बंगाल एसआईआर विवाद से पहले महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव आयुक्त ने 'कम समय' में ईसी को किया था आगाह
पश्चिम बंगाल में एसआईआर में करीब 90 लाख हटाए गए हैं और उसको लेकर चुनाव आयोग विपक्ष और टीएमसी के निशाने पर हैं. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट :-
नई दिल्ली/ मुंबई, 12 अप्रैल 2026. चुनाव आयोग (ईसीआई ) ने पिछले वर्ष 27 अक्टूबर को 12 प्रदेशों और केंद्र शासित राज्यों में मतदाता रोल के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की घोषणा की थी. 30 सितंबर को बिहार में एसआईआर खत्म हुआ और उसके बाद ये घोषणा हुई थी. कुछ ही दिनों में अंदरूनी तौर पर रेड फ्लैग उठाया गया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 25 नवंबर को महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईओ) एस. चोकलिंगम ने चुनाव आयोग को लिखा कि तय की गई टाइमलाइन बहुत कम है और इस काम को पूरा करने के लिए काफी समय चाहिए.
महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव आयुक्त ने लिखा था पत्र
महाराष्ट्र उन 12 प्रदेशों में से नहीं था जहां एसआईआर की घोषणा की गई थी. लेकिन सूत्रों ने कहा कि सीईओ का पत्र पोल पैनल और प्रदेशों के बीच बातचीत के दौरान मिले फीडबैक का हिस्सा था. वोटर बेस के हिसाब से महाराष्ट्र देश के टॉप तीन प्रदेशों में से एक हैं, जहां 2024 के लोकसभा चुनावों में 9 करोड़ से अधिक मतदाता थे, जो उत्तर प्रदेश के बाद देश में दूसरा सबसे अधिक है. असल में सीईओ का लेटर दूरदर्शी सोच वाला था, यह देखते हुए कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया में कैसे दिक्कत आई, जहां लगभग 89 लाख नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए. इसके कारण सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा और एक विवाद हुआ जिसने प्रदेश में 23 और 29 अप्रैल को होने वाले चुनावों पर साया डाल दिया.
4 नवंबर को 12 प्रदेशों में शुरू हुआ एसआईआर का दूसरा फेज
एसआईआर का दूसरा पेज 4 नवंबर को 12 प्रदेशों और केंद्र शासित राज्यों में शुरू हुआ, जिसमें चुनाव वाले पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी शामिल हैं. इस प्रक्रिया को पूरा करने में 5 महीनों में कई बार डेडलाइन बढ़ाई गई. पश्चिम बंगाल में 27.1 लाख मतदाताओं ( जिनके नाम ज्यूडिशल ऑफीसर्स के सामने फैसले के बाद हटा दिए गए हैं) के पास फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए काफी समय नहीं है और अब उनके वोट देने का मौका का खतरा है.
महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख ने किया खुलासा
महाराष्ट्र सीईओ के ऑफिस ने पोल पैनल को पहले से चेतावनी दी थी. यह बात हाल ही में कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल को बताई गई थी, जब वह सीईओ से मिला था. महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख हर्षवर्धन सपकाल ने पत्रकारों के समक्ष इसकी पुष्टि की. उन्होंने कहा, "हमारी एक मांग यह थी कि महाराष्ट्र के 2001 और 2002 के एसआईआर प्रक्रिया पर भी विचार किया जाए, जो 13 महीने तक चला था. अधिकारियों ने बताया कि इस प्रक्रिया में जल्दबाजी न करने की रिक्वेस्ट करते हुए ईसीआई को एक पत्र पहले ही भेजा जा चुका है.
पता चला है कि पत्र में साफ तौर पर यह मांग की गई थी कि जहां जरूरी ना हो या चुनाव नजदीक ना हो, वहां एसआईआर प्रक्रिया के लिए काफी समय दिया जाए. पत्र में महाराष्ट्र में किए गए एसआईआर 2002 का जिक्र किया गया था, जो नवंबर 2001 से दिसंबर 2002 तक चला था और 13 महीने तक चला था. सूत्र बताते हैं कि महाराष्ट्र में 2002 का काम अपने तय समय के अंदर पूरा नहीं हो सका, क्योंकि उस समय भी ऑब्जेक्शन सुनने और सुलझाने के लिए काफी समय नहीं दिया गया था.
हालांकि, ईसीआई ने अब तक इसको लेकर कोई जवाब नहीं दिया है. चोकलिंगम ने इस मामले पर कमेंट करने से मना कर दिया. लेकिन ईसीआई अधिकारियों ने कहा कि महाराष्ट्र सहित अधिकतर प्रदेशों में पिछले इंटेंसिव रिवीजन रोल के साथ मौजूदा इलेक्टर्स की मैपिंग शुरू कर दी गई है.