अविश्वास प्रस्ताव पर निर्णय नहीं होने तक सदन नहीं जाएंगे स्पीकर, ओम बिरला ने किया ऐलान
लोकसभा में मंगलवार को उस वक्त राजनीतिक हलचल तेज हो गई जब विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंप दिया. सौंपे गए नोटिस पर अपनी प्रतिक्रिया देने में अध्यक्ष ओम बिरला ने तनिक भी देर नहीं की और सचिवालय को इस पर त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की खास रिपोर्ट :-
नई दिल्ली, 10 फरवरी 2026. विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के विरुद्ध मंगलवार को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दाखिल किया. अविश्वास प्रस्ताव में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, लेफ्ट पार्टी और आरजेडी जैसे दलों के 118 सांसदों के दस्तखत वाले इस नोटिस को लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को सौंपा गया. प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 94 (सी ) और लोकसभा नियम 94(सी ) के तहत दाखिल किया गया. वहीं, बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे जॉर्ज सोरोस के इशारे पर काम कर रहे हैं.
अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला न होने तक स्पीकर ओम बिरला सदन नहीं जाएंगे
नोटिस प्राप्त होने के सिर्फ एक घंटे के भीतर अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकसभा सचिवालय को निर्देश दिया कि नोटिस की जांच की जाए और प्रक्रिया को तेज किया जाए. यह निर्देश लिखित रूप में जारी हुआ, जो दर्शाता है कि अध्यक्ष मामले को गंभीरता से ले रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उन्हें हटाने के प्रस्ताव पर कोई निर्णय नहीं हो जाता, तब तक वे लोकसभा की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेंगे.
नोटिस मिलने के बाद आसन पर नहीं आए अध्यक्ष ओम बिरला
बता दें कि लोकसभा के महासचिव को नोटिस सौंप दिया गया है. इसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने खुद को सदन की कार्यवाही से अलग कर लिया है. मंगलवार को स्पीकर सदन की कार्यवाही के लिए आसन पर नहीं आए.
बीजेपी का आरोप, विपक्ष जॉर्ज सोरोस के इशारे पर काम कर रहा है
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा ने मंगलवार को पत्रकार वार्ता में विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि लोकसभा में जारी हंगामा के पीछे विपक्ष की सोची - समझी कोशिश है, जो देश में अस्थिरता पैदा कर रही है. पात्रा ने दावा किया कि मोदी सरकार बनने के बाद से ही राहुल गांधी, कांग्रेस और उनके सहयोगी दल जॉर्ज सोरोस के इशारों पर चल रहे हैं. वे सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग, लोकसभा अध्यक्ष और पीएम जैसे संवैधानिक संस्थानों पर लगातार हमले कर रहे हैं. पात्रा ने विपक्ष को लोकतंत्र का दुश्मन बताते हुए कहा, जनता सब देख रही है.
विपक्ष का आरोप, सदन चलाने में खुला पक्षपात
दूसरी तरफ विपक्ष का आरोप है कि अध्यक्ष ओम बिरला सदन की कार्यवाही को खुलेआम पक्षपात तरीके से संचालन कर रहे हैं. विपक्षी सांसदों, विशेष कर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने का उचित समय नहीं दिया जा रहा. प्रस्ताव में हाल के उदाहरण दिए गए हैं, जैसे धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी का भाषण बीच में रोकना और 8 विपक्षी सांसदों का निलंबन. विपक्ष का कहना है कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है और अध्यक्ष विपक्ष की आवाज को दबा रहे हैं.
बजट सत्र में जारी गतिरोध
यह घटना बजट सत्र के दौरान लोकसभा में लगातार
अटकाव, स्थगन और नारेबाजी के बीच हुई. राहुल गांधी द्वारा पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की बुक से भारत- चीन संबंधों पर अंश पढ़ने की कोशिश के बाद विवाद बढ़ा. अध्यक्ष ओम बिरला ने दावा किया कि कांग्रेस सांसद पीएम की सीट की तरफ बढ़ सकते थे, इसलिए उनका संबोधन रद्द हुआ. जबकि विपक्ष ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. पिछले 22 वर्षों में पहली बार राष्ट्रपति का अभिभाषण बिना पीएम के जवाब के पारित हुआ.
प्रस्ताव दाखिल करने वाले सांसद
नोटिस कांग्रेस सांसद के एस सुरेश, गौरव गोगोई और मोहम्मद जावेद ने जमा किया. लेकिन परंपरा के मुताबिक, राहुल गांधी ने हस्ताक्षर नहीं किए, क्योंकि विपक्ष के नेता के तौर पर अध्यक्ष को हटाने की मांग करना उचित नहीं माना जाता. वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने भी इस प्रस्ताव पर दस्तखत नहीं किए.