• कांकेर मुठभेड़ में 4 लाख की इनामी महिला नक्सली ढ़ेर, तेलंगाना कैडर की हार्डकोर नक्सली थी ACM रुपी

    ACM कमांडर रूपी तेलंगाना की अंतिम तेलुगू कैडर थी, जिसने अबतक सरेंडर नहीं किया था. वो बस्तर इलाके में सक्रिय थी.
    कांकेर, 13 अप्रैल 2026। छोटे बेठिया और परतापुर के बॉर्डर इलाके में आज सुबह माओवादियों और जवानों के बीच नक्सल मुठभेड़ हुई है. इस मुठभेड़ में जवानों ने एक महिला माओवादी को मार गिराया. मारी गई महिला माओवादी की पहचान ACM कमांडर रूपी के रूप में की गई है. रूपी तेलंगाना की अंतिम तेलगु कैडर थी जिसने अबतक सरेंडर नहीं किया था. अपने साथियों के सरेंडर करने के बावजूद वो बस्तर इलाके में सक्रिय थी.

    तेलंगाना कैडर की हार्डकोर नक्सली ACM रुपी ढेर
    बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि जिला कांकेर के छोटेबेठिया–परतापुर थाना क्षेत्र के सीमावर्ती इलाके के माचपल्ली, आरामझोरा, हिडूर क्षेत्र के जंगलों में माओवादियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी. इस सूचना पर पुलिस बल को सर्च ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया था. सर्च अभियान के दौरान पुलिस बल और माओवादियों के बीच माचपल्ली इलाके में मुठभेड़ हुई. बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि हम अब भी अपील कर रहे हैं कि जो भी बचे हुए माओवादी हैं वो समाज की मुख्यधारा में लौट आएं. हिंसा का रास्ता अपनाने वाले रूपी का हश्र देख लें. अभी भी आपके पास सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का मौका है.

    कांकेर के छोटे बेठिया में हुआ एनकाउंटर
    एनकाउंटर खत्म होने के बाद इलाके में सघन सर्चिंग अभियान चलाया गया. सर्चिंग के दौरान सुरक्षाबलों को 1 महिला माओवादी कैडर का शव मिला. मुठभेड़ में बरामद माओवादी कैडर के शव की पहचान महिला माओवादी कमांडर ACM रूपी के रूप में की गई. एसीएम रूपी, डीकेएसजेडसी सदस्य विजय रेड्डी की पत्नी थी. जिसकी वर्ष 2025 में जिला मानपुर–मोहला में एक मुठभेड़ के बाद शव बरामद किया गया था. एसीएम रूपी बस्तर क्षेत्र में सक्रिय अंतिम तेलुगू माओवादी कैडर थी. मुठभेड़ स्थल की सर्चिंग के दौरान मृत महिला माओवादी के शव के साथ एक पिस्टल हथियार, गोला-बारूद और अन्य सामान बरामद किया गया है. सुरक्षा के लिहाज से अभी भी इलाके में सुरक्षा बलों द्वारा सर्च ऑपरेशन जारी है.

    सरेंडर और पुनर्वास का आखिरी मौका: बस्तर आईजी
    बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने कहा कि माओवादी कैडरों के सामने आत्मसमर्पण और पुनर्वास का अब भी मौका है. जो बचे हुए माओवादी हैं वो हथियार डाल दें. आईजी ने कहा कि बीते कुछ महीनों में काफी बड़ी संख्या में माओवादी कैडरों ने पुनर्वास का मार्ग अपनाया है. किंतु रूपी जैसे कुछ कैडरों ने पुनर्वास के मार्ग को छोड़कर हिंसात्मक रास्ता अपनाया. जिसका परिणाम आज उसके अंत के रूप में सामने आया है. आईजीपी बस्तर ने शेष बचे कुछ माओवादी कैडरों से अपील की कि उनके पास अब बहुत सीमित समय शेष है. वे सभी हिंसा के मार्ग को त्यागें और समाज की मुख्यधारा में लौटकर एक शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की शुरुआत करें.