सरकारी प्राइमरी स्कूल में मिड - डे मील खाने से 45 छात्र बीमार, 38 अस्पताल में भर्ती, 10 की हालत गंभीर
तेलंगाना के कोनिजेरला मंडल के बोडियाथांडा स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल में मिड-डे मील खाने से छात्रों की हालत बिगड़ गई. 38 बीमार छात्र अस्पताल में एडमिट कराए गए, जिनमें 10 की हालत गंभीर है. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट :-
संगारेड्डी / कोनिजेरला / हैदराबाद, 1 फरवरी 2026. तेलंगाना के कोनिजेरला मंडल के बोडियाथांडा स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल के 38 छात्रों को शुक्रवार ( 30 जनवरी) को फूड प्वाइजनिंग के चलते अस्पताल में एडमिट कराया गया, जिनमें से 10 की हालत गंभीर बताई जा रही है. यह घटना संगारेड्डी जिले के एक सरकारी प्राइमरी स्कूल में मिड - डे मील खाने के बाद 45 छात्रों के बीमार होने के एक दिन बाद घटी. छात्रों में उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसे लक्षण दिखे. हालांकि, गांव वाले, माता-पिता और सरकारी स्कूल के स्टाफ ने तुरंत प्रभावित छात्रों को खम्मम सरकारी अस्पताल पहुंचाया. उन सभी बीमारी का अस्पताल में इलाज चल रहा है.
क्या होता है मिड - डे मील?
सरकारी प्राइमरी स्कूल में मिड - डे मील वह स्कीम है, जिसके तहत स्कूली बच्चों को दोपहर का भोजन स्कूल की तरफ से दिया जाता है. यह खाना बिल्कुल फ्री होता है और ताजा ही बनाया जाता है. ये भोजन नियमों के मुताबिक, पौष्टिक और इसमें न्यूनतम कैलोरी, प्रोटीन और विटामिन होता है. इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों में भूख कम करना और पोषण स्तर सुधारना है. इसका एक और प्रमुख उद्देश्य है, स्कूल में नामांकन बढ़ाना, उपस्थिति बेहतर करना और ड्रॉप आउट रोकना है. इससे खासकर गरीब परिवारों के बच्चों को प्रोत्साहन मिलता है, क्योंकि कई बच्चे खाली पेट स्कूल आते हैं. इससे सामाजिक समानता भी बढ़ती है और सभी बच्चे एक साथ बैठकर खाते हैं.
इतना ही नहीं, इससे जाति / वर्ग के भेदभाव कम होते हैं और लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा मिलता है. हालांकि, पहले भी इस तरह के मामले आए हैं, जब मिड - डे मील खाने से बच्चे बीमार पड़े हैं. इसकी मुख्य वजह साफ सफाई का ध्यान नहीं रखना और खाने की उच्च गुणवत्ता का ख्याल नहीं रखता है. इसके पीछे जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि ये बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ का मामला है. गरीब बच्चे आवाज नहीं उठाते, इसलिए इस तरह खाने की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाता है.