पश्चिम एशिया में संघर्ष विराम और अमेरिका में सियासी संग्राम, 85 सांसदों ने ट्रंप से मांगा इस्तीफा
सीजफायर पर घर में ही
घिरे ट्रंप?
अमेरिका और ईरान के बीच 6 हफ्तों के संघर्ष के बाद हुए युद्धविराम ने जहां तनाव कम किया, वहीं अमेरिका में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है. डोनाल्ड ट्रंप पर विपक्ष का दबाव बढ़ गया है इसी क्रम में 85 से अधिक डेमोक्रेट सांसद उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे हैं. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट:-
नई दिल्ली, 9 अप्रैल 2026. अमेरिका और ईरान के बीच करीब 6 हफ्तों तक चले संघर्ष के बाद युद्धविराम तो हो गया है, लेकिन इसके साथ ही अमेरिका की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा हो गया है. इस फैसले पर जहां कुछ सांसदों ने कूटनीतिक पहल का स्वागत किया है, वहीं कई नेताओं ने इसे खतरनाक, एकतरफा और बिना पर्याप्त निगरानी वाला कदम बताया है. साथ ही एक्सिओस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप अब विपक्ष के निशाने पर हैं. 85 से अधिक डेमोक्रेटिक सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रंप को पद से हटाने की मांग कर दी है. घोषणा के मुताबिक, अमेरिका और ईरान ने आपसी दुश्मनी को अस्थाई रूप से रोकने, एक 10-- बिंदु प्रस्ताव पर काम करने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होमुर्ज जलडरुमध्य को फिर से खोलने पर सहमति जताई है.
रिपब्लिकन नेताओं का समर्थन
रिपब्लिकन सांसद मॉर्गन ग्रिफिथ ने इस समझौते का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप की सराहना की. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान के साथ सीजफायर समझौता करने के लिए बधाई दी जानी चाहिए. अमेरिकी सेना के जबरदस्त प्रयासों की वजह से ईरान कमजोर हुआ और बातचीत की मेज पर आने को मजबूर हुआ. पेंसिल्वेनिया के कांग्रेसी ब्रायन फिट्जपैट्रिक ने इस कदम को संतुलित नजरिया से देखा. उन्होंने कहा कि कूटनीति हमेशा हमारा लक्ष्य होना चाहिए. यह अस्थाई सीजफायर उस दिशा में एक रचनात्मक कदम है और हम स्थिति पर पैनी नजर बनाए रखेंगे. हालांकि, सतर्क रहना जरूरी है.
ईरान को लेकर जताई गई चिंता
फिट्जपैट्रिक ने ईरान को लेकर चिंता भी जताई कि इस बात में कोई अस्पष्टता नहीं होनी चाहिए कि यह शासन कितना बड़ा खतरा है. इसे कभी परमाणु हथियार या उसे पहुंचने की क्षमता नहीं मिलनी चाहिए. उन्होंने कांग्रेस की भूमिका पर बल देते हुए कहा कि स्थिति के विकास के साथ कड़ी संसदीय निगरानी आवश्यक है.
सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी सावधानी के साथ समर्थन जताया. उन्होंने कहा कि अगर कूटनीति सही नतीजे देती है तो मैं उसे प्राथमिकता देता हूं. इस दिशा में काम कर रहे सभी लोगों के प्रयासों की सराहना करता हूं. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी, यह शुरुआती चरण है, इसलिए यह समझना जरूरी है कि क्या तथ्य है और क्या भ्रम... सीधे शब्दों में कहें तो हर पहलू को परखना होगा.
डेमोक्रेट और कुछ रिपब्लिकन की तीखी आलोचना
इंडियाना के डेमोक्रेटिक सांसद फ्रैंक मर्वान ने प्रशासन के कदमों पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के एकतरफा कदम अनुचित है और उनकी खतरनाक बयान बाजी हालात को और बिगाड़ रही है. उन्होंने कहा भले ही सीजफायर की घोषणा की गई हो, लेकिन सच यह है कि कोई तात्कालिक खतरा नहीं था, कोई स्पष्ट उद्देश्य नहीं था और अंत का कोई संकेत नहीं है. हमारे सैनिक अब भी खतरे में है. मर्वान ने यह भी जोड़ा कि आम अमेरिकी नागरिक इसके असर को महसूस कर रहे हैं कि लोग पहले ही पेट्रोल और किराने की कीमतों पर इसका असर देख रहे हैं.
कैलिफोर्निया के सांसद केविन काइली ने अमेरिका की छवि और संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि अमेरिका सभ्यताओं को नष्ट नहीं करता और ना ही इसे बातचीत की रणनीति के तौर पर धमकी देता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस की जिम्मेदारी है कि वह चल रही सैन्य कार्रवाइयों पर निगरानी रखे.
राष्ट्रपति की भाषा को लेकर आपत्ति जताई
सीनेटर लिसा मुर्कोवस्की ने राष्ट्रपति की भाषा को लेकर कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाजी वह बातचीत में बढ़त हासिल करने के प्रयास के रूप में भी स्वीकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने चेतावनी दी कि यह हमारे देश के उन मूल्यों का अपमान है जिन्हें हम लगभग 250 वर्षों से दुनिया में बढ़ावा देते आए हैं, और इससे देश-विदेश में अमेरिकियों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है.
सभ्यता को खत्म करने की धमकी देना अमेरिकी मूल्यों के खिलाफ है.
एरिजोना के सीनेटर रूबेन गैलेगो ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना दुनिया की सबसे बेहतरीन इसलिए है क्योंकि हम कानून का पालन करते हैं और नागरिकों की रक्षा करते हैं. उन्होंने ट्रंप के बयानों की आलोचना की और कहा कि पूरी सभ्यता को खत्म करने की धमकी देना हमारे मूल्यों के खिलाफ है और यह पूरी तरह गैरकानूनी है.