'काल की अश्वगति से चलते रहने की बात बताई.. आर्य समाज ने मनाई स्वामी श्रद्धानंद की 170वीं जयंती
समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की खास रिपोर्ट : हैदराबाद, 24 फरवरी 2026. यहां के आर्य समाज महर्षि दयानंद मार्ग स्थित सुल्तान बाजार में आयोजित साप्ताहिक यज्ञ के उपरांत महाराष्ट्र आर्य प्रतिनिधि सभा के मुख्य पत्र " वैदिक गर्जना" एवं साप्ताहिक लातूर समाचार के परामर्शदाता डॉ. नयन कुमार आचार्य द्वारा विशेष प्रवचन दिया गया. उन्होंने 'काल की अश्वगति से चलते रहने की बात बताई और समझाया कि स्वामी श्रद्धानंद मुंशीराम से कैसे महर्षि दयानंद सरस्वती के अनन्य भक्त बनकर गुरुकुल प्रथा का पुनरुद्धार किया.
डॉ. नयन कुमार आचार्य ने बताया कि शुद्धि आंदोलन के प्रणेता, कांग्रेस में हिंदी बोलने वाले प्रथम व्यक्ति, एक साधारण व्यक्ति से महान व्यक्ति बनने में उनके त्याग और तपस्या तथा पुरुषार्थ और सत्य की राह पर अडिगता ही उनके आदर्शों को दर्शाता है. इस दौरान डॉ. प्रताप रूद्र में मुख्य अतिथि का परिचय दिया एवं मंच पर प्रवचन करने के लिए आमंत्रित किया. तत्पश्चात संगठन सूत्र और आर्य समाज के नियम एवं उद्देश्य का पाठ किया गया.
आयोजित कार्यक्रम में प्रतिष्ठित आज सज्जनों में डॉ. धर्म तेजा, भरत मुनि, प्रदीप दत्त, राज भूषणम, शिवाजी, अरविंद कुमार, दयानंद रेड्डी, अरुण कुमार लाठकर, रणधीर सिंह, प्रदीप जाजू, काशीराम, के. संदीप, एम. राधिका, सुचित्रा चंद्र, मीरा आर्य, सौ. मनीषा, नयन कुमार आचार्य, चि. अजिंक्य, भक्तराम और अन्य शामिल हुए. अंत में डॉ. आचार्य ने सभी से स्वामी श्रद्धानंद जी के मार्ग पर चलने और समग्र विश्व को आर्य बनाने के लिए प्रण लेने का निवेदन किया. वहीं, शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ.