• वेदांता पावर प्लांट हादसा, अनिल अग्रवाल समेत 10 पर FIR: प्रोडक्शन दोगुना करने की जल्दबाजी में फटा बॉयलर

    वेदांता पॉवर प्लांट हादसे में अब तक 20 लोगों की जान जा चुकी है। 3 फरवरी 2026 को 3.66 लाख करोड़ की नेटवर्क वाली कंपनी वेदांता ग्रुप के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने ऐलान किया था कि अपनी संपत्ति का 75% हिस्सा सामाजिक कार्यों के लिए दान करेंगे। मजदूरों की मौत पर कंपनी की ओर से केवल 35 लाख रुपए मुआवजे पर लोग सवाल उठा रहे हैं। कंपनी की लापरवाही के शिकार हुए मजदूर के परिजनों को कम से कम पांच-पांच करोड़ रुपए के मुआवजा दिया जाना था। साथ ही उनके परिवार को भरण-पोषण हर महीने एक निश्चित राशि दी जानी चाहिए। 
    सक्ति, 17 अप्रैल 2026। सक्ति जिले के एसपी प्रफुल्ल ठाकुर ने बताया कि प्रबंधन समेत 8-10 लोगों के खिलाफ डभरा थाने में FIR दर्ज की गई है। इनमें कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और प्लांट हेड देवेंद्र पटेल के नाम शामिल हैं। घटना के 24 घंटे बाद औद्योगिक सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हादसे की जांच की थी। जिसमें प्लांट प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई है। शुरुआती जांच के मुताबिक, प्रोडक्शन दोगुना करने की जल्दबाजी में बॉयलर फटा। चेतावनी के बाद भी काम नहीं रोका गया। इसके अलावा मशीनों के रखरखाव और संचालन में लापरवाही बरती गई। इसी आधार पर केस दर्ज किया गया है।

    गुरुवार को उद्योग एवं श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन रायगढ़ पहुंचे। यहां उन्होंने मरीजों से मुलाकात कर उनका हालचाल पूछा। मंत्री देवांगन ने कहा कि घायलों के बेहतर इलाज में निर्देश दिए गए हैं। घटना की जांच की जा रही है जो भी दोषी पाया जाएगा, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भी घायलों से मुलाकात की। पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए की मुआवजा दिए जाने की मांग की।

    कंपनी के मुआवजे पर सवाल

    3 फरवरी 2026 को 3.66 लाख करोड़ की नेटवर्क वाली कंपनी वेदांता ग्रुप के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने ऐलान किया था कि अपनी संपत्ति का 75% हिस्सा सामाजिक कार्यों के लिए दान करेंगे। मजदूरों की मौत पर कंपनी की ओर से केवल 35 लाख रुपए मुआवजे पर लोग सवाल उठा रहे हैं। कंपनी की लापरवाही के शिकार हुए मजदूर के परिजनों को कम से कम पांच-पांच करोड़ रुपए के मुआवजा दिया जाना था। साथ ही उनके परिवार को भरण-पोषण हर महीने एक निश्चित राशि दी जानी चाहिए। 

    ज्यादा फ्यूल जमा होने के कारण प्रेशर बना

    औद्योगिक सुरक्षा विभाग के बॉयलर इंस्पेक्टर उज्जवल गुप्ता और उनकी टीम ने बुधवार को लगभग 6 घंटे तक घटना स्थल की जांच की। शाम 8 बजे रिपोर्ट एसपी प्रफुल्ल ठाकुर को सौंपी गई। जांच में सामने आया कि बॉयलर फर्नेस के अंदर ज्यादा मात्रा में फ्यूल जमा हो जाने के कारण तेज प्रेशर बना। दबाव के कारण बॉयलर का निचला पाइप अपनी निर्धारित स्थिति से हट गया। जिस वजह से ब्लास्ट हुआ। FSL की रिपोर्ट में भी यही कारण बताया गया है। जांच में यह भी पाया गया कि मशीनों के रखरखाव और संचालन में लापरवाही बरती गई। एसपी के निर्देश पर एएसपी पंकज पटेल के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई है, जो पूरे मामले की जांच कर रही है।

    दबाव 1 से 2 सेकेंड के अंदर बढ़ा

    विभाग के अनुसार, हादसा 14 अप्रैल को दोपहर 2:33 बजे हुआ। उस समय 2028 टीपीएच क्षमता वाले विशाल वाटर ट्यूब बॉयलर में फर्नेस प्रेशर (भट्ठी का दबाव) तेजी से बढ़ा। यह दबाव 1 से 2 सेकेंड के अंदर बढ़ा, जिससे सिस्टम को बंद करना या किसी तकनीकी खराबी को रोकना संभव नहीं था। दबाव इतना तेज था कि अंदरूनी विस्फोट हुआ और इसकी चपेट में बाहरी पाइपलाइन भी आ गई। जांच में सामने आया है कि, 1 घंटे में दोगुना उत्पादन करने के लिए बॉयलर का लोड तेजी से बढ़ाया गया। लोड 350 मेगावाट से बढ़ाकर लगभग 590 मेगावाट किया गया। यह वृद्धि बहुत कम समय में की गई।

    इन बिंदुओं पर होगी मजिस्ट्रियल जांच

    सक्ती के कलेक्टर अमृत विकास तोपने ने मजिस्ट्रियल जांच की घोषणा की है और कहा कि जांच उपरांत दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे।

    1. घटना कब और कैसे हुई
    2.  घटना के लिए कौन जिम्मेदार हैं
    3.  घटना का तकनीकी या मानवीय क्या कारण है
    4.  हादसे वाले दिन कौन-कौन मजदूर कार्यरत थे, किनकी मौत हुई, कौन घायल हुए
    5. प्रशासनिक अधिकारियों ने कब कब प्लांट का निरीक्षण किया, क्या कोई खामियां मिली थी, यदि हां तो क्या कार्रवाई की गई
    6.  भविष्य में इस प्रकार की घटना ना हो, इस रोकने के उपाय और सुझाव

    मुआवजे का ऐलान

    वेदांता प्रबंधन ने मृतक परिजन को 35-35 लाख रुपए सहायता राशि और नौकरी देने का ऐलान किया है। घायलों को 15-15 लाख रुपए दिए जाएंगे। इससे पहले PMO ने मुआवजे की घोषणा की थी। PMNRF से हर मृतकों के परिवार वालों को 2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए दिए जाएंगे। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से मृतकों के परिवार वालों को 5-5 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए दिए जाएंगे।

    हादसे में कुल 36 लोग झुलसे

    प्लांट सिक्योरिटी हेड प्रेम झा के मुताबिक, हादसे में कुल 36 लोग घायल हुए हैं, जिसमें से 12 लोग छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। बाकी लोग बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड के हैं।

    घायल मजदूरों का इलाज जारी

    रायगढ़ के अलग अलग अस्पताल में 11 घायलों का इलाज चल रहा है। रायगढ़ के बालाजी मेट्रो हॉस्पिटल में बनवारी लाल, उपेंद्र और परदेशी लाल चंद्रा का इलाज जारी है। वहीं 2 मजदूरों उमेंद्र और किस्मत अली का रायपुर के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। उनका इलाज कर रहे डॉ. सुनील कालडा ने बताया कि चार मजदूर गंभीर अवस्था में लाए जा रहे थे जिसमें दो की रास्ते में मौत हो गई और 90% झुलसे दो लोगों को वेंटिलेटर पर रखा गया है उनकी स्थिति काफी क्रिटिकल बनी हुई है। उधर एक दिन पहले मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 7 और जिला अस्पताल में 5 शवों का पोस्टमॉर्टम किया गया। पीएम कराने के लिए मृतकों के परिजन भटकते रहे। वहीं 5 मृतकों के परिजन नहीं आ पाने की वजह से गुरुवार को शवों का पोस्टमॉर्टम किया गया।


    मृतकों के परिजन को 1 करोड़ मुआवजा देने की मांग

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मृतकों के परिजनों को 1-1 करोड़ और घायलों को 50-50 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की है। बैज ने कहा कि इस घटना में 20 मजदूरों की मौत और 36 लोगों के घायल होने की खबर बेहद पीड़ादायक है।