होलिका दहन और रंगों वाली होली पर 'चंद्र ग्रहण ' का साया, काशी में मसान...
काशी के सभी पंचांगों में होलिका दहन का दिन 2 मार्च और रंग खेलने का दिन 4 मार्च तय किया गया है. यह स्थिति 3 मार्च को चंद्र ग्रहण के कारण बन रही है. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट..
वाराणसी, 1 मार्च 2026.
भद्रा काल में वर्जित है होलिका दहन
भृगु संहिता विशेषज्ञ पं. वेद मूर्ति शास्त्री ने बताया कि भद्रा काल में वर्जित है होलिका दहन. वहीं पुच्छ की भद्रा में होलिका दहन की छूट दी गई है. पंडित शास्त्री के मुताबिक, विश्व पंचांग में 2 मार्च की शाम 5:21 बजे भद्रा आरंभ होने की बात कही गई है. जबकी हृषिकेश पंचांग के मुताबिक, 'भद्रा 2 मार्च की शाम 5:18 बजे' पर आरंभ होगा.
इन दोनों पंचांगों में भद्रा समाप्ति का समय क्रमशः 3 मार्च की सुबह 4:58 और 4: 56 बजे बताया गया है. इस आधार पर पुच्छ की भद्रा 2 मार्च की रात्रि 12:50 बजे से रात्रि 1बजे के बीच आरंभ हो जाएगी.
शनिवार को द्वादशी तिथि पर बाबा ने खेली महाश्मशान में होली
काशी में देवस्थान और माहाश्मशान दोनों का महत्व है. यहां जन्म और मृत्यु, दोनों को मंगल माना जाता है. रंगभरी एकादशी पर गृहस्थों के साथ होली खेलने के पश्चात द्वादशी तिथि पर शनिवार को बाबा ने अपने गणों, भूत - प्रेतों के साथ महाश्मशान में होली खेली. सुबह बाबा मशाननाथ की विधि के साथ पूजा की गई. अघोर पीठाधीश्वर कपाली बाबा, बाबा माहाश्मशान नाथ सेवा समिति के अध्यक्ष चैनु प्रसाद गुप्ता, प्रबंधक गुलशन कपूर ने बाबा महाश्मशाननाथ और माता मशान काली (शिव शक्ति) की मध्याह आरती कर बाबा को जया, विजया, मिष्ठान और सोमरस का भोग लगाया.
तत्पश्चात बाबा एवं माता को चिता भस्म और गुलाल चढ़ाने के साथ होली शुरू हो गई. इससे पूर्व ब्रह्मणाल स्थित बाल भैरव मंदिर से बाबा श्मशाननाथ की पालकी उठाई गई. इस मौके पर भगवान शिव का औघड़ स्वरूप धारण किए कलाकार नृत्य करते रहे. पालकी यात्रा मणिकर्णिका घाट पहुंचने के बाद श्मशाननाथ की आरती उतारी गई.
कब से कब तक चंद्र ग्रहण और सूतक है
3 मार्च को चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजे से लगेगा. सूतक प्रातः 6: 47 बजे से प्रारंभ होकर ग्रहण मोक्ष तक प्रभावी रहेगा. सूतक प्रातः 6: 27 बजे से प्रारंभ हो जाएगा और कई जगह सुबह 9 बजे सूतक काल शुरू होगा जबकि मंदिर के कपाट 3 मार्च प्रातः 5:30 बजे खुलेंगे एवं आरती के बाद 6:10 बजे पर बंद हो जाएंगे.