• मर्जर प्लान फेल? एनसीपी के विलय पर सस्पेंस!  'घड़ी' की चाबी किसके हाथ?

    सुनेत्रा पवार को महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम के रूप में नियुक्त करना क्या "सत्ता की मजबूरी, या शरद पवार से वैचारिक दूरी बनाए रखने की राजनीतिक चाल है?" यह मिश्रित परिणाम अजित पवार के विमान हादसे में निधन के घटनाक्रम के बाद होते दिख रहा है. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ यह विशेष रिपोर्ट :-

    मुंबई, 2 फरवरी 2026. अजित पवार के निधन के बाद,  एनसीपी (अजित गुट) के सामने तुरंत एक  प्रमुख चेहरे की कमी हो गई थी. पार्टी को डर था कि उनके बिना गुट बिखर सकता है.

     बीजेपी की रणनीति सफल

    बीजेपी चाहती है कि महाराष्ट्र में अजित पवार की राष्ट्रवादी पार्ट कांग्रेस पार्टी कमजोर ना पड़े और सत्ता में बनी रहे. इसीलिए, सुनेत्रा पवार को सीधे उपमुख्यमंत्री बनाकर, बीजेपी ने महायुति गठबंधन को स्थिरता देने का संदेश दिया है.

    विलय की खबरों पर रोक 

    दूसरी तरफ अजित पवार के गुट के वरिष्ठ नेता (प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे) इस फैसले के पीछे थे, ताकि शरद पवार के साथ पार्टी का संभावित विलय रोका जा सके और पार्टी पर उनका वर्चस्व बना रहे.

    अजीत पवार के विरासत और पार्टी को बचाना

    बताया जा रहा है कि पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने सुनेत्रा पवार को (भाभी) के रूप में सम्मान दिया  और उनसे कहा कि यह अजित दादा की काम को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है. हालांकि, शुरुआत में  सुनेत्रा पवार तैयार नहीं थी, लेकिन पार्टी के 'वारिस' के रूप में उन्हें आगे लाया गया ताकि बारामती के गढ़ और अजित दादा द्वारा बनाई गई पार्टी को बरकरार रखा जा सके.

    प्रतीकात्मक और रणनीतिक  विकल्प 

    सुनेत्रा पवार को एक "मराठा चेहरा" के रूप में देखा गया, जो पार्टी के  कैडर को एकजुट रख सकता है, वहीं, दूसरी ओर  उन्हें डिप्टी सीएम बनाना, अजित दादा के असामयिक निधन से पैदा हुए शून्य भरने और महायुति गठबंधन को मजबूत बनाए रखने के लिए हड़बड़ी में लिया गया एक रणनीतिक फैसला कहा जा सकता है. हालांकि, सुनेत्रा पवार के कंधों पर अब केवल सरकार की नहीं, बल्कि अजित पावर गुट 
    के अस्तित्व को बचाने की भी भारी जिम्मेदारी है. लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि क्या दिल्ली तय करेगी "घड़ी" की चाल क्या हो? सवाल यह भी है कि क्या दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का विलय तभी होगा जब बीजेपी चाहेगी?

    महाराष्ट्र की सियासत में  शनिवार को एक नया अध्याय तो शुरू हुआ, लेकिन अपने साथ कई  अनसुलझे सवाल  छोड़ गया. सुनेत्रा पवार ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली. अजित दादा की विरासत को संभालने का जिम्मा उठाया, लेकिन इस समारोह में एक चेहरे की कमी चर्चा बनी, जो अजित दादा की अंतिम विदाई की घड़ी में आंसुओं को थामे हुए सुनेत्रा भाभी के साथ साए की तरह उन्हें संभालती दिखी, वो चेहरा थी सुप्रिया सुले की. अजित दादा की अंतिम संस्कार के वक्त कि वह तस्वीरें कोई नहीं भूला है, जब सुप्रिया सुले अपनी भाभी सुनेत्रा पवार को हिम्मत देती नजर आई थी. तब लगा था कि  पवार परिवार का दुख शायद राजनीति की दीवारें गिरा देगा. लेकिन सुनेत्रा के शपथ ग्रहण से सुप्रिया की दूरी ने साफ कर दिया कि इमोशन और इलेक्शन दो अलग पटरी पर है.

    क्या सुप्रिया की यह दूरी शरद पवार की उसे नाराजगी का संकेत है जो विलय की चर्चा को ठंडे बस्ते में डालती दिख रही है? राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विलय की कहानी अभी सस्पेंस में है. शरद पवार और उनके नेता जयंत पाटिल ने खुद पुष्टि की है कि  विलय की बातचीत चल रही  थी लेकिन अजित पवार की मृत्यु ने इस पूरी प्रक्रिया को फिलहाल अधर में लटका दिया है. शरद पवार ने खुद ही कहा है कि विलय की प्रक्रिया अब "अनिश्चित" दिखता है.