चार बच्चे होने पर मिलेंगे 95 हजार, आंध्र प्रदेश सीएम ने क्यों कहा - बच्चे ही हमारी दौलत
आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने शनिवार को कहा, 'राज्य में तीसरे बच्चे के जन्म पर परिवार को 30 हजार रुपए और चौथे के जन्म पर 40 हजार रुपए दिए जाएंगे. एक समय मैंने जनसंख्या कंट्रोल करने के लिए बहुत मेहनत की थी, लेकिन अब जन्म दर बढ़ाने की जरूरत है.' समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट:-
श्रीकाकुलम, 18 मई 2026. आखिर आंध्र प्रदेश सरकार क्यों चाहती है कि लोग अधिक बच्चे पैदा करें, क्या पैसे देने से जन्म दर बढ़ जाएगी?
सवाल -1: आंध्र प्रदेश में बच्चे पैदा होने पर पैसा मिलने की नई पॉलिसी क्या है?
जवाब: 16 मई को मुख्यमंत्री नायडू ने श्रीकाकुलम जिले में एक जनसभा के दौरान बच्चे पैदा करने पर पैसे देने की योजना की घोषणा करते हुए कहा, 'बच्चों को बोझ नहीं, बल्कि देश की संपत्ति के रूप में देखा जाना चाहिए. जनसंख्या ही भविष्य की असली दौलत है. जापान और साउथ कोरिया जैसे देशों में घटती आबादी और बुजुर्ग होती जनसंख्या का इकोनॉमी पर बुरा असर पड़ा है. इसीलिए मैं लंबे समय से जनसंख्या बढ़ने पर जोर दे रहा हूं.'
दरअसल, आंध्र प्रदेश सरकार ने 5 मार्च को विधानसभा में एक नई पॉलिसी पेश की थी. इसे ' जनसंख्या प्रबंधन नीति' कहा गया. इसमें प्रस्ताव दिया गया था कि दूसरा बच्चा पैदा होने पर परिवार को 25 हजार रुपए मिलेंगे. अब तीसरे और चौथे बच्चे के पैदा होने पर पैसे की घोषणा को इसी नीति का विस्तार बताया जा रहा है. यानी अब चार बच्चे पैदा होने पर कल 95 हजार रुपए मिलेंगे.
चंद्रबाबू नायडू ने अप्रैल 2025 में भी महिलाओं से अधिक बच्चों को जन्म देने की अपील की थी. साथ ही घोषणा की थी कि 'सरकारी महिला कर्मचारियों के बच्चों की संख्या चाहे जितनी हो, प्रत्येक बच्चे पर 26 हफ्ते यानी 6 महीने की मैटरनिटी लीव मिलेगी.' इसके पहले तक 6 महीने का मातृत्व अवकाश सिर्फ पहले दो बच्चों पर मिलता था. दो से अधिक होने पर 3 महीने की छुट्टी का नियम था.
मुख्यमंत्री नायडू सरकार की जनसंख्या प्रबंधन नीति के मुताबिक, दो से अधिक बच्चे पैदा करने वाले परिवारों को पैसे के अलावा कई दूसरी सुविधाएं भी मिलेगी.
● तीसरे बच्चे के लिए 5 वर्ष तक हर महीने ₹1000 का पोषण भत्ता.
● तीसरे बच्चे के लिए 18 वर्ष की उम्र तक फ्री एजुकेशन.
● पिता के लिए अनिवार्य 2 महीने की पैटरनिटी लीव और जरूरत पड़ने पर 12 महीने तक की छुट्टी.
● इनफर्टिलिटी यानी बच्चे को जन्म ना दे पानी की समस्या से जूझ रहे दंपतियों के लिए राज्य समर्थित फर्टिलिटी क्लिनिक्स.
आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार ने बताया कि 'सहायता राशि देने का मकसद प्रेगनेंसी के दौरान स्वास्थ्य फैसिलिटी, बच्चों की देखभाल और डिलीवरी के बाद कामकाजी महिलाओं को नौकरी या काम करने में सहायता करना है. इसके अलावा चंद्रबाबू नायडू सरकार मौजूदा ' तल्लीकी वदनम योजना ' के विस्तार का भी योजना बना रही है, जिसके तहत अभी स्कूल जाने वाले बच्चों की मांओं को हर वर्ष 15 हजार रुपए दिए जाते हैं.
सवाल- 2: नायडू सरकार क्यों चाहती है कि लोग अधिक बच्चे पैदा करें?
जवाब: कम नायडू के इस फैसले के पीछे आंध्र प्रदेश की आबादी से जुड़े फैक्टर है. लेकिन सेंटर फॉर इकोनॉमिक्स और सोशल स्टडीज, हैदराबाद की रिटायर्ड प्रोफेसर डॉक्टर चिगुरुपाटी रामचंद्रेया कहते हैं, नायडू की राज्य की जनसंख्या बढ़ाने की चिंता का संबंध उनके अमरावती को मेगा सिटी बनाने के प्रोजेक्ट से प्रेरित है. डॉ. रामचंद्रेया कहते हैं कि अमरावती जिन दो जिलों गुंटूर और कृष्णा में बसा है, वहां जनसंख्या वृद्धि दर दो दशकों में तेजी से घटी है. हालांकि फिलहाल अमरावती की आबादी 2.7 लाख है यह आबादी 20 वर्ष में 1.01करोड़ तक पहुंचाना बेहद मुश्किल है.