• तमिलनाडु में स्टालिन की डीएमके मशीनरी के सामने अकेले पड़े एक्टर विजय थलपति

    तमिलनाडु की राजनीति में साउथ सुपरस्टार थलपति विजय ने अपनी पार्टी तमिलगा वेट्री कज़गम ( टीवीके ) के साथ सीधे तौर पर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके के सामने एक बड़ी और अकेले चुनौती पेश कर दी है. फरवरी 2024 में पार्टी लॉन्च करने और उसके बाद से आक्रामक तेवर अपनाने के बाद विजय ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी लड़ाई सीधे तौर पर स्टालिन के नेतृत्व वाली सरकार से है. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की  यह विशेष रिपोर्ट:-

    चेन्नई, 24 फरवरी 2026. फरवरी 2026 में,थलपति विजय ने कहा था कि 2026 के विधानसभा चुनाव "तमिलनाडु बनाम नई दिल्ली"( स्टालिन का  दावा ) नहीं, बल्कि टीवीके और सत्तारूढ़ डीएमके के बीच एक सीधी लड़ाई है. विजय ने स्टालिन की डीएमके को "भ्रष्ट"और " कुनबा परस्ती " वाली पार्टी बताया है. उन्होंने स्टालिन को  चुनौती दी और कहा कि  वे चुनाव से पहले अपनी संपत्ति का खुलासा करें.

    करुर त्रासदी और आरोप 

    1925 के आखिरी में एक रैली के दौरान हुई करूर भगदड़ (जिसमें 41 लोगों की जान चली गई ) के बाद, विजय  थलपति ने राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए थे हर प्रशासन पर उन्हें निशाना बनाने का आरोप लगाया था.

    अकेले दम पर सियासी लड़ाई 

    विजय की पार्टी टीवीके ने स्पष्ट कहा है कि वे 2026 में तमिलनाडु चुनाव में अकेले ही लड़ेंगे और किसी भी प्रमुख दल के साथ गठबंधन नहीं करेंगे.

    क्या कहते हैं राजनीतिक जानकार 

    विजय थलपति को डीएमके के लिए एक बड़ी चुनौती मान रहे हैं, क्योंकि वे युवाओं और अपने विशाल प्रशासक आधार के दम पर पारंपरिक द्रविड़ राजनीति (डीएमके --- एआईएडीएमके ) को टक्कर दे रहे हैं.

    ओपिनियन पोल्स की अलग-अलग राय

    ओपिनियन पोल अलग-अलग नंबर दे रहे हैं लेकिन असली चुनौती दोहरी है. प्रत्याशियों का चयन और बूथ लेवल प्रबंधन. विजय को फर्क नहीं पड़ता यदि पुलिस उनकी जनसभाओं में भीड़ की संख्या  5000 से कम रखे. सोशल मीडिया पर इसकी कसर पूरी हो जाती है. जहां दूसरी पार्टियों को भीड़ जुटाने के लिए पैसे देने पड़ते हैं, वहीं थलपति विजय को इसकी जरूरत नहीं. खुद ही लोग उन्हें सुनने आ जाते हैं.

    अभी तक टीवीके सोशल मीडिया पर मजबूत दिख रही है. लेकिन असली चुनाव ईवीएम पर ही जीत जाएगा. यूट्यूबर पर नहीं. वोट तो आखिर  चुनाव आयोग ही गिनेगा. व्यूज नहीं. हालांकि, " जाना नयागन " फिल्म फिलहाल  डिब्बे में कैद है. लेकिन उस फिल्म के सुपरस्टार विजय खुद को असली नेता की तरह पेश करना आरंभ कर चुके हैं. वेल्लोर की जनसभा इसी ओर इशारा करती है. जैसे कि उन्होंने कई बार फिल्मों में किया, थलपति विजय इस सियासी जंग को थलपति बनाम पूरी डीएमके मशीनरी बना रहे हैं.

    हालांकि, तमिलनाडु की राजनीति में जो छोटी - बड़ी पार्टियां हैं, वे दो द्रविड़ गुटों में से किसी एक के साथ हैं. दरअसल, विजय अकेले खड़े दिख रहे हैं. उनके साथ कोई भी गठबंधन नहीं है. लेकिन डीएमके के साथ ही कांग्रेस ने रहने का निर्णय कर लिया है. बावजूद इसके दो मांगे  मानी नहीं गई. पहली, अधिक सीटें और दूसरी, सत्ता में भागीदारी. ऐसे में  तमिलगा वेत्री कज़गम यानी टीवीके और कांग्रेस की एक साथ आने की उम्मीद लगभग समाप्त हो चुकी है. वेल्लोर में सोमवार को थलपति विजय की हुंकार तमिलनाडु असेंबली इलेक्शन में कॉलिवुड स्टाइल वाला ट्रेलर था. इसका मतलब साफ था -- विजय बनाम बाकी सब. फिल्मी अंदाज था और डायलॉग पंच से भरा हुआ.