वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार रंजीत भट्टाचार्य का निधन, मरणोपरांत किया नेत्रदान और देहदान
धमतरी, 14 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार रंजीत भट्टाचार्य का उनके गृह नगर धमतरी में शुक्रवार को निधन हो गया. उन्होंने नेत्रदान और देहदान के लिए घोषणा पत्र भरा था. मरणोपरांत उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए उनके परिवारजनों ने पार्थिव शरीर रायपुर ले जाकर मेडिकल कॉलेज को सौंप दिया.
जिला हिन्दी साहित्य समिति धमतरी के पूर्व अध्यक्ष रह चुके रंजीत विगत लगभग पचास वर्षों से साहित्य और पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय थे और हिन्दी नई कविताओं के साथ -साथ ग़ज़ल लेखन में भी अपने नये प्रयोगों के लिए जाने जाते थे.उनकी नई अतुकांत कविताओं का संग्रह 'पाँव बने हाथ 'वर्ष 1987 में प्रकाशित हुआ था. कुछ वर्ष पहले उनकी हिन्दी ग़ज़लों का संकलन 'दुबला -पतला चाँद ' भी प्रकाशित होने के बाद काफी चर्चा में आया था. उन्होंने छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ की पृष्ठभूमि पर उनका एक विज्ञान - उपन्यास 'अबूझमाड़ का अतिथि' भी छप चुका है. रंजीत भट्टाचार्य ने अपने मित्र रामबिलास अग्रवाल के साथ मिलकर धमतरी से वर्ष 1977-78 में साप्ताहिक 'अपना मोर्चा ' का सम्पादन और प्रकाशन शुरू किया था.यह साप्ताहिक लगभग एक दशक तक चला.
रंजीत भट्टाचार्य ने धमतरी के दैनिक 'प्रखर समाचार ' के अनेक दीपावली विशेषांकों के प्रकाशन में भी सम्पादन सहयोगी के रूप में अपना महत्वपूर्ण सहयोग दिया. वे रायपुर के दैनिक 'हरिभूमि ' के धमतरी संस्करण के भी सम्पादन सहयोगी थे. उनके साथ काम कर चुके कई पत्रकार उन्हें बेहद परिश्रमी, अनुशासनप्रिय और प्रेरक सम्पादक के रूप में याद करते हैं. धमतरी जिला साहित्य समिति के अध्यक्ष डुमनलाल ध्रुव सहित समिति के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों ने तथा धमतरी के पत्रकारों और प्रबुद्ध नागरिकों ने रंजीत भट्टाचार्य के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है और उन्हें श्रद्धांजलि दी है. समिति द्वारा आयोजित शोक सभा में साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में रंजीत भट्टाचार्य के सुदीर्घ योगदान को याद किया गया.