• 100 साल पुरानी गौशाला से हटेगा  कब्जा, तेलंगाना हाई कोर्ट ने दिया अतिक्रमण हटाने का आदेश

    तेलंगाना हाई कोर्ट ने हैदराबाद के मुस्लिमजंग ब्रिज के समीप 100 साल पुरानी (निजाम काल की) ऐतिहासिक गौशाला से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है. कोर्ट के अधिकारियों को 2 हफ्ते के भीतर कार्रवाई कर  रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है, जिससे गौशाला का हिस्सा अतिक्रमण से मुक्त हो सके. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट:-
    हैदराबाद, 31 जनवरी 2026. प्रदत्त जानकारी के मुताबिक, गौशाला की 400 वर्ग गज जमीन में से काफी हिस्से पर होटल और  अन्य निर्माण कर अतिक्रमण कर लिया गया है.

     न्यायालय का आदेश

    हाई कोर्ट ने सरकारी अधिकारियों और जीएचएमसी (ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन) को निर्देश दिया है कि  वे अतिक्रमण करने वालों को वहां से हटाएं, न कि गौशाला को, ताकि गौशाला का संचालन सुचारू रूप से हो सके. जानकारी के मुताबिक यह गौशाला निजाम के समय की है और एक ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा है. इस संबंध में गौशाला ट्रस्ट प्रबंधन ने बताया कि अतिक्रमण के कारण पशु कल्याण कार्य में बाधा आ रही थी, जिस पर अदालत ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. तेलंगाना हाई कोर्ट ने आदेश में साफ कहा है कि कब्जाधारकों को गौशाला खाली करने के लिए 2 हफ्ते का समय दिया गया है. 

    यह फैसला संपत्ति के संरक्षण और ऐतिहासिक महत्व की नजर से अहम माना जा रहा है. यह गौशाला, जो निजाम के समय स्थापित की गई थी, स्थानीय इतिहास और  सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है. पिछले कई वर्षों से कुछ लोगों ने इस संस्थान पर अतिक्रमण कर रखा है, जिससे न केवल संपत्ति का नुकसान हो रहा है, बल्कि स्थानीय प्रशासन को भी समस्या का सामना करना पड़ रहा था.

    तेलंगाना हाई कोर्ट ने कहा कि इस ऐतिहासिक संपत्ति की सुरक्षा और कानूनी नियमों का पालन करना अनिवार्य है. कोर्ट ने साफ कहा है कि अतिक्रमण कानूनी दृष्टि से स्वीकार्य नहीं है और इसे तुरंत हटाना होगा. इस संबंध में विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल हैदराबाद की ऐतिहासिक संपत्तियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह कानून की प्राथमिकता और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण भी प्रस्तुत करता है.

    इस बीच स्थानीय अधिकारियों ने घोषणा की है कि कब्जा धारकों को कोर्ट के निर्देशानुसार कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किया जा रहा है. दो हफ्तों के भीतर यदि अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो प्रशासन कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा. हालांकि, यह कदम हैदराबाद की सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक संपत्तियों के संरक्षण में मिल का पत्थर साबित होगा.