• कॉकरोच जनता पार्टी: अभिजीत दीपके ने जंतर- मंतर   से सरकार को लेकर क्या कहा?

    कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके शनिवार सुबह अमेरिका से दिल्ली पहुंचे और जंतर - मंतर से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट:-

    नई दिल्ली, 6 जून 2026. अभिजीत दीपके ने जंतर- मंतर पहुंच कर कहा, " पिछले 5-10 दिन से लोग मुझसे सवाल कर रहे थे कि सोशल मीडिया पर  पेज चलाकर क्या होगा. उन लोगों को कैमरा घुमाकर यह दिखा दीजिए की जंतर - मंतर पर कितने कॉकरोच घर से बाहर निकाल कर आए हैं. उन्होंने दावा किया, "महज एक - दो दिन में हमारे साथ लाखों स्टूडेंटस होंगे. ये कॉकरोच जनता पार्टी कोई प्लान की हुई पार्टी नहीं है. यह हर एक छात्र की आवाज है, जो सरकार से नाराज हैं. "

    दीपके ने कहा, "10 -12 साल से इन लोगों ने हमें हिंदू - मुसलमान की राजनीति में फंसा कर रखा, इससे किसे फायदा हुआ? क्या हिंदू - मुसलमान करने से देश में किसी को भी नौकरियां मिली?" कॉकरोच जनता पार्टी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है. सीजेपी ने समर्थकों से कहा कि 'आंदोलन को प्रेम और शांति से आगे बढ़ाना है.'

    जंतर - मंतर पर क्या है माहौल

    लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता और विशिष्ट शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने आशंका जताई थी  कि एयरपोर्ट पर सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी भी हो सकती है. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. कॉकरोच जनता पार्टी ने अपने एक्स हैंडल पर जो तस्वीर पोस्ट की है, उसमे अभिजीत दीपके एयरपोर्ट से निकलकर कार में आगे बढ़ते दिख रहे हैं. इस तस्वीर में दीपके के हाथ में बाबा साहब अंबेडकर की जीवनी भी नजर आ रही है. इस बीच जंतर - मंतर पर सुरक्षा काफी कड़ी दिख रही है. हालांकि, वहां युवाओं की भीड़ भी मौजूद हैं और उनकी तादाद बढ़ती हुई दिख रही है. 

    जंतर - मंतर पर बड़ी संख्या में मीडिया कर्मी और पत्रकार नजर आ रहे हैं. साथ ही सीजेपी के खिलाफ बीजेपी के समर्थक भी जंतर - मंतर पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन करने से रोक दिया और बाहर निकाल दिया. इस माहौल में एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया कैंपेन  " कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी, वर्चुअल दुनिया से वास्तविक दुनिया यानी सड़क पर उतर रही है." इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी ने एक हैंडल "कॉकरोच इज बैक " पर लिखा,... " हम धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर रहेंगे. अब समय आ गया है कि इस छोटे से मजाक को आंदोलन में बदल दिया जाए."

    क्या कह रहे हैं लोग
    कॉकरोच जनता पार्टी( सीजेपी ) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरते ही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की. अभिजीत दीपके ने बताया कि उन्हें दिल्ली पुलिस से जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति मिल गई है. इस बीच शिवसेना नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा है कि कॉकरोच जनता पार्टी को प्रदर्शन की इजाजत देकर दिल्ली पुलिस ने ठीक काम किया है. उन्होंने कहा कि "शायद पहली बार दिल्ली पुलिस ने  सही काम किया है, सीजेपी को प्रदर्शन की इजाजत देकर."

    उधर, सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा है कि " कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन को समझदारी भरे समर्थन और मार्गदर्शन की जरूरत है. उन्होंने कहा, " देश में परीक्षा पेपर लीक, भर्ती घोटाला, बेरोजगारी और रोजाना भ्रष्टाचार हो रहे हैं. विदेश नीति पूर तरह  ढह गई है और अमेरिका पर निर्भरता बढ़ गई है. वहीं, चुनाव आयोग, न्यायपालिका, मीडिया और अन्य संस्थाएं भी कमजोर हुई है. प्रशांत भूषण ने कहा, "हम एक बड़े तूफान में घिरे हैं. कॉकरोच जनता पार्टी इस तूफान का स्वाभाविक नतीजा है. इनके बड़े वादे हैं.
    इस जेन - जी आंदोलन को समझदारी भरे समर्थन और मार्गदर्शन की जरूरत है. सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है.

    ' तिरंगा, किताबें और फूल लेकर आएं समर्थक '
    लेकिन एक तंज और उसके बाद मीम के साथ शुरू हुए इस सोशल मीडिया कैंपेन को कितनी गंभीरता से किए जाने की जरूरत है? राजनीतिक विश्लेषकों को लगता है कि शनिवार को दिल्ली में जुटने वाले लोगों की संख्या बहुत कुछ तय करेगी, लेकिन इतना तो तय है कि सीजेपी को खारिज नहीं किया जा सकता. मंच पर सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका 
    भी नजर आए. आशुतोष रांका ने समर्थकों से अपील की कि वो अपने साथ तिरंगा, किताबें और फूल लेकर आएं, साथ ही शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करें. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुजारिश की है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत बर्खास्त करें, ताकि लोकतंत्र में हमारा विश्वास कायम रहे.

    क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव

    कॉकरोच जनता पार्टी, कोई पार्टी नहीं है. यह जनता से अलग कुछ नहीं है. यह कोई आंदोलन नहीं, बस एक पल है और इसीलिए यह मायने रखती है. यह उस ऊर्जा की एक दुर्लभ झलक दिखाती है जो तानाशाही हमलों से गणतंत्र को वापस हासिल कर सकती है. यह कोई लहर नहीं, बल्कि अंदरूनी धारा है. इसे नजरअंदाज करना गलती होगा.