• लोकसभा में जोरदार हंगामा, प्रश्नकाल बाधित, राहुल के खिलाफ सब्सटेंटिव मोशन

    बजट सत्र के दौरान गुरुवार को लोकसभा में प्रश्नकाल हंगामे की भेंट चढ़ गया. सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सुबह 11 बजे विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी और कई सदस्य प्ले कार्ड और पोस्टर लेकर वेल में पहुंच गए, जिसके कारण माहौल शोरगुल में  बदल गया. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की  विशेष रिपोर्ट :-

    नई दिल्ली, 12 फरवरी 2026. स्थिति सामान्य ना होने पर अध्यक्ष की कुर्सी पर मौजूद केपी  तेन्नटी ने करीब 7 मिनट बाद ही सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी. बाद में दोपहर 12 बजे लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू की गई. इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी राज्यसभा पहुंच गए.

    राहुल के विरुद्ध सब्सटेंटिव मोशन 

    इधर, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के विरुद्ध सब्सटेंटिव मोशन पेश किया है. दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश को गुमराह कर रहे हैं. उन्होंने उनकी संसद सदस्यता रद्द करने और भविष्य में चुनाव लड़ने पर आजीवन पाबंदी लगाने की मांग भी की. दरअसल, सब्सटेंटिव  मोशन एक स्पष्ट  और स्वतंत्र प्रस्ताव होता है, जिस पर सदन सीधे चर्चा कर  फैसला ले सकता है. इसमें स्पष्ट लिखा जाता है कि सदन किसी विषय पर क्या राय या निर्णय देना चाहता है. प्रस्ताव पर बहस और मतदान संभव है, और पारित होने की स्थिति में यह सदन आधिकारिक अभिव्यक्ति मानी जाती है.

    विशेषाधिकार  हनन प्रस्ताव की भी संभावना 

    कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार राहुल गांधी के विरुद्ध विशेषाहनन प्रस्ताव भी ला सकती है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संकेत दिया था कि सरकार पर लगाए गए  आरोपों यह संबंध में प्रिविलेज मोशन लाया जा सकता है. इससे पहले मंत्री रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें 4 फरवरी को लोकसभा अध्यक्ष  ओम बिरला के चेंबर में हुए हंगामे का जिक्र है. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसदों ने  प्रियंका गांधी की मौजूदगी में अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया. हालांकि, प्रियंका गांधी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि गाली गलौज की बात निराधार है. प्रियंका का कहना है कि उन्होंने किसी को नहीं उकसाया और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी थी.

    विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव क्या होता है?

    विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव के जरिए संसद या विधानसभा का कोई सदस्य यह मुद्दा उठा सकता है कि किसी सदस्य, मंत्री या अधिकारी ने सदन के विशेषाधिकारों का उल्लंघन किया है. संविधान के अनुच्छेद 105 में संसद सदस्यों  को दिए गए विशेषाधिकारों  का उल्लेख है, ताकि वे बिना किसी दबाव के अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें. इनमें सदन में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दिए गए  वक्तव्य पर न्यायालय में मुकदमा न चलाना और आवश्यक जानकारी पाने का अधिकार शामिल है.

    यदि इन अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो संबंधित सदस्य स्पीकर को नोटिस देता है एवं अध्यक्ष तय करते हैं  कि मामला विचारणीय है या नहीं. वहीं, अनुमति मिलने पर इसे विशेषाधिकार  समिति के पास भेजा जाता है, जो जांच कर रिपोर्ट सकती है. अंतिम फैसला सदन करता है. जबकि दोषी पाए जाने पर संबंधित सदस्य को  चेतावनी, फटकार, निलंबन या  दुर्लभ मामलों में हिरासत जैसी कार्रवाई का   सामना करना पड़ सकता है.