ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों का आज भारत बंद का आह्वान, बंद के दौरान क्या खुला रहेगा और क्या रहेगा बंद?
यूनियनों ने सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और निजी संस्थाओं को हड़ताल की नोटिस दी है. ग्रामीण और शहरी इलाकों में जिला और ब्लॉक स्तर पर अभियान चलाए गए हैं. यूनियनों का दावा है कि भाजपा शासित राज्यों में भी आज बंद का असर देखने को मिल सकता है। समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट :-
नई दिल्ली/ कोलकाता/ भुवनेश्वर / गुवाहाटी/ हैदराबाद, 12 फरवरी 2026. 10 से ज्यादा ट्रेड यूनियन और किसान संगठनों ने आज यानी 12 फरवरी को आहूत भारत बंद का मिला - जुला असर देखने को मिला है. यह बंद केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ बुलाया गया है. यूनियनों का दावा है कि इस हड़ताल में देशभर से करीब 30 करोड़ मजदूर शामिल है.
ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एंटक ) महासचिव अमरजीत कौर ने कहा कि इस बार भागीदारी पिछले आंदोलन से कहीं अधिक है. उन्होंने बताया कि बीते वर्ष 9 जुलाई की प्रदर्शन में करीब 25 करोड़ लोग शामिल हुए थे. यूनियनों के मुताबिक, 600 से अधिक जिलों में इस बंद का असर देखने को मिल रहा है. यह हड़ताल केंद्र की "मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और कॉर्पोरेट समर्थक नीतियों के विरुद्ध है. संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम), कृषि मजदूर संगठन, छात्र और युवा संगठन भी भारत बंद का समर्थन कर रहे हैं.
भारत बंद क्यों बुलाया?
अलग-अलग ट्रेड यूनियनों ( मजदूर संगठनों ) ने सरकार की कुछ नीतियों के विरोध में भारत बंद बुलाया है. यूनियनों का मुख्य उद्देश्य चार नए लेबर कोड को रद्द करवाना और किसानों एवं मजदूरों को प्रभावित करने वाली नीतियों को वापस लेना है.
उनकी मुख्य मांगें
● मजदूर संगठनों का मानना है कि नए 4 लेबर कोड मजदूरों के अधिकारों को कम करते हैं, इसलिए उन्हें तुरंत वापस लिया जाए.
● महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को फिर से मजबूत करने और इसमें बजट बढ़ाने की मांग शामिल है.
● उन सरकारी नीतियों को वापस लेना, जिन्हें सिविल सेवाओं को कमजोर करने वाला माना जा रहा है.
● नई पेंशन योजना की जगह पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने की मांग.
● शिक्षा नीति 2020 को वापस लेने की मांग.
● इसके अलावा, एसकेएम जैसे किसान संगठनों ने भारत-- अमेरिका ट्रेड डील पर भी चिंता जताई है. उनका आरोप है कि इस समझौते की शर्तों से भारतीय किसानों के हितों को भारी नुकसान पहुंच सकता है.
क्या- क्या है बंद?
सरकारी बैंक, और बीमा कार्यालय, कुछ राज्यों में परिवहन बस सेवाएं, सरकारी दफ्तर और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां. औद्योगिक इकाइयां और उत्पादन हब. कोयला, स्टील और दूसरे प्रमुख सेक्टर. विरोध वाले इलाकों में मनरेगा के तहत ग्रामीण रोजगार कार्य.
इन सेवाओं पर बंद बेअसर अस्पताल और इमरजेंसी सेवाएं. एंबुलेंस और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं. मेट्रो सेवा. प्राइवेट ऑफिस और आईटी कंपनियां. स्कूल और कॉलेज. दूध, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान की सप्लाई. यूनियन का दावा है कि भाजपा शासित प्रदेश ओड़िशा और असम में भी बंद का व्यापक असर देखने को मिला है.