• 'पहले घर तोड़ा अब मतदाता सूची से नाम काटा जा रहा है... हमारी नागरिकता का क्या होगा?'

    "अगर मतदाता सूची से नाम कट गया तो  हमारी नागरिकता चली जाएगी. डर से ना नींद आ रही है और ना ही कुछ  खाया पिया जा रहा है. हमारे घर तोड़ दिए गए अब यदि नागरिकता नहीं रही तो कहां जाएंगे?" समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट :-

    नौगांव (असम ), 10 फरवरी 2026. इतना कहते ही बुजुर्ग महिला फ़ाजिला खातून सुबुक कर रोने लगती है. फ़ाजिला इस वक्त असम के नौगांव जिले के कचुआ पुलिस इलाके में चांनखुला के एक खुले ग्राउंड में प्लास्टिक की बनी झोपड़ी में रह रही हैं. एसआर यानी विशेष रिवीजन से जुड़े एक नोटिस दिखाते हुए फ़ाजिला कहती हैं,
    "मैं नोटिस मिलने के बाद अपने बेटों के साथ  उस ऑफिस गई जहां हमें बुलाया गया. ऑफिसर को सारे कागज दिखाए. तीन से चार बार सुनवाई के लिए गए. नहीं जाते तो मतदाता सूची से नाम काट दिया जाता." अब भी मन में डर बैठा है. टेंशन हो रही है. हमारी नागरिकता नहीं बची तो क्या होगा? कुछ लोग बोल रहे हैं कि हमारा नाम काट दिया है. किसके पास जाऊं? क्या करूं, कुछ भी समझ में नहीं आ रहा."

    असम के नौगांव जिले के चांनखुला के एक बड़े मैदान में रंग बिरंगी प्लास्टिक से बनी छोटी-छोटी सैकड़ों झोपड़ियां दूर रास्ते से ही दिख जाती है. करीब डेढ़ महीने पहले यहां आकर बसे लगभग 331 परिवार नौगांव जिले  लुटुमारी आरक्षित वन क्षेत्र के अलग-अलग गांवों के रहने वाले हैं. बीते वर्ष 29 नवंबर से लगातार 2 दिन चले बड़े अतिक्रमण हटाओ अभियान में लुटुमारी आरक्षित वन क्षेत्र में करीब 6 हजार बीघा यानी लगभग 798 हेक्टर कब्जे वाली जमीन खाली कराई गई थी.

    हालांकि, सरकारी जमीन से हटाए जाने के बाद इन लोगों के सामने स्थाई पता बदलने की समस्या आ गई है. अब जगह बदलने की वजह से इन लोगों को मतदाता सूची के विशेष रिवीजन के लिए होजाई जिले में संपर्क करना पड़ रहा है. जबकि असम में शुरू हुई एसआर प्रक्रिया में नागरिकता की स्थिति पर नजर रखे बिना मौजूदा वोटर लिस्ट का फिजिकल वेरीफिकेशन और इसे अपडेट करना कठिन काम है. वहीं एसआर के तहत बीएलओ मौजूद मतदाताओं की डिटेल्स वाले पहले भरे हुए फार्म का इस्तेमाल करके जांच के लिए घर-घर दस्तक देंगे.

    असम में लगभग 29,659 बीएलओ को एसआर काम के लिए लगाया गया है. जबकि ठीक इसके उलट एसआईआर में सभी पंजीयत  मतदाताओं को मतदाता सूची में बने रहने के लिए गिनती के फॉर्म जमा करने होंगे. इस प्रक्रिया में हर वोटर से नागरिकता का सबूत मांगा जाएगा. एसआईआर में जिन मतदाताओं का नाम वैरिफाई नहीं होगा, उनका नाम सूची से हटाया जा सकता है. दरअसल, एसआईआर को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बीते साल 27 अक्टूबर को एक आदेश जारी किया था. उस वक्त असम को इस प्रक्रिया से अलग रखा गया था.

    चुनाव आयोग ने इसकी वजह बताते हुए कहा था कि भारत के नागरिकता कानूनों में असम के लिए एक अलग प्रावधान है. वहीं, दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नागरिकता पहचान प्रक्रिया का काम अंतिम चरण में है. लिहाजा, असम में फिलहाल एसआईआर का काम नहीं किया जा सकता. लेकिन इस आदेश के महज कुछ दिन बाद ही असम में  'विशेष रिवीजन' की घोषणा कर दी गई जिसे लेकर  राज्य का राजनीतिक माहौल गरमा गया है.