• लोहिया समाजवाद के प्रखर चिंतक बैकुंठनाथ डे की जन्म शताब्दी पर वंचितों- निर्धनों  में अन्न व वस्त्र दान

    समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की  यह विशेष रिपोर्ट:-

    रांची, 20 फरवरी 2026। डॉ. राम मनोहर लोहिया के करीबी रहे समाजवादी चिंतक तथा प्रतिष्ठित अधिवक्ता बैकुंठनाथ डे की पिछले दिनों जन्म शताब्दी मनाई गई. झारखंड के बोकारो जिले के साडम स्थित बंगाली टोला के सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय में डॉ. राम मनोहर लोहिया ट्रस्ट एवं लोहिया आश्रम द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कार्यक्रम के दौरान सामाजिक सरोकारों से जुड़े अनेक जनहित कार्यक्रम चलाए गए. इस दौरान वंचितों एवं निर्धनों में खाद्य सामग्री व वस्त्र वितरण किए गए.

    यह जानकारी ट्रस्ट के महासचिव तथा रांची हाई कोर्ट के प्रसिद्ध अधिवक्ता श्याम कुमार डे ने हिंदी डिजिटल न्यूज़ पोर्टल " आज की आवाज " को दी है. उनके मुताबिक, कार्यक्रम के  क्रम में पेवर ब्लॉक सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय परिसर में लगाया गया और कई निर्धन कन्याओं के विवाह खर्च के तौर पर आर्थिक मदद दी गई. इस मौके पर इलाकों से बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए और सभी ने इस प्रखर समाजवादी चिंतक बैकुंठनाथ डे की दीर्घायु की कामना की.

    कौन हैं डॉ. लोहिया के सहयोगी रहे अधिवक्ता बैकुंठ नाथ  डे?

    बैकुंठनाथ डे डॉ. राम मनोहर लोहिया के सिर्फ सहयोगी ही नहीं थे, बल्कि डॉ. राम मनोहर लोहिया रिसर्च फाउंडेशन के संस्थापक सदस्य भी रहे. 100 वर्ष की आयु पर डे साहब की जन्म शताब्दी वर्ष मनाई गई. दरअसल, वे पहले बिहार और अब झारखंड के बोकारो जिले के साडम गांव के मूल निवासी रहे एक विशिष्ट अधिवक्ता और उम्र के 100वें पड़ाव पर होने के बावजूद भी झारखंड हाई कोर्ट में कानूनी मामलों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं.

    हालांकि, बैकुंठ नाथ डे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान और बाद में डॉ. लोहिया के काफी  करीबी सहयोगी रहे, इन्होंने लोहिया समाजवाद को आगे बढ़ाया और आजीवन समाजवादी विचारधारा से जुड़े रहे. इतना ही नहीं, वे डॉ लोहिया द्वारा स्थापित आदर्श के प्रबल समर्थक रहे हैं. संक्षेप में कहूं तो बैकुंठनाथ डे झारखंड में लोहिया के समाजवादी आंदोलन के एक जीवंत कड़ी और वरिष्ठ अधिवक्ता के तौर पर जाने जाते हैं.