छोटा पैकेट, बड़ा धमाका
डी. आर. साहू
रियल मंत्री या रील मंत्री
राज्य के एक भाईसाहब का अंदाज बहुत निराला है। वह हमेशा दो कैमरामैन साथ लेकर चलते हैं। किसी से हाथ मिलाना हो या किसी के कंधे पर हाथ रखकर बातचीत करनी हो तो पहले वह अपने कैमरामैन को इशारा करते हैं उसके पश्चात ही लोगों से मुखातिब होते हैं। दूसरे राज्यों के दौरे पर होते हैं तब भी कैमरामैन साथ जाते हैं। लोगों से भेंट-मुलाकात या सब्जी वाली से बातचीत को रील बनाकर सोशल मीडिया में पोस्ट करते हैं। पश्चिम बंगाल से भी वह लगातार रील बनाकर डाल रहे हैं। इस पर सोशल मीडिया यूजर सवाल उठाते देखे गए हैं कि भाई साहब रियल मंत्री हैं या सिर्फ रील मंत्री।
डीजी-सीएस की राह पर पीसीसीएफ
छत्तीसगढ़ में तत्कालीन डीजीपी अशोक जुनेजा को छह महीने का सेवा विस्तार मिला था, वहीं मुख्य सचिव अमिताभ जैन को भी तीन महीने का एक्सटेंशन दिया गया था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान अरण्य प्रमुख भी सेवा विस्तार के लिए दिल्ली दरबार में सक्रिय देखे गए हैं। राज्य नेतृत्व से ‘ग्रीन सिग्नल’ नहीं मिलने के बाद पीएमओ में जोर आजमाईश किए जाने की खबर छनकर आ रही है। गौरतलब है कि एक मई 2023 को महोदय जी ने अपने से सात वरिष्ठ अधिकारियों को ‘सुपरसीड’ कर अरण्य के बड़े साहब बनकर रिकॉर्ड बनाया था। अब क्या वह अरण्य प्रमुख के पद पर सेवा विस्तार पाकर इतिहास बनाएंगे या 31 मई को अर्धवार्षिकी पूर्ण कर घर जाएंगे? उधर राज्य ने 31 मई को रिटायर हो रहे मौजूदा पीसीसीएफ के स्थान पर नए HOFF के लिए 7 मई को डीपीसी बुलाई है।
आईएएस तो बन गए, लेकिन कारनामे नहीं बदले
आईएएस बनने के बाद भी एक महाशय जंगल की हरियाली का मोह त्याग नहीं पा रहे हैं। अवार्ड होने के बाद भी एक महीने तक मंत्री के ओएसडी का प्रभार नहीं छोड़ रहे थे। जब महानदी भवन ने आंख तरेरी तब कहीं जाकर ओएसडी की कुर्सी खाली की, लेकिन पता चला है कि ऑफिशियली उन्होंने कुर्सी तो खाली कर दी है परंतु परदे के पीछे आरएन सिंह (पूर्व में) की तरह जंगल महकमे का हिसाब- किताब देख रहे हैं। बताते हैं कि अरण्याधिकारियों को अब भी वह फोन कर सीधे निर्देश दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि नवनियुक्त रेंजर्स की वह दो बार पोस्टिंग करा चुके हैं, अब तीसरी बार पोस्टिंग के लिए मंत्रालय को उन्होंने लिस्ट थमा दी है।
ऊंची उड़ान भरने की ख्वाहिश से भद्द पिटी
एक कथित सहकारी नेता जिस बैंक के अध्यक्ष हैं उसी के अधिकारियों को बात-बात में चोर कहते रहते हैं। एक अधिकारी को बुलाकर दूसरे की पोल पूछते हैं। फिर पहले वाले को बुलाकर धमकाते हैं कि तुम्हारे खिलाफ मेरे पास पूरा कच्चा चिट्ठा है। वह बहुत तेज चलना चाहते हैं। अभी तक पार्षद का चुनाव भी नहीं जीत पाए हैं। लेकिन खुद को मंत्री से ऊपर समझते हैं। पता चला है कि बिना प्रशासकीय स्वीकृति के एसीबी को सीधे निर्देश दे दिया कि अमुक घपले की जांच करें। उनके कहने पर एसीबी थोड़े न कुछ करने वाली है।
फिर क्या था, नेताजी राज्य के प्रशासनिक मुखिया के पास पहुंच गए और फिर वही राग अलापने लगे। बताते हैं बड़े साहब पहले तो धैर्यपूर्वक उनकी बातों को सुनते रहे फिर आखिर में नेताजी पर ही फट पड़े और बोले- ‘‘43 हजार करोड़ रुपये की धान खरीदने वाली और आठ हजार करोड़ रुपये से अधिक कृषि ऋण बांटने वाली संस्था को छोटी-मोटी गड़बड़ियों पर क्या बंद कर दें? आपको नहीं पता है कि एसीबी किस तरह के मामलों की जांच करती है? क्या काम करने वाले सभी अधिकारियों को जेल भेज दें? उसके बाद नेताजी मुंह लटकाकर चौथे माले से नीचे उतर गए।
पुछल्ला
बस्तर में असंभव को संभव कर सुरक्षा बलों ने नया इतिहास लिख दिया है। बड़े दुर्भाग्य की बात है कि ऐसे ऐतिहासिक लम्हे में राज्य में नियमित डीजीपी का अकाल पड़ा है। केंद्र से पैनल आए एक वर्ष होने को है।हाल ही में यूपीएससी ने मुख्य सचिव से नियमित डीजीपी की नियुक्ति नहीं करने पर जवाब मांगा है। अब वह न तो आर्डर निकाल पा रहे हैं और न ही यूपीएससी को जवाब दे पा रहे हैं।
बूझो तो जानें
0 किस अदृश्य शक्ति के कारण नियमित डीजीपी का आदेश जारी नहीं हो पा रहा है?
0 भूपेश बघेल ने 'लुगरा चोर' क्यों कहा?
0 किस विभाग में मंत्री की नहीं ओएसडी की चलती है अधिकारी उन्हीं से आदेश लेते हैं?
0 250 एकड़ सरकारी जमीन 'माटी के मोल' लेने के लिए एक औद्योगिक समूह ने कितने की पूजा-पाठ की सामग्री भेंट की है?