• अवैध उत्खनन के ट्रक को रोकने पर भड़के SDM, गांववालों पर टूटा कहर, पिटाई से बुजुर्ग आदिवासी की मौत पर SDM सस्पेंड

    ग्रामीणों ने बताया कि, हंसपुर इलाके में बॉक्साइट का अवैध उत्खनन किया जा रहा था। यहां से रोज कई ट्रक बाक्साइट कोरंधा मार्ग से झारखंड भेजा जाता था। अवैध उत्खनन में सीधे तौर पर एसडीएम करूण डहरिया और कुछ भाजपा नेता शामिल थे।

    बलरामपुर/रायपुर, 18 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ झारखंड बॉर्डर पर स्थित गांव हंसपुर में रविवार की रात एसडीएम करुण डहरिया एवं उनके गुर्गे ग्रामीणों पर कहर बनकर टूट पड़े। पूरे मामले में ग्रामीणों ने बड़ा खुलासा किया है कि, हंसपुर इलाके में बॉक्साइट का अवैध उत्खनन किया जा रहा था। यहां से रोज कई ट्रक बाक्साइट कोरंधा मार्ग से झारखंड भेजा जाता था। अवैध उत्खनन में सीधे तौर पर एसडीएम करूण डहरिया और कुछ भाजपा नेता शामिल थे। ग्रामीण अवैध उत्खनन का विरोध कर रहे थे। रविवार को ग्रामीणों ने अवैध बॉक्साइट लोड एक गाड़ी को रोक दी थी।

    ट्रक को रोकने की सूचना पर एसडीएम करूण डहरिया अपने वाहन और एक थार में सवार होकर 7 से 8 लोग हंसपुर पहुंचे थे। गाड़ी का सायरन सुनकर ट्रक को रोकने वाले ग्रामीण भाग गए। खेतों में पानी डालकर लौट रहे राम नरेश और दो अन्य लोगों को इसकी जानकारी नहीं थी। डंडे से लैस एसडीएम और उनके गुर्गे आदिवासी रामनरेश राम और उनके साथियों पर टूट पड़े। 

    सोमवार को शव का पोस्टमॉर्टम किया गया, लेकिन परिजन शव लेकर नहीं गए। मंगलवार को सर्व आदिवासी समाज और कांग्रेस ने कुसमी में धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन खत्म होने के बाद मंगलवार देर शाम राम नरेश राम (62) की डेड बॉडी उनके घर पहुंची। बताते हैं प्रशासन के दबाव में शव का रात में ही अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहीं, मारपीट में घायल अजीत उरांव (60) और आकाश अगरिया (20)का इलाज कुसमी स्वास्थ्य केंद्र में किया जा रहा है। वहीं राज्य शासन ने बुधवार को पिटाई से आदिवासी की मौत के मामले में जेल में बंद एसडीएम को निलंबित कर दिया है।

    कुसमी बंद, बस स्टैंड में धरना
    सर्व आदिवासी समाज के आह्वान पर मंगलवार को कुसमी पूरी तरह बंद रहा। सुबह से ही सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। बस स्टैंड में आयोजित धरने में पूर्व मंत्री अमरजीत भगत और राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानुप्रताप सिंह मौजूद रहे। वक्ताओं ने राज्य सरकार की नीति और नीयत पर सवाल उठाते हुए मृतक के आश्रितों को एक करोड़ रुपये मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को शासकीय नौकरी तथा घायलों को पांच-पांच लाख रुपये देने की मांग की। वहीं मौके पर मौजूद नायब तहसीलदार पारस शर्मा की भूमिका की जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।  एसडीएम की पिटाई से बुजुर्ग आदिवासी रामनरेश राम की मौत पर कांग्रेस ने पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के संयोजन में 10 सदस्ययीय जांच दल का गठन किया है।

    जानिए क्या है पूरा मामला ?

    जानकारी के मुताबिक, कुसमी एसडीएम करूण डहरिया और नायब तहसीलदार पारस शर्मा राजस्व टीम के साथ रविवार देर शाम हंसपुर पहुंचे थे। वहां बॉक्साइट के अवैध उत्खनन के लोड ट्रक को रोके जाने पर बौखलाए हुए थे। रात में 9 बजे हंसपुर के 3 आदिवासी सरना के पास टीम को मिले। आरोप है कि एसडीएम, नायब तहसीलदार, भाजपा नेता अजय प्रताप सिंह उर्फ विक्की सिंह और उनके साथ मौजूद युवकों ने तीनों आदिवासियों को लाठी और लात-घूंसों से पीटा। इसके बाद तीनों को गाड़ी में बैठाकर कुसमी ले जाया गया। रास्ते में एक आदिवासी की हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई।

    अति गरीब परिवार का मुखिया था रामनरेश
    मृतक रामनरेश राम हंसपुर गांव का निवासी था और अत्यंत गरीब परिवार का मुखिया था। उसकी पत्नी का पहले ही निधन हो चुका है। दो बेटियां और तीन बेटों के सहारे परिवार चलता था। रोज दिहाड़ी मजदूरी के बिना दो वक्त का भोजन जुटाना भी मुश्किल था। गांववालों के अनुसार उसे शासकीय योजनाओं का लाभ भी नहीं मिला था और पीएम आवास से भी वंचित था।