ट्रंप के टैरिफ़ रद्द, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को डोनाल्ड ट्रंप ने बताया "शर्मनाक "
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन ग्लोबल टैरिफ के विरुद्ध निर्णय सुनाया है, जो ट्रंप ने पिछले वर्ष लागू किए थे. जानिए, भारत- अमेरिका ट्रेड डील पर क्या असर होगा..
नई दिल्ली, 21 फरवरी 2026. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते वर्ष दूसरे देशों से अमेरिका आने वाले सामग्री पर टैक्स लगाने का ऐलान किया था. ट्रंप का कहना था कि इससे अमेरिकी फैक्ट्री को लाभ मिलेगा. इसके लिए ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस (अमेरिकी संसद) से मंजूरी नहीं ली थी, बल्कि 1977 के इंटरनेशनल आपात इकोनॉमिक पावर्स कानून का इस्तेमाल किया था.
इस कानून के अंतर्गत आपात घोषित करने से ट्रंप तुरंत आदेश जारी कर सकते थे और कांग्रेस को दरकिनार कर सकते थे. लिहाजा, ट्रंप ने इसका लाभ उठाया. अगस्त 2025 में एक अमेरिकी अपील कोर्ट ने कहा था कि ट्रंप के अधिकतर टैक्स गैर कानूनी है, लेकिन उन्हें लागू रहने दिया गया. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की एंट्री तब हुई, जब व्हाइट हाउस ने अपील कोर्ट के निर्णय को बदलने की मांग की. अपने निर्णय में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने अपनी क्षमता से बाहर जाकर अधिकारों का इस्तेमाल किया और इंटरनेशनल आपात के लिए बने अधिनियम का सहारा लिया.
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, इंटरनेशनल आपात इकोनॉमिक पावर्स अधिनियम राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की इजाजत नहीं देता है. सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप के तारीफ के विरुद्ध फैसला दिया.
ट्रंप ने दी पहली प्रतिक्रिया
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने इस निर्णय को "शर्मनाक " बताया. अमेरिकी राज्यों के गवर्नर की एक मीटिंग में बोलते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने यह बातें कही.
कुछ टैरिफ रहेंगे मौजूद
अंतर्राष्ट्रीय आपात इकोनॉमिक पावर्स कानून राष्ट्रपति को किसी आपात स्थिति में व्यापार को 'नियंत्रित' करने का अधिकार देता है. ट्रंप ने पहली बार फरवरी 2025 में इसका इस्तेमाल किया. उन्होंने चीन, मेक्सिको और कनाडा से आने वाले चीजों पर टैक्स लगाया. ट्रंप ने इस कानून का इस्तेमाल करते हुए फिर अप्रैल में लगभग हर देश से आने वाले सामग्री पर 10% से 50% तक टैक्स लगाने का आदेश दिया.
कोर्ट का निर्णय- 'ट्रंप की ताकत पर लगाम '
डोनाल्ड ट्रंप महीनों से इस बात की चेतावनी दे रहे थे कि सुप्रीम कोर्ट का एक संभावित निर्णय अमेरिका के लिए भयंकर नतीजा लेकर आएगा और उनके टैरिफ़ लगाने की क्षमता को सीमित करेगा. लेकिन ऐसा लगा जैसे सुप्रीम कोर्ट ने उनकी चिंताओं की अनसुनी कर दी और 6 जस्टिसों ने राष्ट्रपति के विरुद्ध निर्णय दिया.
भारत- अमेरिका ट्रेड डील पर क्या असर होगा.
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के अजय श्रीवास्तव कहते हैं कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का भारत - अमेरिका ट्रेड डील पर भी असर होगा. रिसिप्रोकल टैरिफ हट जाने से अब भारत को अमेरिका के कुल निर्यात के 55% हिस्से पर अब 18 पर्सेंट टैक्स नहीं देना होगा. यानी अब उन पर स्टैंडर्ड एमएफएन टैरिफ ही लगेंगे. भारत के बाकी निर्यात पर सेक्शन 232 के तहत टैरिफ़ जारी रहेंगे. यानी इस्पात और एल्युमिनियम पर 50% और कुछ ऑटो कॉम्पोनेंट्स पर 25% टैक्स लगेंगे.