बंगाल में चुनाव आयोग ने 27 लाख वोटरों के नाम उड़ाए, सबसे अधिक मुस्लिम मतदाताओं के नाम कटे
पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद चुनाव आयोग ने पहला आंकड़ा जारी किया : 27 लाख से अधिक वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं. इनमें मुस्लिम निशाने पर है. नंदीग्राम में हटाए गए वोटरों में से 95.5% मुस्लिम है, जबकि आबादी का सिर्फ 25% है.
नई दिल्ली/ कोलकाता, 11 अप्रैल 2026. बंगाल में विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को होने हैं. चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित समय सीमा समाप्त होने पर, चुनाव आयोग ने 27 लाख से अधिक वोटरों को अयोग्य घोषित किया है. योग्य और अयोग्य वोटरों की जिलावर सूची के मुताबिक, 28 फरवरी को जारी अंतिम वोटर लिस्ट में जिन 60.06 लाख वोटरों की पात्रता की जांच की जा रही थी, उनमें से कुल 27,16, 393 वोटर अयोग्य पाए गए. चुनाव आयोग ने पिछले साल दिसंबर में प्रकाशित मसूदा वोटर लिस्ट से मृत, अनुपस्थित, स्थानांतरित या डुप्लीकेट के तौर पर चिन्हित 58.25 लाख वोटरों को हटा दिया था, जिससे बंगाल में वोटरों की कुल संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ हो गई थी.
28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम वोटर लिस्ट से अतिरिक्त 5 लाख वोटरों को हटा दिया गया. इससे बंगाल की वोटर लिस्ट से हटाए गए वोटरों की कुल संख्या लगभग 91 लाख हो गई है. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को नदिया में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि टीएमसी उन 27 लाख से अधिक वोटरों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल कराने के लिए संघर्ष करेगी, जिनके नाम फैसले के बाद हटा दिए गए हैं.
सबसे अधिक प्रभावित जिले हैं-
• नदिया ( मतुआ बहुल) में 77.86%, हुगली में 70.33%, पूर्वी वर्धमान में 57.4%, उत्तर 24 परगना में 55.08%, पश्चिम बर्धमान में 53.72%, सबसे अधिक संख्या में जांच वाले जिले: मुर्शिदाबाद( 5.22 लाख), उत्तर 24 परगना ( 5 लाख ), और सबसे कम झारग्राम (6.682% ), और कालिमपोंग (6.709%). अल्पसंख्यक बहुल मालदा में 28.91%, मुर्शिदाबाद में 41.33%, उत्तर दिनाजपुर में 36.84%, और दक्षिण 24 परगना में 42.70% मुस्लिम मतदाताओं के नाम उड़ाए गए. हालांकि, गैर मुस्लिमों के मुकाबले यहां मुस्लिम आबादी अधिक नहीं है. जबकि कोलकाता नॉर्थ में (28.97% ) और कोलकाता साउथ में (27.31% ) भी काफी नाम कटे.
नंदीग्राम में मुस्लिम वोटर टारगेट पर रहे
नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र में एसआईआर के तहत 7 पूरक लिस्टों (1,2,3, 4 ए, 7,8 और 9) में हटाए गए मतदाताओं में 95.5% मुस्लिम है. जबकि नंदीग्राम की आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी मात्र 25% है. गैर मुस्लिम ( 75% आबादी) यानी बाकी हिंदू समुदाय के मात्र 4.5% नाम कटे है. कोलकाता स्थित सार्वजनिक नीति शोध संस्थान 'सबर इंस्टीट्यूट' ने चुनाव आयोग के आंकड़ों का विश्लेषण कर यह डेटा पेश किया है. सूची 6 में मुसलमानों का हिस्सा 60.9% से 98.7% तक रहा. सिर्फ सूची 4a में 100% गैर मुस्लिम महिलाओं के नाम कटे, जबकि मुसलमानों का कोई नाम नहीं हटाया गया. दिसंबर 2025 के डेटा में मुस्लिम 33. 3% और गैर मुस्लिम 66.7% थे, लेकिन पूरक लिस्ट में भारी असंतुलन देखा गया है.
राजनीतिक प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शमशेर गंज रैली में इससे निपटने का तरीका बताते हुए कहा, "लोगों के नाम काटने का बदला लेने के लिए मतदान करें. एसआईआर के खिलाफ वोट करें ताकि नतीजे सही आएं. उन्होंने कुछ के नाम काटे हैं तो कुछ को धमकाया है." उधर, बीजेपी के सुकांत मजूमदार ने कहा, "एसआईआर संवैधानिक कर्तव्य था. वोटर लिस्ट साफ करने और धोखाधड़ी रोकने के लिए किया गया. टीएमसी निष्पक्ष चुनाव से डरी हुई है.
पश्चिम बंगाल चुनाव: एसआईआर में कटे 27.16
लाख वोटरों के नाम, चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने की सुनवाई. मतदाता सूची को फ्रीज करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट अब 13 अप्रैल को सुनवाई करेगा.
पश्चिम बंगाल मे एसआईआर से जुड़े मामले को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने पेश किया गया. सुनवाई के दौरान एक अधिवक्ता ने बताया कि बड़ी संख्या में लोगों की अपील अभी भी अपीलेट ट्रिब्यूनल में लंबित है, जबकि चुनाव आयोग ने गुरुवार 9 अप्रैल को वोटर लिस्ट को फ्रीज कर दिया. गुरुवार आधी रात को आने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए दूसरी और अंतिम वोटर लिस्ट फ्रीज कर दी गई जबकि वादे के मुताबिक, 19 कभी अस्तित्व में नहीं आ पाए. अब इसका निर्णय 13 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के दौरान करेगा.