• स्मिता वर्मा ने बनाए अब तक 500 रंगोली -चित्र

    दुर्ग, 11 फरवरी 2026। रंग -बिरंगी लोक -संस्कृतियों के प्रदेश छत्तीसगढ़ के रंगोली -चित्रकारों में स्मिता वर्मा एक तेजी से उभरती प्रतिभा हैं। उन्होंने अब तक लगभग पाँच सौ रंगोली -चित्र बना लिए हैं। कई रंगोली प्रतियोगिताओं में उन्हें पुरस्कृत भी किया जा चुका है।उनके द्वारा बनाए गए रंगोली -चित्रों में राष्ट्रीय सामाजिक, धार्मिक -सांस्कृतिक त्यौहारों  सहित छत्तीसगढ़ और देश की महान विभूतियों  के चित्र भी शामिल हैं। स्मिता ने देश के सैनिकों, श्रमिकों, आध्यात्मिक गुरुओं के भी रंगोली -चित्र बनाए हैं । उन्होंने वीर हनुमान, वीर शिवाजी महाराज, स्वामी दयानंद सरस्वती, गुरू बाबा घासीदास, महात्मा गांधी और सावित्री बाई फुले जैसी विभूतियों के साथ के साथ मकर संक्रांति, नागपंचमी, क्रिसमस और स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों को भी अपनी रंगोली -चित्रकला का विषय बनाया है। नशा -मुक्ति के लिए जन -जागरण भी उनकी रंगोली -चित्रकला का विषय बना है।
     
    स्मिता वर्मा का जन्म दुर्ग जिले के ग्राम लिमतरा में हुआ था। वे वर्तमान में इसी जिले के ग्राम -कातरो (तहसील-पाटन) के शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल में गणित की व्याख्याता हैं। उन्होंने बताया कि अध्यापन कार्य के बाद का समय वे अपनी रंगोली -चित्रकला की साधना में लगाती हैं। आसपास की महिलाओं के साथ रंगोली चित्रकला के बारे में बातचीत करती हैं  और एक -दूसरे की रंगोली -कला के बारे में अनुभवों का आदान -प्रदान भी करती हैं । बच्चों को भी रंगोली चित्रकला से जुड़ने के लिए प्रेरित करती हैं।
     
    स्मिता ने बताया कि छत्तीसगढ़ की लोक -संस्कृति में त्यौहारों के अवसर पर घरों के आंगन में चौक पूरने और हाथा (हाथ का चिन्ह )देने की प्रथा है। हाथा शुभ चिन्ह माना जाता है। अलग-अगल त्यौहारों में अलग-अलग चौक बनाए जाते हैं। गाँव की महिलाएँ अपने-अपने घरों में चौक बनाकर पूजा, त्यौहार, विवाह या अन्य अवसरों पर अपनी इस पारम्परिक लोक कला का परिचय देती हैं। उन्हें देखकर स्मिता को भी इस परम्परागत चित्रकला से जुड़ने की प्रेरणा मिली। उन्होंने छुटपन से ही रंगोली चित्रकला को साधा। अपने परिवारजनों से और बाद में भिलाई नगर आकर पड़ोस की महिलाओं से भी उन्होंने रंगोली चित्र कला को खूब मन लगाकर सीखा। कई रंगोली प्रतियोगिताओं में उन्हें पुरस्कृत भी किया गया।