बिहार की होली (फगुआ) में बाबू वीर कुंवर सिंह का यह लोकगीत क्यों है खास? बंगला में उड़ेला अबीर..
बिहार की होली (फगुआ) सिर्फ रंगों और हुड़दंगों का खेल नहीं, बल्कि उन गीतों का गूंज भी है जो हर बिहारी के रगों में दौड़ता है. जब ढोलक की थाप पर 'बंगला में उड़ेला अबीर' के सुर निकलते हैं, तो आंखों के निकट 80 साल के उस वीर योद्धा बाबू वीर कुंवर सिंह की छवि जीवंत हो उठती है, जिन्होंने आरा शहर के पास जगदीशपुर की मिट्टी में गुलाल के साथ आजादी का संकल्प घोला था. समझते हैं बिहार की फगुआ का ये पहलू..
आरा, 4 मार्च 2026. बिहार की होली यानी फगुआ केवल रंगों का उत्सव नहीं ..