• "हम किसी को भी अरावली को छूने नहीं देंगे.." किस पर भड़के CJI?

    नई दिल्ली, 13 फरवरी 2026। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (12 फरवरी) को दो टूक कहा कि वह किसी को भी अरावली छूने की इजाजत नहीं देगा। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने हरियाणा सरकार को जंगल सफारी पर डिटेल्ड प्लान जमा करने की इजाज़त देने से भी मना कर दिया, जब तक कि एक्सपर्ट्स "अरावली रेंज" की परिभाषा साफ नहीं कर देते। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि जंगल सफारी के मुद्दे पर तब विचार किया जाएगा, जब वह अरावली रेंज पर मुख्य मामले पर विचार करेगी।

    सुनवाई के दौरान हरियाणा के वकील ने कहा कि उन्होंने सफारी प्रोजेक्ट की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) को 10,000 एकड़ से बदलकर 3,300 एकड़ से ज़्यादा कर दिया है। उन्होंने कहा कि वे बस इतना चाहते हैं कि उन्हें सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) को उनकी जांच के लिए DPR देने की इजाज़त दी जाए। इस पर CJI ने कहा, “हम एक्सपर्ट नहीं हैं। एक्सपर्ट्स अरावली की परिभाषा तय करेंगे। जब तक अरावली रेंज की परिभाषा फ़ाइनल नहीं हो जाती, हम किसी को भी अरावली को छूने नहीं देंगे।"

    अरावली सिर्फ हरियाणा या राजस्थान की नहीं

    CJI कांत ने कहा कि अरावली सिर्फ हरियाणा या राजस्थान की नहीं है, बल्कि यह एक रेंज है जो कई राज्यों से होकर गुज़रती है। हरियाणा सरकार के वकील से उन्होंने कहा, "हम सफारी के इस मुद्दे को मेन मामले के साथ देखेंगे।" इस पर वकील ने कहा कि मेन मामला बिल्कुल अलग है और सफारी का मुद्दा अलग है। इतना सुनते ही बेंच ने कहा, "कभी-कभी, सीईसी अनुमति देने में बहुत चुनिंदा रवैया अपनाता है। अगर हम इसकी अनुमति देते हैं, तो वे बहुत ही आकर्षक तस्वीर पेश करेंगे कि ये पेड़, वन्यजीव और जंगल हैं।"

    विशेषज्ञ समिति की राय आने के बाद करेंगे विचार

    सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि विशेषज्ञ समिति की राय आने के बाद वह सफारी परियोजना पर विचार करेंगे।  शीर्ष अदालत ने पिछले साल अक्टूबर में प्रस्तावित 'अरावली जंगल सफारी दुनिया का सबसे बड़ा जू-सफारी बताया जा रहा था।'' 'जू सफारी' परियोजना का उद्देश्य गुरुग्राम और नूहं जिलों में स्थित पर्यावरण की दृष्टि से नाजुक अरावली पर्वत शृंखला के 10,000 एकड़ क्षेत्र में बाघ, तेंदुआ, शेर के लिए क्षेत्र स्थापित करना और सैकड़ों प्रजातियों के पक्षियों, सरीसृपों और तितलियों को आश्रय देना है।