दीनदयाल और अटल को भूली बीजेपी, सत्ता व संपत्ति मुख्य लक्ष्य - दीपक मिश्र
समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की खास रिपोर्ट---
लखनऊ, 7 अप्रैल 2026. बौद्धिक सभा द्वारा आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए ''रामराज -- राष्ट्रीयता एवं समाजवाद के लेखक" व प्रख्यात समाजवादी चिंतक दीपक मिश्र ने कहा कि वर्तमान अथवा नई भारतीय जनता पार्टी पंडित दीनदयाल उपाध्याय एवं अटल बिहारी वाजपेयी सिद्धांतों और दर्शन से पूर्णतया विचलित हो चुकी है. नई भाजपा भले ही यदा - कदा इन महापुरुषों का दिखावे और छलावे के लिए नाम लेती हो लेकिन आचरण दोनों के दृष्टिकोण के ठीक उलट है. पंडित दीनदयाल उपाध्याय को भारत रत्न न देना उनका अपमान है.
दीनदयाल जी की सार्वजनिक जीवन में सादगी, सिद्धांत, स्वदेशी, सत्यनिष्ठा और सहजता से बीजेपी दूर निकल चुकी है, इसीलिए उन्हें विभूषित करने में हिचक रही है. उनका एकात्म मानव दर्शन, एक मानव दर्शन और राष्ट्र नाम केवलम् मोदी नाम केवलम् में परिवर्तित हो चुका है. स्वदेशी अभियान को बीजेपी पूर्णतया भूल चुकी है. विदेशी कंपनियों और विदेशी पूंजी के हवाले देश की पूरी अर्थव्यवस्था कर दिया है. देश के ऊपर कर्ज दिनों - दिन पल-प्रतिपल बढ़ रहा है जिसे दीनदयालजी सबसे बड़ा आर्थिक कुप्रबंधन कहते थे.
भाजपा राज में कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार से देश 747 अरब डॉलर के कर्ज में है, पूरे बजट के पांचवे हिस्से से अधिक ब्याज चुकाने में जा रहा है. आज भारत का आर्थिक स्वावलंबन और संप्रभुता संकट में है. अटलजी ने आज ही के दिन 1980 में भाजपा की स्थापना करते हुए भाजपा के संविधान में समाजवाद शब्द को जोड़ा था और जनता पार्टी की विरासत को आत्मसात करते हुए जनसंघ के नाम को बदलकर भारतीय जनता पार्टी किया था. वर्तमान बीजेपी समाजवाद से जुड़े हर महान प्रतीकों को दुराग्रह पूर्वक मिटा रही है.
जनसंघ के समय के नेताओं सम्मान एक राजनीतिक ढकोसला के सिवाय कुछ भी नहीं. बीजेपी में पूंजीवाद और जातिवाद चरम पर है जिसे आधार बनाकर येन केन प्रकारेण सत्ता में बने रहना ही वर्तमान बीजेपी का एकमेव लक्ष्य रह गया है. आयोजित संगोष्ठी में प्रो. अमिता, प्रो. डी. राय, अवनीश त्रिपाठी, विकास चंद्र यादव समेत कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे.