• व्यक्तित्व का निर्माण साधन से नहीं    साधना से होता है - डॉ. चित्तरंजन कर

    शासकीय  महाविद्यालय धरसींवा में नवगीत दिवस मनाया गया। इस दौरान डॉ. माणिक ने कहा कि नवगीत वास्तव में गीत परंपरा का वर्तमान स्वरूप है जिसमें वर्तमान जीवन का कटु यथार्थ दिखाई देता है।
    रायपुर, 7 फरवरी 2026। राजधानी रायपुर के नज़दीक तहसील मुख्यालय धरसींवा स्थित पं.  श्यामाचरण शुक्ल शासकीय महाविद्यालय में 5 फरवरी को नवगीत दिवस मनाया गया। इस अवसर पर 'हिंदी साहित्य में नवगीत काव्य- परंपरा' विषय पर व्याख्यान का भी आयोजन हुआ। प्रमुख वक्ता थे  रेल मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य और छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध भाषाविज्ञानी डॉ. चित्तरंजन कर। अध्यक्षता की केन्द्रीय हिंदी सलाहकार समिति , कौशल विकास एवं उद्यमिता विकास मंत्रालय के  सदस्य और छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नवगीतकार डॉ.माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' ने। 

    कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की मूर्ति पर माल्यार्पण एवं पूजा अर्चना के साथ हुआ। महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य कौशल किशोर और हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सी.एल.साहू ने अतिथियों  का पुष्प गुच्छ, अंगवस्त्र एवं श्रीफल से स्वागत किया।प्रभारी प्राचार्य कौशल किशोर ने नवगीत दिवस पर आयोजित कार्यक्रम की पृष्ठभूमि पर विचार व्यक्त किया। डॉ. चित्तरंजन कर ने  कहा कि जो अपनी भाषा ठीक से नहीं जानता वह किसी और भाषा को ठीक से सीख ही नहीं सकता। उन्होंने आगे कहा कि व्यक्तित्व का निर्माण साधन से नहीं अपितु साधना से होता है।

    अपने व्याख्यान में डॉ.माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' ने नवगीत को परिभाषित करते हुए कहा कि संश्लिष्ट एवं जटिल भावों तथा आधुनिक विचारों को संवेदना में घोलकर और शब्दों में तौलकर नये अर्थ एवं मुहावरे गढ़ने की प्रवृत्ति को नवगीत कहते हैं। अपनी बात को विस्तार देते हुए उन्होंने कहा कि नवगीत वास्तव में गीत परंपरा का वर्तमान स्वरूप है जिसमें वर्तमान जीवन का कटु यथार्थ दिखाई देता है। इस अवसर महाविद्यालय के  प्राध्यापक डॉ. प्रशांत रथ और डॉ. सुषमा मिश्रा सहित विभिन्न संकायों के विद्यार्थी  मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रीति पांडेय ने किया।