मोहन भागवत ने वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग की और बोले, "संघ जब कहेगा पद छोड़ दूंगा"
आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि यदि वीर सावरकर को भारत रत्न दिया जाता है, तो...
मुंबई, 8 फरवरी 2026. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष पूरे होने पर रविवार को मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में सरसंघचालक मोहन भागवत ने वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग को उठाया है. मुंबई में "संघ यात्रा के सौ वर्ष : नए क्षितिज" कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने भारत रत्न दिए जाने में हो रही विलंब पर भी अपनी बात रखी. आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, यदि वीर सावरकर को भारत रत्न दिया जाता है, तो यह सम्मान इस पुरस्कार की मर्यादा को बढ़ाएगा. उन्होंने कहा, हालांकि, सावरकर को किसी पुरस्कार की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि पहले ही देशवासियों के दिलों में वे जगह बना चुके हैं.
बिना किसी सम्मान के भी वीर सावरकर जनता के दिलों पर राज करते हैं
मोहन भागवत ने कहा, मैं उस कमेटी का हिस्सा नहीं हूं जो इस पर निर्णय लेती है, लेकिन अगर किसी कमेटी सदस्य से मुलाकात होगी तो अवश्य बात करूंगा कि इसमें विलंब क्यों हो रही है. अगर सावरकर को यह सम्मान मिलता है तो, उसकी प्रतिष्ठा और बढ़ेगी. दरअसल, वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग लंबे वक्त से राजनीतिक बहस का विषय रही है. कई संगठन और नेता उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिए जाने की मांग उठा रहे हैं. वहीं, कांग्रेस पार्टी इस मांग का विरोध करती आ रही है. कांग्रेस का आरोप है कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ब्रिटिश सरकार को भेजी गई दया याचिकाओं की वजह से सावरकर ' देशद्रोही' थे.
दूसरी तरफ बीजेपी और शिवसेना लगातार सावरकर को भारत रत्न देने के पक्ष में खड़ी रही है. इन दलों का कहना है कि सावरकर एक राष्ट्रवादी, विशिष्ट लेखक और समाज सुधारक थे और उनका योगदान देश के इतिहास में महत्वपूर्ण है. अपने संबोधन में मोहन भागवत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्यशैली और विचारधारा पर भी प्रकाश डाला. सरसंघचालक ने कहा कि संघ का उद्देश्य समाज में अच्छे संस्कारों का निर्माण करना है. अत्यधिक प्रचार से दिखावा बढ़ता है और इससे अहंकार पैदा हो सकता है. उन्होंने कहा, "संगठन जब कहेगा पद छोड़ दूंगा."