• केरल में लेफ्ट तो असम में बीजेपी की लगेगी हैट्रिक या फिर खत्म होगा कांग्रेस का वनवास?

    केरल, असम और  पुडुचेरी विधानसभा चुनावों के लिए मतदान जारी है. केरल में लेफ्ट बनाम यूडीएफ की लड़ाई है तो असम चुनाव बीजेपी और कांग्रेस के बीच है. लेफ्ट और बीजेपी सत्ता की हैट्रिक लगाना चाहती है तो कांग्रेस का अपने सियासी वनवास को खत्म करने पर जोर है. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ यह चुनावी विश्लेषण रिपोर्ट--- 

    तिरुवनंतपुरम / गुवाहाटी, 9 अप्रैल 2026. केरल, असम और  पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के लिए मतदान जारी है. केरल की 140 सीट और असम की 126 सीटों पर वोटिंग हो रही है जबकि  पुडुचेरी की 30 सीट पर चुनाव है. केरल में लेफ्ट और असम में भाजपा सत्ता की हैट्रिक लगाने उतरी है  तो कांग्रेस दोनों ही प्रदेश में 10 साल के सियासी वनवास को खत्म करने के लिए पूरी ताकत लगा दी है. ऐसे में देखना है कि वोटर किसके अरमानों को पूरा करते हैं?

    केरल में लेफ्ट के अगवाई वाले (एलडीएफ) लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट और कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के बीच सीधी मुकाबला है, लेकिन बीजेपी उसे त्रिकोणीय बनाने में जुटी है. वामपंथी के सामने अपने एकलौते सियासी दुर्ग को बचाए रखने की लड़ाई है तो कांग्रेस के सामने 10 साल के सियासी वनवास को  खत्म करने की चुनौती?

    असम में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है, लेकिन बदरुद्दीन अजमल की पार्टी  एआईयूडीएफ उसे त्रिकोणीय बनाना चाहती है. बीजेपी मुख्यमंत्री हिमंत बिश्वा सरमा को आगे करके चुनाव मैदान में उतरी है. जबकि कांग्रेस ने अपने दिग्गज नेता तरुण गोगोई के बेटे  गौरव गोगोई के चेहरे को आगे कर 10 साल से चले आ रहे सत्ता का वनवास खत्म करने का दांव चला है.

    केरल में सत्ता की हैट्रिक या कांग्रेस की वापसी 

    केरल की 140 विधानसभा सीटों पर 883 प्रत्याशी चुनाव मैदान में है, जिनकी किस्मत का फैसला 2.71 करोड़ वोटर करेंगे. इनमें 1.39 करोड़ महिला वोटर  तो 1.32 करोड़ पुरुष वोटर हैं. मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने 2021 में 40 साल से चले आ रहे  सत्ता परिवर्तन की ट्रेंड को बदलकर इतिहास रच दिया था. विजयन सरकार के विकास और  योजनाओं के दम पर लेफ्ट सत्ता की हैट्रिक लगाना चाहती है. वहीं, कांग्रेस गांधी परिवार के सहारे सत्ता में वापसी के ताना बना बुना है और पूरी ताकत लगा दी है. प्रदेश की 140 सीटों में से कांग्रेस 92, मुस्लिम लीग से 26, केरल कांग्रेस से  8 और आरएसपी से 4 प्रत्याशी मैदान में हैं. केरल कांग्रेस ( जे.) आरएमपीआई और सीपीएम से एक - एक प्रत्याशी और 7 निर्दलीय उम्मीदवार को यूडीएफ का समर्थन हासिल है. जबकि एनडीए में बीजेपी 98, भा. डी. जनसेना से  22 और 20- 20 पार्टी से 19 प्रत्याशी हैं.

    इसके अलावा आम आदमी पार्टी 60 सीट पर चुनाव लड़ रही है तो 145 से प्रत्याशी गैर पंजीकृत दलों से और 282 निर्दलीय प्रत्याशी भी किस्मत आजमा रहे हैं. वहीं, एलडीएफ की तरफ से सीपीएम 80, सीपीआई 21, केरल कांग्रेस (एम )12,  एनसीपी ( एसपी) 3, और राजद से  3 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. इसके अलावा इंडिया नेशनल लीग, एसजेपी समेत तीन छोटी पार्टियों से एक एक प्रत्याशी मैदान में है, जिनको यूडीएफ का समर्थन है.

    केरल में किसका क्या दांव पर लगा हुआ है?

    केरल में 10 साल से लेफ्ट का कब्जा है, जिसके चलते विजयन सरकार के खिलाफ संभावित एंटी इनकंबेंसी मानी जा रही है. राज्य में पिछले 10 वर्षों से वाम मोर्चा सत्ता में है और विपक्ष इसी को हथियार बन रहा है. कांग्रेस का दावा है कि हालिया निकाय चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में उसके बेहतर प्रदर्शन के आधार पर सत्ता में वापसी की उम्मीद है.

    असम में बीजेपी की हैट्रिक या कांग्रेस करेंगी वापसी 

    असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए अपना जोर लगा रखा है   तो कांग्रेस अपने 10 साल के वनवास को खत्म करना चाहती है. परिसीमन के बाद असम में हो रहे चुनाव में 126 सीटों पर 722 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करीब 2.50 करोड़ वोटर तय करने जा रहे हैं.