• महादेव और पार्वती के मंगल विवाह का महापर्व  महाशिवरात्रि रविवार को, जानिए पूजा मुहूर्त, कथा और आरती

    हिंदू पंचांग के मुताबिक, महाशिवरात्रि का महापर्व फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. यह देवों के देव  महादेव भोलेनाथ की उपासना का सबसे बड़ा दिन होता है. जानते हैं, इस महाशिवरात्रि से जुड़े पूजा का मुहूर्त और अन्य संपूर्ण जानकारी हैदराबाद के बेगम बाजार स्थित संतोषी माता मंदिर के पुजारी पंडित सुनील कुमार  पाण्डेय से. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट :-

    हैदराबाद, 14 फरवरी 2026. हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि की विशेष धार्मिक मान्यता होती है. इसे शिव की महान रात्रि भी कहा जाता है. मान्यतानुसार महाशिवरात्रि के दिन ही महादेव और मां पार्वती का विवाह हुआ था. ऐसे में हर साल फाल्गुन माह में महाशिवरात्रि का व्रत रखा जाता है और महादेव (Lord Shiva) और मां पार्वती की पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है. इस साल 15 फरवरी, रविवार के दिन महाशिवरात्रि का व्रत रखा जा रहा है.भगवान भोलेनाथ की उपासना का सबसे बडा महापर्व महाशिवरात्रि हर शिव भक्त के लिए खास होता है. इस दिन श्रद्धालु सच्चे मन से व्रत रखते हैं और भोलेनाथ की विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं.

    धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, यह शिवरात्रि इसलिए बेहद खास होती है क्योंकि इस दिन भोलेनाथ धरती के सभी शिवलिंग में वास करते हैं. यही वजह है कि इस दिन शिवलिंग का अभिषेक और पूजन जरूर किया जाता है. जिससे भोलेनाथ की कृपा भक्तों पर प्राप्त की जा सके. पंडित सुनील कुमार पाण्डेय बताते हैं कि हिंदू पंचांग के मुताबिक, इस वर्ष महाशिवरात्रि की पवन तिथि 15 फरवरी रविवार की शाम 5 :04 बजे आरंभ होकर 16 फरवरी सोमवार की शाम 5:34 बजे तक रहेगी. चूंकि 15 फरवरी रविवार की रात तक  चतुर्दशी तिथि मौजूद रहेगी इसलिए महाशिवरात्रि का पावन उत्सव 15 फरवरी रविवार को ही मनाया जाएगा.

    महाशिवरात्रि पूजा मुहूर्त

    महाशिवरात्रि पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त 15 फरवरी रविवार की देर रात 12  बजकर 9 मिनट से रात 1 बजे कर 1 मिनट तक रहेगा. यह निशिता काल है जो शिवरात्रि पूजन के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है. इसके अलावा कई लोग रात्रि के चारों प्रहर में भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना करते हैं.

    महाशिवरात्रि चार प्रहर पूजा मुहूर्त 

    ● रात्रि प्रथम पहर पूजा समय: 6:11 पीएम से 9 :23 पीएम तक. 

    ● रात्रि द्वितीय  प्रहर पूजा समय: 9:23 पीएम से 12:35 एएम 16 फरवरी.

    ● रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय: 12:35 एएम 3:47 एएम तक.

    ● रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय: 3:47 एएम से 6:59 एएम 16 फरवरी तक.

    महाशिवरात्रि व्रत कब से कब तक

    इस व्रत को श्रद्धालु  15 फरवरी को रख सकते हैं. व्रत का आरंभ 15 फरवरी के सूर्योदय के साथ आरंभ होगा और समापन अगले दिन यानी 16 फरवरी के सूर्योदय के बाद होगा. वहीं, शिवरात्रि व्रत का पारण समय 16 फरवरी की सुबह 6 :59 से दोपहर 3:24 बजे तक रहेगा.

    महाशिवरात्रि पूजा सामग्री

    बेलपत्र, अक्षत, गाय का दूध, पान के पत्ते, सुपारी, जनेऊ, चावल, शक्कर, सफेद बूरा, शहद, इलायची, लौंग, गंगाजल, मदार के फूल, धतूरा, भांग, सफेद फूल, पांच प्रकार के मौसमी फल, शमी के पत्ते, केसर, इत्र, सफेद चंदन, गन्ने का रस, मिठाई या  चूरमा का भोग.

    महाशिवरात्रि पूजा विधान

    ● महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर  व्रत का संकल्प लें. 

    ● पूजा के लिए एक चौकी की स्थापना करें और उसे पर पीला या लाल रंग का  साफ कपड़ा बिछाएं. फिर इस चौकी पर थोड़े चावल रखें और भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा स्थापित करें.

    ● एक मिट्टी या तांबे का कलश लेकर उसे पर स्वास्तिक बनाएं और उसने थोड़ा गंगाजल और शुद्ध जल मिला लें. साथ ही इसमें सुपारी, सिक्का और हल्दी का गांठ डालें.

    ● शिव जी के समक्ष गाय के घी का दीपक जलाएं और साथ ही एक छोटा शिवलिंग स्थापित करें और यदि घर में शिवलिंग नहीं है तो मिट्टी से इसे तैयार कर लें.

    ● शिवलिंग का जल, दूध या  पंचामृत से अभिषेक करें और मन ही मन  ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करते रहें.

    ● इसके बाद शिवलिंग को साफ कपड़े से  पोंछकर उसपर बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी के फूल और फल आदि चढाएं.

    ● फिर महाशिवरात्रि की कथा पढ़ें और कपूर से भगवान शिव की आरती करें. 

    ● इसके बाद मिठाई, खीर और फल का भोग  लगाएं. पूजा संपन्न होने के बाद सभी में प्रसाद बांट दें.

    महाशिवरात्रि पर करें भगवान शिव की यह आरती

    ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
    ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
    ॐ जय शिव ओंकारा॥

    एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
    हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥
    ॐ जय शिव ओंकारा॥
    दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
    त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥
    ॐ जय शिव ओंकारा॥

    अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।
    त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥
    ॐ जय शिव ओंकारा॥

    श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
    सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥
    ॐ जय शिव ओंकारा॥

    कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी।
    सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी॥
    ॐ जय शिव ओंकारा॥

    ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
    मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
    ॐ जय शिव ओंकारा॥

    लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा।
    पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा॥
    ॐ जय शिव ओंकारा॥

    पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
    भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा॥
    ॐ जय शिव ओंकारा॥

    जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
    शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
    ॐ जय शिव ओंकारा॥

    काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
    नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
    ॐ जय शिव ओंकारा॥

    त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
    कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥
    ॐ जय शिव ओंकारा॥