समाजवादी समागम का एक यादगार वर्चुअल वैचारिक गोष्ठी आयोजित
समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट:-
हैदराबाद, 18 मई 2026. कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर समाजवादी समागम का एक वर्चुअल यादगार गोष्ठी रविवार शाम को आयोजित किया गया. प्रिया कुमारी, संता मार्ग इंटर्न. समाजवादी समागम के तत्वावधान में आयोजित कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के स्थापना दिवस के मौके पर एक महत्वपूर्ण वर्चुअल वैचारिक गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य - "राष्ट्र निर्माण में कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की भूमिका."
इस ऐतिहासिक अवसर पर 17 मई 1934 को पटना के अंजुमन इस्लामिया हॉल में स्थापित कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की विरासत, विचारधारा और राष्ट्र निर्माण में उसके योगदान को याद किया गया. कार्यक्रम का संचालन करते हुए रणधीर कुमार गौतम ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और देश-विदेश से ऑनलाइन जुड़े हुए सभी समाजवादी साथियों का स्वागत किया और कहा कि कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को एक वैचारिक आधार, विस्तार, संगठनात्मक शक्ति और सामाजिक-- आर्थिक बदलाव का स्पष्ट कार्यक्रम प्रदान किया.
इस मौके पर उन्होंने कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रसिद्ध समाजवादी चिंतक तथा सेवानिवृत्ति न्यायाधीश टी. गोपाल सिंह का परिचय देते हुए उनके समाजवादी आंदोलन से जुड़े रहने का उल्लेख किया. साथ ही उन्होंने मुख्य वक्ताओं प्रो. राजकुमार जैन एवं रघु कुमार का परिचय भी कराया. प्रारंभिक वक्तव्य के लिए आमंत्रित वरिष्ठ समाजशास्त्री आनंद कुमार ने कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि 1934 में जब कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना हुई, तब उसके नेताओं ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को न केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित रखा बल्कि उसे सामाजिक और आर्थिक न्याय के कार्यक्रमों से भी जोड़ा.
उन्होंने कहा कि समाजवादियों ने जमींदारी उन्मूलन" जताने वाला ही जमीन का मालिक हो, श्रमिकों के अधिकार, 8 घंटे कार्य - दिवस, बाल श्रम निषेध, महिलाओं को मताधिकार सहित सार्वजनिक क्षेत्र के विस्तार जैसे ऐतिहासिक कार्यक्रम भारतीय राजनीति के केंद्र में स्थापित किए.
प्रो. आनंद कुमार ने कहा कि समाजवादियों ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को पूर्ण स्वराज की दिशा दी और यह स्पष्ट किया कि आजादी का मतलब केवल सत्ता हस्तांतरण नहीं, बल्कि जनता के हाथों में राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक निर्णयों की शक्ति होना चाहिए. उन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में समाजवादियों की निर्णायक भूमिका का उल्लेख करते हुए बताया कि जब कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को गिरफ्तार कर लिया गया था, तब समाजवादियों ने भूमिगत आंदोलन, कांग्रेस रेडियो और जन संगठन के माध्यम से स्वतंत्रता संघर्ष को आगे बढ़ाया.
डॉ. रघु कुमार ने अपने वक्तव्य में चार प्रमुख क्षेत्रों - राजनीति, सामाजिक शोध एवं सेवा, सामाजिक सुधार तथा जन जागरण आंदोलनों का उल्लेख करते हुए बताया कि समाजवादी विचारधारा ने स्वतंत्र भारत के सामाजिक और राजनीतिक जीवन को प्रभावित किया है. राजनीतिक क्षेत्र में उन्होंने कर्पूरी ठाकुर का उदाहरण प्रस्तुत किया. उन्होंने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर समाजवादी आंदोलन की उसे विरासत के प्रतिनिधि थे, जिन्होंने पिछले वर्गों को सत्ता के केंद्र तक पहुंचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई. उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में अत्यंत पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण लागू किया और सामाजिक न्याय की राजनीति को नई दिशा दी.
इस उदाहरण में उन्होंने तेलंगाना के समाजवादी चिंतक, लेखक और जन- बुद्धिजीवी सूरमौली का उल्लेख किया. जिन्होंने बताया कि सूरमौली ने किशोरावस्था में ही समाजवादी आंदोलन से जुड़कर तेलुगु समाज में समाजवादी विचारों के प्रसार का कार्य किया. उन्होंने गांधी, समाजवाद और भारतीय सामाजिक प्रश्नों पर अनेक महत्वपूर्ण रचनाओं और अनुवादों के माध्यम से समाजवादी विचारधारा को जनभाषा में पहुंचाया. डॉ रघु कुमार ने कहा कि सूरमौली ने जाति - विरोध, सामाजिक समानता और अहिंसक सामाजिक परिवर्तन के प्रश्नों को अपने लेखन जीवन का केंद्र बनाया.
कार्यक्रम को प्रोफेसर राजकुमार जैन, शिवदयाल जी समेत कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर समाजवादी समागम कि बेचारी वर्चुअल गोष्ठी का समापन वरिष्ठ समाजवादी टी. गोपाल सिंह ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य ने कहा कि आज का विचार - विमर्श अत्यंत सार्थक, ज्ञानवर्धक और ऐतिहासिक महत्व का रहा. उन्होंने आयोजक रणधीर गौतम, समता मार्ग तथा समाजवादी समागम वह बधाई देते हुए कहा कि इस मंच ने देश भर के समाजवादी साथियों और चिंतकों को एक सूत्र में जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है.
उन्होंने विद्वान वक्ताओं से मार्क्सवाद, राम मनोहर लोहिया और बी आर अंबेडकर पर गंभीर अध्ययन लेखन कार्य करने वालों से आग्रह किया कि भविष्य के सम्मेलनों और वैचारिक चर्चाओं में डॉ. रघु कुमार जैसे विद्वानों को निरंतर आमंत्रित किया जाना चाहिए, ताकि समाजवादी विमर्श और अधिक समृद्ध हो सके. टी. गोपाल सिंह ने दक्षिण भारत के समाजवादी आंदोलन और सामाजिक परिवर्तन के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि अनेक समाजवादी कार्यकर्ताओं ने अंतरजातीय विवाह, सामाजिक समरसता और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किए हैं.
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सभी प्रतिभागियों, वक्ताओं और आयुष को का आभार व्यक्त करते हुए बैठक के समापन की घोषणा की. कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि वरिष्ठ समाजवादी नेताओं चंद्रशेखर, रवि राय, सुरेंद्र मोहन का जन्मशती यह अवसर पर विशेष स्मृति - कार्यक्रम और संस्मरण - का आयोजन किया जा रहा है. मौजूद साथियों से आग्रह किया गया कि वे याद और लेख भेजकर यादगार अभियान में सहभागी बने.