6 हजार से ज्यादा नेताओं, पत्रकारों और न्यायाधीशों के फोन टैप के आरोप; फोन टैपिंग मामले में एसआईटी के सामने पेश हुए पूर्व मंत्री
कांग्रेस की सरकार बनने के बाद 10 मार्च, को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी. पुलिस ने पूर्व विशेष खुफिया ब्यूरो प्रमुख टी. प्रभाकर राव, डीएसपी प्रणीत राव, एएसपी एम. थिरुपथन्ना समेत कई लोगों को आरोपी बनाया है. हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट:-
हैदराबाद, 23 जनवरी 2026। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस ) के कार्यकारी अध्यक्ष और तेलंगाना के पूर्व मंत्री केटी रामा राव शुक्रवार को कठिन फोन टैपिंग मामले को लेकर हैदराबाद स्थित विशेष जांच टीम एसआईटी के सामने पेश हुए. इस दौरान बीआरएस कार्यकर्ताओं ने जमकर प्रदर्शन किया. जबकि सरकार की ओर से यहां के जुबली हिल्स पुलिस स्टेशन और पार्टी के मुख्यालय तेलंगाना भवन के आसपास चारों भारी पुलिस बल तैनात था. भारत राष्ट्र समिति के कार्यकर्ताओं ने इस दौरान पुलिस स्टेशन में घुसने की भी कोशिश की जिसे पुलिस ने नाकाम कर दिया.
इस दौरान केटी रामा राव ने कहा कि वे एसआईटी की नोटिस से डरने वाले नहीं है. उन्होंने कहा, "2015 में हमने एक ऐसे व्यक्ति को पकड़ा था, जिसके पास 50 लाख रुपए थे और वह हमारे विधायकों को खरीदने आए थे. दुर्भाग्य से यह व्यक्ति आज तेलंगाना का मुख्यमंत्री है. वह सोचता है कि हर आदमी इस तरह काम करता है. उन्हें लगता है कि हम पुलिस के समन से डर जाएंगे. हमें पुलिस के सामने पेश होने में कोई दिक्कत नहीं है, क्योंकि हमने कुछ भी गलत नहीं किया है."
मुख्यमंत्री मेरे खिलाफ मानहानि अभियान चला रहे हैं- केटीआर
केटी रामा राव ने कहा, "मुख्यमंत्री पिछले 2 साल से मेरे खिलाफ मानहानि का अभियान चला रहे हैं. अगर मैंने कुछ किया है तो सबूत दीजिए. मैं चरित्र हनन का शिकार हुआ हूं और इसके लिए कोई जिम्मेदार है तो वह मुख्यमंत्री हैं." उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के चलते सरकार के मंत्री उनसे बात करने से डर रहे हैं. क्योंकि उन्हें डर है कि फोन टैप किए जा रहे हैं.
सुरक्षा के सख्त इंतजाम, कई नेता हिरासत में
केटी रामा राव से ज्वाइंट सीपी विजय कुमार और एसीपी वेंकट गिरी ने पूछताछ की, जो सिटी पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार के नेतृत्व वाली टीम का हिस्सा है. दूसरी तरफ बीआरएस कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन को देखते हुए जुबली हिल्स पुलिस स्टेशन के चारों ओर बैरिकेड लगा दिए गए और भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात कर दिया गया. हालांकि, पुलिस ने पहले से ही कई बीआरएस नेताओं और उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रों को हिरासत में ले लिया. इनमें बीआरएस की छात्र इकाई के सचिव जंगैया भी शामिल है.
क्या है फोन टैपिंग का मामला?
आरोप है कि बीआरएस सरकार के दौरान 6 हजार से ज्यादा नेताओं, पत्रकारों और न्यायाधीशों के फोन टैप किए गए थे. कांग्रेस की सरकार बनने के बाद 10 मार्च, को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी. पुलिस ने पूर्व विशेष खुफिया ब्यूरो प्रमुख टी. प्रभाकर राव, डीएसपी प्रणीत राव, एएसपी एम. थिरुपथन्ना समेत कई लोगों को आरोपी बनाया है. हाल ही में सरकार ने जांच के लिए 10 सदस्यीय एसआईटी गठित की है. सूत्र बताते हैं कि हिरासत में लिए गए सभी लोगों को छोड़ दिया गया है.