जमीन बेच कर दिए 3 लाख, मरीज का कोई पता नहीं, मुजफ्फरपुर हॉस्पिटल अग्निकांड के पीड़ितों का दर्द
प्रसाद हॉस्पिटल उत्तर बिहार का एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल के तौर पर जाना जाता है. जहां बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं. इस दर्दनाक हादसे ने निजी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन प्रबंधन और सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह हृदयविदारक रिपोर्ट:-
मुजफ्फरपुर, 4 जून 2026. 'जमीन बेचकर इलाज के लिए प्रसाद हॉस्पिटल को 3 लाख रुपए दिए थे. लेकिन अब मरीज का कुछ भी पता नहीं चल रहा है. 8 घंटे से मरीज को खोज-- खोज कर परेशान है. कोई कुछ बात नहीं रहा है.' यह कहना है कि मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में लगी आग के बाद वहां भर्ती एक मरीज के परिजनों का.
गुरुवार सुबह बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के मशहूर निजी अस्पताल प्रसाद हॉस्पिटल की आईसीयू में लगी आग से 10 मरीजों की मौत हो गई और 15 लोग झुलस गए. इस घटना के बाद वहां भर्ती मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में शिफ्ट करवा दिया गया है. लेकिन मरीज के परिजनों को इसकी प्रॉपर जानकारी नहीं दी जा रही है. इस कारण वहां अफरा -- तफरी की स्थिति देखी गई.
मरीज बैजनंदन राय के परिजनों का दर्द
प्रसाद अस्पताल में मरीजों के परिजन रोते - बिलखते दिखे. एक मरीज के परिजन ने कहां की जमीन बेचकर इलाज के लिए अस्पताल प्रबंधन को 3 लाख रुपए दिए थे. लेकिन अब मरीज का कोई पता नहीं चल रहा है. मरीज बैजनंदन राय मनियारी पुलिस क्षेत्र के पताही के रहने वाले हैं. उनका प्रसाद हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था. उन्हें यहां चार दिन पहले एडमिट करवाया गया था.
दम घुटने से मरीजों की हुई मौत
मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा पुलिस क्षेत्र स्थित इस अस्पताल में आग लगने के बाद मरीजों और उनके परिजनों के बीच भगदड़ जैसी हालत बन गई. हादसे में कई मरीजों के दम घुटने की आशंका जताई जा रही है.
आईसीयू में शॉर्ट सर्किट से आग लगने का शक
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आज की शुरुआत अस्पताल के आईसीयू वार्ड में शॉर्ट सर्किट के कारण हुई और देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया एवं पूरे आईसीयू में धुआं भर गया. धुएं के कारण वहां भर्ती गंभीर मरीजों की हालत बेहद नाजुक हो गई. हालांकि अस्पताल में मौजूद कुछ मरीज और उनके परिजन जान बचाकर बाहर निकल गए, लेकिन आईसीयू में भर्ती मरीजों को निकालने के लिए भारी मशक्कत का सामना करना पड़ गया.
दिल्ली होटल और मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड पर बरसी कांग्रेस, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
आग अस्पताल की 5 वीं मंजिल पर स्थित आईसीयू वार्ड में लगी, इसके बाद देखते ही देखते पूरी इमारत में दमघोंटू और जहरीला धुआं फैल गया. इस अग्निकांड की चपेट में आने से अब तक 10 मरीजों की दर्दनाक मौत हो चुकी है. जबकि बचाए गए कई मरीजों की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है. वहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार से जब एयरपोर्ट पर सवाल पूछा गया तब वे वहां से चुपचाप निकल गए.
खिड़की और दरवाजे तोड़कर बचाई गई मरीजों की जान
दमकल कर्मियों ने अस्पताल पहुंचते ही भारी मशक्कत के साथ राहत और बचाव कार्य शुरू किया.
● पूरा आईसीयू वार्ड घने और काले धुएं से भरा होने के कारण गर्मियों ने खिड़कियां और दरवाजे तोड़कर वेंटीलेशन बनाया.
● ऑक्सीजन की कमी से तरफ रहे 20 से अधिक मरीजों को खिड़कियों के रास्ते सुरक्षित बाहर निकल गया.
● प्रसाद हॉस्पिटल में भर्ती मरीज को तुरंत दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया.
डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने हादसे पर जताया दुख
डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने हादसे पर दुख जताते हुए कहा-- मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में आग लगने की घटना में हुई व्यक्तियों की मृत्यु अत्यंत दुखद है. वहीं, राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मृतकों के परिजनों को चार- चार लाख की अनुग्रह राशि दिए जाने की घोषणा की है.
'बिहार में जान लेने की छूट;' रोहिणी आचार्य का सम्राट सरकार पर हमला
सम्राट सरकार के शासन में जानलेवा अस्पतालों को इलाज कर रहे लोगों की जान लेने और जोखिम में डालने की खुली छूट प्राप्त है. मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल में आग लगने के पश्चात इलाज कर रहे 10 मरीजों की मौत की घटना पीड़ादायक है.
मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड पर कांग्रेस का तीखा हमला
बिहार के मुजफ्फरपुर में एक निजी अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड पर कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने बेहद चिंता जताई है. उन्होंने इसकी उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है. मनोज कुमार ने दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल में आग लगने की घटना और मुजफ्फरपुर में एक निजी अस्पताल में अग्निकांड की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 21 और 10 लोगों की मौत हो चुकी है एवं अभी कई जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं. कांग्रेस नेता ने कहा कि इन दोनों हादसे की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यह स्पष्ट होना चाहिए कि इतनी बड़ी लापरवाही आखिर कैसे हुई?