• प्रेस की आजादी खतरे में, दुनियाभर में 330 से अधिक पत्रकार जेल में बंद

    दुनिया भर की सरकारों अपनी आलोचना पसंद नहीं है. सच्चाई दिखाने वाले पत्रकारों को कई तरह से प्रताड़ित कर रहे हैं. चीन, अमेरिका, रूस, इजरायल, ईरान समेत कई देश उन्हें सरकार के दुश्मन बताकर झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है.

    नई दिल्ली, 10 मार्च 2026। दुनियाभर में पत्रकारों पर बढ़ते दमन का खुलासा करते हुए कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) ने बताया है कि दिसंबर 2025 तक अपने पेशे के कारण 330 पत्रकार जेलों में बंद थे. यह लगातार पांचवां साल है जब जेल में बंद पत्रकारों की संख्या 300 से अधिक रही. हाल ही में पत्रकार जिमी लाई को हांगकांग के अधिकारियों ने 20 साल की सजा सुनाई गई।

    CPJ की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, चीन में सबसे ज्यादा 50 पत्रकार कैद हैं. इसके बाद म्यांमार में 30 और इज़रायल, जहां 29 फ़िलिस्तीनी पत्रकारों को हिरासत में रखा गया. रूस में 27 (इनमें 5 यूक्रेनी), बेलारूस में 25 और अज़रबैजान में 24 पत्रकार जेल में हैं.  यह आंकड़ा 1992 से CPJ द्वारा शुरू की गई गणना के बाद तीसरा सबसे ऊंचा स्तर है और 2024 के रिकॉर्ड 384 मामलों से थोड़ा कम है. CPJ ने कहा कि ये “बढ़ते सत्तावाद और वैश्विक सशस्त्र संघर्षों” का नतीजा हैं. वहीं माना जा रहा है कि वास्तविक आंकड़े इससे कहीं अधिक है.

    प्रेस की स्वतंत्रता के सबसे बड़े अपराधियों में चीन, रूस, मिस्र, इथोपिया, ईरान, इजरायल म्यांमार, सूडान, और तुर्किये है. पत्रकारों पर सरकार के दुश्मन, आतंकवादी, विदेशी एजेंट या जासूस होने तक के झूठे आरोप लगाए गए हैं. गाजा में इजरायल के युद्ध के कारण 100 फिलिस्तीन पत्रकारों की बिना कारण गिरफ्तारी हुई. उससे दुगने दो वर्षों में मारे गए. ट्रम्प प्रशासन ने उन पत्रकारों को डराने की कोशिश की जो उनके कहे अनुसार नहीं चलते हैं. ट्रंप ने द न्यूयॉर्क टाइम्स, सीएनएन, द वॉल स्ट्रीट जर्नल, द वॉशिंगटन पोस्ट के मालिक के खिलाफ संदिग्ध मुकदमे तक दायर किए हैं.

    रिपोर्ट में बताया गया कि जेल में बंद लगभग आधे पत्रकारों को दोषी ठहराया ही नहीं गया, जबकि सजा पाए पत्रकारों में से एक-तिहाई से अधिक को पांच साल से ज्यादा की सजा मिली है. करीब एक-तिहाई पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार की बात सामने आई, जिनमें 20% ने यातना या पिटाई का आरोप लगाया. 1992 से अब तक यातना के मामलों में ईरान सबसे आगे, उसके बाद इज़रायल और मिस्र का नाम आता है.

    क्षेत्रवार आंकड़ों में एशिया सबसे आगे रहा, जहां 110 पत्रकार जेल में हैं. चीन और म्यांमार के अलावा वियतनाम में कम से कम 16, बांग्लादेश में 4, भारत में 3 और फिलिपींस में 1 पत्रकार बंद है.रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि अमेरिका में जून 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ प्रदर्शन कवर करने वाले सल्वाडोरन पत्रकार मारियो ग्वेवारा को हिरासत में लिया गया था, हालांकि बाद में उन्हें आव्रजन स्थिति के आधार पर देश से निर्वासित कर दिया गया.