कबाड़ में जिंदगी खोजती दिव्यांग छात्रा
कहते हैं शिक्षा से भी जिंदगी अच्छी बनती है। इसके तलाश में सीधी में दिव्यांग छात्रा कबाड़ में स्कूली बैग, कापी- पेन और जूते खोजती दिखी। समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट :-
सीधी/ कुसमी, 4 फरवरी 2026. बीते शनिवार को सीधी के कुसमी इलाके के सीएम राइज संदीपनी स्कूल की दिव्यांग छात्रा कबाड़ के एक ढ़ेर में स्कूली बैग और कॉपी-- कलम खोजती दिखी. क्लास पांचवी की पढ़ाई कर रही छात्रा नेपाली बंसल दोनों पैरों से विकलांग हो चुकी है. उसके पास स्कूल ले जाने के लिए कॉपी - कलम और किताबें तक नहीं थे, जिसकी खोज में वह कबाड़ तक पहुंच गई. मिली जानकारी के मुताबिक, इस विकलांग छात्रा के पास पढ़ाई करने के लिए आवश्यक सामग्री तक उपलब्ध नहीं था. हालांकि, उसने इसके लिए कबाड़ बेचकर पैसे जुटाना चाहती थी तकी पढ़ाई के लिए किताब-- कलम और बैग खरीद सके. शनिवार को जब वह एक कबाड़ के ढ़ेर के समीप बैठकर कुछ तलाश रही थी, तभी यह मामला सामने आया.
पक्ष स्कूल प्रबंधन का
विद्यालय के प्रधान शिक्षक राजेश पांडेय बताते हैं कि शासकीय निर्देशों के मुताबिक बच्चों को पोशाक के लिए सिर्फ ₹600 की राशि उनके बैंक खातों में भेज दी जाती है. लेकिन शासकीय स्कीम में कॉपी -- किताब, कलम और स्कूली बैग उपलब्ध कराने के लिए कोई धनराशि का प्रावधान नहीं है.
कार्रवाई और प्रशासनिक निर्देश
मालूम पड़ा है कि इसकी जानकारी जब एसडीएम विकास कुमार आनंद को दी गई, तुरंत आनंद ने संज्ञान लेते हुए परियोजना अधिकारी माया गिरी को इसे जांचने के लिए निर्देश दिए और उन्होंने अधिकारी को दिव्यांग छात्रा के घर पहुंचकर उसके माता-पिता से बात करने के साथ-साथ कदम उठाने को कहा है.