• सरकार बनते ही  फिर जल उठा मणिपुर, विरोध प्रदर्शन के बीच चुराचांदपुर बंद

    चुराचांदपुर / मणिपुर, 7 फरवरी 2026। सरकार बनते ही चुराचांदपुर एक बार फिर से हिंसक हो गया और जगह-जगह आगजनी हुई. ताजा जानकारी के मुताबिक, नए उपमुख्यमंत्री के  शपथ लेने के विरोध में नेमचाकिपगेन और लोसी दिखो के बीच गुरुवार को फिर से विरोध प्रदर्शन और आगजनी शुरू हो गया. पूरे दिन यहां हालात  तनावपूर्ण बना रहा. वहीं, स्थिति को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है.

    सूत्र बताते हैं कि यह विरोध प्रदर्शन और आगजनी गुरुवार शाम तकरीबन 6 बजे मुख्य बाजार तुइबोंग इलाके में हुई, जहां बड़ी संख्या में युवा प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों को उनके बैरक में वापस धकेलने की कोशिश की, जब सुरक्षा में लगे जवानों ने प्रदर्शन कर रहे युवाओं की बात मानने से इनकार किया . इस बीच प्रदर्शनकारियों ने  पत्थरबाजी की  और बीच सड़क पर टायर जलाकर  विरोध प्रदर्शन किया. सूत्रों का कहना है कि प्रदर्शन कर रहे हैं युवाओं का गुस्सा और आक्रोश तब और बढ़ गई जब उन्हें यह यकीन दिलाया गया कि कुकी जोमी के तीन एमएलए मणिपुर सरकार में शामिल होने जा रहे हैं. हालांकि, अभी तक सिर्फ नेमचा ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली है बाकी और 2 एमएलए  खाउते और नगुरसंगलुर शपथ लेने वाले हैं.

    कुकी समूह  ने दी चेतावनी

    मिली जानकारी के मुताबिक, कुकी समुदाय ने अपने समूह के एमएलए को सरकार में शामिल न होने की चेतावनी दी थी, लेकिन उन्हें मालूम पड़ा कि तीन एमएलए शीघ्र ही सरकार का हिस्सा बनने जा रहे हैं. इसी के मद्देनजर चुराचांदपुर में बंद बुलाया गया. इस दौरान विरोध प्रदर्शन भी किया गया.

    नई सरकार का हुआ गठन 

    इससे पहले मणिपुर में एन. बीरेन सिंह की जगह युमनाम खेमचंद सिंह ने 13 वें सीएम पद के रूप में शपथ ली. बीरेन सिंह के त्यागपत्र के एक साल बाद युमनाम ने सीएम पद संभाला है. जबकि कुकी समुदाय से संबंध रखने वाले बीजेपी के एमएलए नेमता किपगेन और एनपीएफ के एमएलए  दिखो ने भी उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. सूत्र बताते हैं कि कुकी  जोमी समुदाय के लोगों को काफी तकलीफ हुई  है, क्योंकि इंफाल में दिनदहाड़े  सैकड़ो लोगों को मार डाला गया और चर्च में आग लगा दी गई. इसके अलावा कुकी समुदाय की लाखों की संपत्तियां जलकर राख हो गई.

    असम राइफल्स के फोर्स चुराचांदपुर में दे रहे हैं पहरा 

    हालात को देखते हुए असम राइफल्स के फोर्स को तैनात कर दिया गया है, ताकि हालात पर काबू पाया जा सके. इस बीच भीड़ को तितर - बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए. बावजूद इसके इलाके में आदिवासी संगठन "संयुक्त  फोरम ऑफ सेवन" के 12 घंटे बंद के आह्वान का इलाके में असर देखा गया.