम उन सभी मित्रों, सहकर्मियों और शुभचिंतकों का दिल से धन्यवाद करते हैं जो हमेशा अग्निवेश के साथ रहे। अभी तो साथ मिलकर बहुत कुछ करना था अग्नि। तुम्हें पूरी जिंदगी जीनी थी। कितने सपने थे, कितने अरमान थे, सब कुछ अधूरा ही रह गया। समझ नहीं आता, तुम्हारे बिना अब जिंदगी कैसे
कटेगी बेटा। तुम्हारे बिना जिंदगी हमेशा अधूरी रहेगी, लेकिन तुम्हारे सपने अधूरे नहीं रहने दूंगा।'