सोनम वांगचुक जेल से बाहर आए, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई से 3 दिन पहले NSA हटाया
पर्यावरण कार्यकर्ता एवं इंजीनियर सोनम वांगचुक 14 मार्च को 170 दिन बाद जेल से रिहा हो गए हैं। केंद्र सरकार ने उन पर लगा राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) तत्काल प्रभाव से हटा दिया है।सरकार ने यह फैसला सुप्रीम कोर्ट में वांगचुक की याचिका पर अंतिम सुनवाई (17 मार्च) के तीन दिन पहले लिया। कोर्ट सुनवाई के दौरान वे वीडियो और फोटो देखेगा, जिनके आधार पर सरकार ने उन पर NSA लगाया था।
नई दिल्ली/ जोधपुर/लद्दाख, 15 मार्च 2026। गृह मंत्रालय ने कहा कि सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का वातावरण बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि सभी के साथ रचनात्मक और सार्थक बातचीत की जा सके। वांगचुक को 26 सितंबर, 2025 को NSA के सख्त प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया था और तुरंत उन्हें जोधपुर जेल शिफ्ट कर दिया गया था। गृह मंत्रालय के अनुसार, सोनम ने NSA एक्ट के तहत अपनी हिरासत की अवधि का लगभग आधा हिस्सा पूरा कर लिया है।
सरकार बोली- लद्दाख में शांति-स्थिरता का माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध
सरकार ने कहा, 'सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है, ताकि सभी संबंधित पक्षों के साथ रचनात्मक और सार्थक बातचीत को बढ़ावा दिया जा सके। इस उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए और उचित विचार-विमर्श के बाद, सरकार/गृह मंत्रालय ने सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्णय लिया है। सरकार लद्दाख के लिए सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराती है।'
लद्दाख हिंसा के बाद हिरासत में लिए गए थे वांगचुक
सितंबर, 2025 में लेह में लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और केंद्र शासित प्रदेश के लिए छठी अनुसूची का दर्जा देने की मांगों को लेकर हिंसक विरोध-प्रदर्शन हुआ था। इस हिंसा में 4 लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों घायल हुए थे। हिंसा भड़काने के आरोप में 26 सितंबर, 2025 को NSA के तहत वांगचुक को हिरासत में लिया था। तब से वे जोधपुर जेल में थे। सरकार ने यह फैसला सुप्रीम कोर्ट में वांगचुक की याचिका पर अंतिम सुनवाई (17 मार्च) के तीन दिन पहले लिया। कोर्ट सुनवाई के दौरान वे वीडियो और फोटो देखेगा, जिनके आधार पर सरकार ने उन पर NSA लगाया था।
केंद्र सरकार ने शनिवार को जैसे ही एनएसए हटाया उसके बाद सुबह करीब 10 बजे सोनम की पत्नी गीतांजलि जोधपुर जेल पहुंचीं। इसके बाद कागजी कार्रवाई पूरी की गई। फिर दोपहर सवा एक बजे पत्नी के साथ एक निजी गाड़ी से जेल से निकले। NSA सरकार को ऐसे लोगों को हिरासत में लेने का अधिकार देता है, जिनसे देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा हो। इसके तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक नजरबंद रखा जा सकता है।
सरकार ने कहा था- वांगचुक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा
वांगचुक की गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए उनकी पत्नी गीतांजलि ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। तब सरकार ने कोर्ट में कहा था कि वांगचुक के बयान राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। सरकार ने कहा था, "वांगचुक को जनमत संग्रह और जनमत सर्वेक्षण की मांग करके जहर फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। वांगचुक युवाओं को आत्मदाह के लिए उकसा रहे थे। वे लद्दाख को नेपाल और बांग्लादेश बनाना चाहते हैं।
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे थे सोनम
सोनम को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। वह लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। आंदोलन के दौरान हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद उनकी गिरफ्तारी की गई थी। इन प्रदर्शनों में 4 लोगों की मौत हुई थी। 90 लोग घायल हुए थे। सरकार का आरोप है कि वांगचुक ने इस हिंसा को भड़काया।
कौन हैं सोनम वांगचुक?
1966 में जन्मे वांगचुक एक इंजीनियर और पर्यावरण कार्यकर्ता हैं। वे स्टूडेंट एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) के संस्थापक-निदेशक हैं, जो लद्दाख में शिक्षा प्रणाली में सुधार पर केंद्रित है। वांगचुक ने भारतीय सेना के लिए बेहद ठंडे स्थानों पर उपयोग वाले सौर टेंट बनाए हैं। उन्हें 2018 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
फिल्म '3 इडियट्स' में आमिर खान ने जिस रैंचो का किरदार निभाया था, वो वांगचुक पर ही आधारित था।