Big Breaking: सात बार राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार जीतने वाले तमिल साहित्यकार आर. वैरामुथु को 60वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार
60th Jnanpith Award: देश में साहित्य के क्षेत्र में सर्वोच्च पुरस्कार ज्ञानपीठ तमिल लेखक वैरामुथु को देने की घोषणा की गई है। आर, वैरामुधु को उनके ४० साल के करियर में सात बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ गीतकार), पद्म भूषण (2014), और पद्म श्री (2003), साहित्य अकादमी पुरस्कार (2003): उनके उपन्यास 'कल्लिकडू इथिहासम' के लिए तथा तमिलनाडु सरकार द्वारा कला में योगदान के लिए कलैमामणि पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
नई दिल्ली, 14 मार्च 2026 भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा यह घोषणा की गई है कि वर्ष 2025 के लिए 60 वॉ ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रतिष्ठित तमिल साहित्यकार आर. वैरामुथु को प्रदान किया जाएगा। उन्हें तमिल साहित्य में उनके उल्लेखनीय योगदान, रचनात्मकता और विशिष्ट काव्यात्मक अभिव्यक्ति के लिए यह सम्मान दिया जा रहा है।
यह निर्णय भारतीय ज्ञानपीठ की चयन समिति की बैठक में लिया गया। इस समिति में प्रख्यात विद्वानों और साहित्यकारों का समावेश रहा, जिनमें प्रो. प्रतिभा राय की अध्यक्षता में अन्य सदस्य माधव कौशिक, दामोदर माउजओ, डॉ. सुरंजन दास, डॉ. ए. कृष्णा राव, प्रफुल्ल शिलेदार, डॉ. केसु भाई देसाई, डॉ. जानकी प्रसाद शर्मा, डॉ. के. श्रीनिवास राव और ज्ञानपीठ के वरिष्ठ प्रकाशन अधिकारी डॉ. महेश्वर शामिल थे। भारतीय ज्ञानपीठ के महाप्रबंधक आर. एन. तिवारी ने हिंदी न्यूज़ पोर्टल 'आज की आवाज़' को इस आशय की जानकारी दी।
बैठक के प्रारम्भ में ज्ञानपीठ के अध्यक्ष जस्टिस विजेंद्र जैन तथा ज्ञानपीठ के निदेशक मधुसूदन आनंद को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। तमिल के प्रसिद्ध कवि, गीतकार और लेखक आर. वैरामुथु का जन्म 13 जुलाई 1953 को तमिलनाडु में हुआ। वे समकालीन तमिल साहित्य के महत्वपूर्ण रचनाकारों में गिने जाते हैं। उनकी कविताओं और लेखन में मानवीय संवेदना, सामाजिक सरोकार और प्रकृति के प्रति गहरी संवेदनशीलता का प्रभावशाली चित्रण मिलता है।
वैरामुथु ने कविता, गीत और गद्य तीनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनकी काव्य रचनाएँ अपनी मौलिकता, भावनात्मक गहराई और सांस्कृतिक चेतना के कारण पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं। तमिल भाषा और साहित्य के विकास में उनके योगदान को व्यापक रूप से सराहा गया है। उन्होंने 37 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें कविता संग्रह और उपन्यास शामिल हैं। उनकी प्रमुख साहित्यिक कृतियों में कल्लिकाडू इथिहासम, करुवाची काव्यम, तन्नी देसम, और मौद्रम उलागा पोर तन्नी देसम, और मोंद्रम उलागा पोर (तीसरा विश्व युद्ध) शामिल हैं।
आर, वैरामुधु को उनके ४० साल के करियर में सात बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ गीतकार), पद्म भूषण (2014), और पद्म श्री (2003), साहित्य अकादमी पुरस्कार (2003): उनके उपन्यास 'कल्लिकडू इथिहासम' के लिए तथा तमिलनाडु सरकार द्वारा कला में योगदान के लिए कलैमामणि पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।