48 साल बाद खुलेगा पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार..
ओड़िशा के पुरी स्थित 12वीं सदी के भगवान जगन्नाथ मंदिर का बहु प्रतीक्षित रत्न भंडार (खजाना ) लगभग 48 साल बाद, 25 मार्च यानी कल फिर से खोला जा रहा है. हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक, 16 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति देखरेख में इसमें रखे कीमती आभूषणों और रत्नों की सूची तैयार (इन्वेंट्री) सत्यापन किया जाएगा. यह प्रक्रिया कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न होगी. अंतिम बार यह रत्न भंडार 1978 में खोला गया था. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ के साथ भुवनेश्वर स्थित संवाददाता अभय बनर्जी की रिपोर्ट..
पुरी, 24 मार्च 2026. रत्न भंडार की सुरक्षा, मरम्मत और उसमें मौजूद आभूषणों की सूची को अपडेट करना, न कि उनका मूल्यांकन. मंदिर परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, और तकनीकी विशेषज्ञ एवं आरबीआई अधिकारियों की उपस्थिति में यह काम होगा. इसमें पारंपरिक स्वर्णकार, रत्न विशेषज्ञ और मंदिर प्रशासन के सदस्य शामिल रहेंगे. यह खजाना भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के लिए समर्पित है, जिसमें सदियों से भक्तों और पूर्व राजाओं द्वारा दान दिए गए आभूषण और कीमती पत्थर रखे गए हैं.
48 साल बाद खुलेगा खजाना, एसजेटीए ने बताया मुहूर्त और समय
श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की बहु प्रतीक्षित गणना 25 मार्च बुधवार से शुरू होगी, जो 48 साल बाद हो रही है. एसजेटीए ने चैत शुक्ल पक्ष की सप्तमी को दोपहर शुभ मुहूर्त 12:12 बजे से 1:45 बजे के बीच प्रारंभ की जाएगी. समय का निर्धारण मंदिर के ज्योतिषाचार्य एवं शिवायतों की सलाह से किया गया है, ताकि धार्मिक परंपराओं का पूर्ण पालन सुनिश्चित हो सके.
48 साल पहले 72 दिन लगा था समय
करीब 48 वर्ष बाद होने जा रही इस ऐतिहासिक प्रक्रिया में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के स्वर्ण भूषण, रत्न एवं अन्य बहुमूल्य धरोहरों का विस्तृत विवरण तैयार किया जाएगा. इससे पहले वर्ष 1978 में रत्न भंडार की सूची बनाई गई थी, जिसमें करीब 72 दिन का समय लगा था.
पारदर्शिता का रखा जाएगा ख्याल
सटीकता सुनिश्चित करने के लिए इस प्रक्रिया में रिजर्व बैंक के अधिकारी, स्वर्णकार, जेमोलॉजिस्ट ( रत्न विशेषज्ञ) समेत विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा एवं प्रत्येक आभूषण की डिजिटल रिकॉर्डिंग, फोटोग्राफी और वीडियो ग्राफी भी की जाएगी, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की विसंगति ना हो.
इन्वेंट्री के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए दर्शन व्यवस्था में आंशिक बदलाव किया जाएगा. वहीं, भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेडिंग भी की जाएगी और कुछ समय के लिए श्रद्धालुओं को सीमित दूरी से दर्शन की अनुमति दी जाएगी. साथ ही शनिवार, रविवार और प्रमुख पर्व त्योहारों के दिनों में यह कार्य स्थगित रहेगा, ताकि भक्तों को असुविधा न हो.