मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष लामबंद, बंगाल चुनाव के पहले क्या है प्लान?
SIR को लेकर विपक्ष ईसीआई ज्ञानेश कुमार के खिलाफ गुस्से में हैं। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने का ऐलान किया था। पार्टी ने आरोप लगाया था कि SIR एक धोखा है और इसका उद्देश्य नागरिकों, विशेष रूप से विपक्षी शासित राज्यों में, चुनावों से पहले मताधिकार से वंचित करना है।
नई दिल्ली, 15 फरवरी 2026। बंगाल चुनाव से पहले बहुत बड़ा उलटफेर होने की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि विपक्ष के नेता संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे सत्तारूढ़ एनडीए और इंडिया ब्लॉक के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका है।
सूत्रों के मुताबिक, महाभियोग का नोटिस मार्च के दूसरे सप्ताह में शुरू होने वाली छुट्टी के बाद के बजट सत्र को ध्यान में रखकर भेजा जाएगा। ज्ञानेश कुमार के महाभियोग की मांग टीएमसी ने उठाई है। विपक्ष अब तक इस मांग से दूर रहा था। हालांकि, टीएमसी ने स्पीकर बिरला के खिलाफ इंडिया ब्लॉक द्वारा हाल ही में लाए गए निष्कासन नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए थे, जबकि यह स्पष्ट किया कि वह सैद्धांतिक रूप से इस कदम का विरोध नहीं करती है।
टीएमसी की मांग को विपक्ष में बड़ा समर्थन
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ टीएमसी की मांग को विपक्ष में बड़ा समर्थन मिल रहा है, जहां लगभग हर क्षेत्रीय पार्टी राज्यों में मतदाता सूची के एसआईआर (विशेष मतदाता सूची सत्यापन) की प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है। विपक्ष ने इसे भाजपा की साजिश करार दिया है, जिसका मकसद विपक्षी मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करके सत्ताधारी पार्टी को फायदा पहुंचाना है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में लंबी बहस हो चुकी है और संसद में भी इसकी गूंज सुनाई दे रही है।
विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की थी
विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए उन पर सत्ताधारी दल के इशारे पर काम करने और सदन की कार्यवाही में विपक्ष को बोलने का मौका न देने का आरोप लगाया है। दोनों पक्षों के बीच तनाव का यह नया दौर तब शुरू हुआ जब अध्यक्ष ने राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे की 2020 के चीनी आक्रमण पर लिखी अप्रकाशित पुस्तक से उद्धरण देने से मना कर दिया। इस मुद्दे के चलते लोकसभा की कार्यवाही एक सप्ताह से अधिक समय तक बाधित रही।