राहुल गांधी ने संसद में क्या बोला, मच गया हंगामा
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के वक्त सोमवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बोलते ही संसद में हंगामा हो गया एवं लोकसभा की कार्यवाही दो बार फिर मंगलवार तक के लिए स्थगित करनी पड़ गई। समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ यह विशेष रिपोर्ट :-
नई दिल्ली, 2 फरवरी 2026. संसद से बाहर निकलते ही नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा, 'मैं सदन की कार्यवाही फिर से शुरू होते ही फिर से बोलूंगा।' इससे पहले राहुल गांधी संसद में पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की अप्रकाशित किताब पर बोल रहे थे। उनके अनुसार 4 चीनी टैंक लद्दाख बॉर्डर पर पहुंच गए थे। जिससे संसद में हंगामा हो गया। राहुल गांधी को राजनाथ सिंह ने 11 बार, शाह ने सात बार, किरेन रिजिजू ने दो बार और अनुराग ठाकुर ने छह बार टोका। जब रोकने पर नहीं रुके तो स्पीकर ने माइक बंद करा दी।
सदन में बोलने से राहुल गांधी को रोका गया
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जो बोल रहे हैं, यह जानकारी उन्हें कहां से आई? यह सब काल्पनिक बातें बोल रहे हैं और संसद को गुमराह कर रहे हैं. इसलिए सदन में इनको बोलने से रॉक जाना चाहिए. वहीं किरण रिजीजू ने कहा, "हम समझ रहे थे कि राहुल गांधी अब सुधर गए होंगे, परंतु वो फिर से वही बोल बोल रहे हैं." इस बीच जैसे ही राहुल गांधी के बयान पर हंगामा शुरू हुआ, राजनाथ सिंह उठ खड़े हुए और राहुल गांधी से कहा, आप देश को गुमराह करना बंद करें. इस पर राहुल गांधी ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर बोलना आवश्यक है.
लोकसभा में राहुल के भाषण पर जोरदार हंगामा, कार्यवाही स्थगित
संसद में राहुल गांधी करीब 46 मिनट तक भाषण दिया. इस बीच जोरदार हंगामा हुआ.
राहुल के समर्थन में आए अखिलेश यादव
सपा के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि चीन का मुद्दा बहुत ही संवेदनशील है और अगर देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला है तो प्रतिपक्ष के नेता को बोलने देना चाहिए.
राहुल गांधी ने क्या बोला, मच गया हंगामा
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के वक्त जैसे ही राहुल गांधी बोलना शुरू किया, वैसे ही हंगामा मच गया. दरअसल, राहुल गांधी ने आर्मी प्रमुख जनरल नरवणे के एक किताब का हवाला देते हुए कहा कि इससे स्पष्ट हो जाएगा की देशभक्ति कौन है और कौन नहीं. राहुल गांधी ने कहा कि डोकलाम में कई चीनी टैंक भारत की सीमा में करीब 100 मीटर तक पहुंच गए थे. राहुल गांधी के यह कहते ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह खड़े हो गए और इस पर आपत्ति जताई.
राहुल गांधी ने पूछा कि क्या चीन और पाकिस्तान पर चर्चा करना गलत है...,' नरवणे की बुक पर चर्चा से अध्यक्ष ओम बिरला ने मना किया तो राहुल ने पूछा सवाल. बजट सत्र के चौथे दिन सोमवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण को लेकर संसद में धन्यवाद प्रस्ताव पर जैसे ही चर्चा शुरू हुई, राहुल गांधी बोलना शुरू किया और कुछ मिनट बोलने के बाद लोकसभा में गतिरोध पैदा हो गया. गौरतलब है कि तेजस्वी सूर्या पर विपक्ष की देशभक्ति से जुड़े सवाल के बाद हंगामा होते ही गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि तेजस्वी सूर्या ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे, विपक्ष की देशभक्ति पर नहीं. सदन में हंगामा के चलते अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित कर दी.
अध्यक्ष ने राहुल गांधी को रोका और अखिलेश यादव का लिया नाम, खड़े हुए अमित शाह
राहुल गांधी ने कहा कि अपने बुक कोट करने से रोका, हमने मैगजीन कोट करने की बात कही. आपने उसे भी मना किया, हमने कहा कि भारत और चीन के संबंधों पर बोलूंगा. अब आप उसे पर भी मना कर रहे हैं. अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में चीन का कोई उल्लेख नहीं है. देश की इज्जत और सम्मान बनाए रखना सबका कर्तव्य है. इस पर राहुल गांधी ने कहा कि क्या राष्ट्रपति के संबोधन का अंतर्राष्ट्रीय रिलेशंस से कोई सरोकार नहीं है. हम चीन और पाकिस्तान पर नहीं चर्चा कर सकते, यह क्या बात है. राहुल गांधी ने कहा कि आपके मंत्री बोलेंगे. आप हमें बोलने तो दीजिए. यह बात चीन और पाकिस्तान से संबंधित नहीं है. यह बात प्रधानमंत्री के बारे में है. अध्यक्ष ओम बिरला ने टोका और कहा कि सदन में बोलना है तो नियम और प्रक्रिया के तहत बोलना होगा.
नरवणे की आत्मकथा 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी'
राहुल गांधी संसद में जिस किताब के आधार पर डोकलाम में चीनी टैंक घुसने का दावा कर रहे हैं, वह पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे ने लिखी है। 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' नामक यह किताब अभी पब्लिश नहीं हुई है। इसका हार्डकवर अप्रैल 2024 से ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर उपलब्ध है। किताब में चीन के साथ भारतीय सेना की 2020 की झड़पों के साथ-साथ अग्निवीर योजना को रिव्यू किया गया है।नरवणे 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे हैं।
उन्होंने पिछले साल कसौली में आयोजित खुशवंत सिंह लिस्टरेचर फेस्टिवल में बताया था कि उन्होंने अपनी किताब पेंग्विन पब्लिशर ग्रुप को छपने के लिए दे दी है। अब यह पब्लिशर्स और सरकार के बीच का मामला है। किताब रक्षा मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजी गई है। एक साल से ज्यादा हो चुका है लेकिन इसे पब्लिश करने की मंजूरी नहीं मिली है।