Bangladesh Results: बांग्लादेश में तारिक रहमान को मिली जीत, भारत के लिए इसका क्या है मायने?
Bangladesh Results: तारिक रहमान की बांग्लादेश में जीत ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई गर्माहट ला दी है. तारिक रहमान के जीत के मायने क्या है भारत के लिए? क्या बांग्लादेश की नई सरकार भारत के साथ संबंध में ठहराव लाएगी? नजरें तारिक रहमान की क्या नीति होती है, उस पर टिकी है. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट :-
ढाका/ नई दिल्ली, 14 फरवरी 2026. तारिक रहमान की अगुवाई वाली बीएनपी बांग्लादेश के आम चुनाव में रिकॉर्ड जीत दर्ज की है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) 299 सीटों में 212 सीट जीतकर 20 साल बाद सत्ता में वापसी कर रही है। वहीं कट्टरपंथी जमात ए इस्लामी 77 सीटों पर ही सिमट गई। जेन जी पार्टी एनसीपी 30 सीटों पर लड़ी और 6 ही जीत सकी। 'डार्क प्रिंस' कहे जा रहे तारिक रहमान के बांग्लादेश की सत्ता में कदम किसी फिल्मी स्टोरी से काम नहीं है. 60 वर्ष के तारिक रहमान पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व पीएम खालिदा जिया के पुत्र हैं. 2008 में भ्रष्टाचार और आर्थिक घोटाले के आरोप में अरेस्ट के बाद वे मुश्किल हालात में देश छोड़कर चले गए थे. करीब 17 वर्ष तक निर्वासन में रहे और दिसंबर 2025 में अपनी अम्मी खालिदा जिया के मृत्यु से ठीक पहले ही वतन वापस लौटे.
उस वक्त जबरदस्त भीड़ ने उनका स्वागत किया. तारिक रहमान ने अमेरिकी नागरिक अधिकतर नेता मार्टिन लूथर किंग के 'आई हैव अ ड्रीम' भाषण की तर्ज पर जवाब दिया. तब उन्होंने कहा था,... "और इसी के साथ बीएनपी के चुनाव अभियान की शुरुआत की. अब भारत और बाकी दक्षिण एशिया, अमेरिका उसे योजना के सामने आने का इंतजार कर रहे हैं. इस बीच नई सरकार बनने के बाद भारत की ओर से पीएम मोदी ने शुक्रवार की सुबह बांग्लादेश के नए नेता को बधाई देकर पहल की है. सूत्र बताते हैं कि यह बधाई संदेश भारत की ओर से चीन या पाकिस्तान से भी पहले दिया गया है.
जानकार मानते हैं कि ढाका को लेकर किसी भी खींचतान में यह कदम अहम हो सकता है. पीएम नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान और उनकी पार्टी को "गर्मजोशी भरी बधाई" दी और कहा, यह जीत बांग्लादेश की जनता के उनके नेतृत्व पर भरोसे को दिखाती है. उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि भारत एक "लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश" का समर्थन करेगा. हालांकि, नई सरकार के लिए यह एक सामान्य संदेश था, लेकिन इसके स्पष्ट संकेत था, भारत चाहता है कि बीते 18 महीनों की उथल-पुथल को पीछे छोड़कर, जिसमें बांग्लादेश का चीन और पाकिस्तान के साथ बढ़ता संपर्क और हिंदू अल्पसंख्यकों की मर्डर शामिल रही, एक स्थिर एवं कामकाजी रिश्ता बनाया जाए ताकि दशकों पुराना सहयोगी साथ बना रहे.
क्या देख रहा है भारत?
भारत इस चुनाव पर नजदीकी से नजर रखे हुए था क्योंकि नई सरकार का रुख दक्षिण एशिया की राजनीति और भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है. नई दिल्ली के नजरिए से तीन जुड़े हुए अहम मुद्दे हैं. सबसे बड़ा मुद्दा पाकिस्तान- चीन और बांग्लादेश जुगत की संभावना है. यदि नई सरकार की विदेश नीति शेख हसीना सरकार से भारत समर्थक कम हुई तो यह समीकरण बदल सकता है. ऐसा गठजोड़ दक्षिण एशिया में भारत की मजबूत पकड़ पर नकारात्मक असर डाल सकता है. दूसरा मुद्दा सीमा और आंतरिक सुरक्षा का है. अवैध घुसपैठ, खासकर पश्चिम बंगाल और असम चुनाव से पहले, बड़ा राजनीतिक मुद्दा है. शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद वहां भड़की हिंसा में हिंदू विरोधी भावनाएं भी उभरी थी.