चंद्रनाथ रथ हत्याकांड : यूपी से तीन संदिग्ध गिरफ्तार, टोल बूथ पर यूपीआई पेमेंट बना सुराग
मामले की जांच से जुड़े अधिकारी ने बताया कि यह एक बड़ी कामयाबी है. जांच में संकेत मिले थे कि हमलावर पश्चिम बंगाल के बाहर के थे. तकनीकी निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और अन्य सूचनाओं के आधार पर एसआईटी के सदस्यों को उत्तर प्रदेश और बिहार भेजा गया था. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट:-
कोलकाता, 11 मई 2026. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ के हत्या मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. मामले की तहकीकात कर रही एसआईटी ने उत्तर प्रदेश में दबिश देकर तीन संदिग्ध आरोपियों को रविवार देर शाम हिरासत में ले लिया. इनसे गहन पूछताछ की जा रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि पूछताछ में हत्या की पूरी साजिश का खुलासा हो सकता है. पुलिस के मुताबिक, अहम सुरागों के आधार पर रविवार देर शाम को मयंक राज मिश्रा और विक्की मौर्य को बिहार के बक्सर से दबोचा गया. जबकि राज सिंह को उत्तर प्रदेश के बलिया से हिरासत में लिया गया है. पूछताछ के बाद तीनों आरोपियों को सोमवार की सुबह पश्चिम बंगाल की मध्यमग्राम पुलिस गिरफ्तार कर अपने साथ लेकर चली गई.
पूछताछ के लिए कोलकाता ले जाया गया
सूत्र बताते हैं कि राज सिंह मूल रूप से यूपी के बलिया का रहने वाला है. वह फिलहाल बक्सर में रह रहा था. वहीं, वारदात के बाद वह रामनगरी अयोध्या में पनाह लिए हुऐ था. कोलकाता पुलिस और अयोध्या पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में उसे और दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, बाद में उसे आगे की पूछताछ के लिए कोलकाता ले जाया गया है.
मामले की जांच से जुड़े अधिकारी ने बताया कि जांच कर्ताओं को संदेह है कि इनमें से एक शार्प शूटर हैं. जांच में संकेत मिले थे कि हमलावर पश्चिम बंगाल के बाहर के थे. तकनीकी निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और अन्य सूचनाओं के आधार पर एसआईटी टीम ने उत्तर प्रदेश और बिहार जाकर जांच पड़ताल की तथा तीनों संदिग्ध आरोपियों को दबोच लिया. जांच अधिकारियों ने बताया कि हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम देने में कम से कम 8 लोग शामिल थे. पुलिस का मानना है कि हमलावरों ने चंद्रनाथ रथ को निशाना बनाने से पहले विस्तार से रेकी की थी.
यूपीआई ट्रांजैक्शन से खुला हत्या का राज
बता दें कि चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की जांच में पुलिस को सबसे बड़ा तकनीकी सुराग एक यूपीआई पेमेंट से मिला. जांच एजेंसियों के मुताबिक, हत्या में इस्तेमाल की गई कार जब हावड़ा के बाली टोल प्लाजा से गुजरी, तब आरोपियों ने फास्टैग या नकद की जगह यूपीआई के जरिए टोल भरा था. इसी डिजिटल लेनदेन ने पुलिस को संदिग्धों के मोबाइल नंबर और बैंक डिटेल्स तक पहुंचा दिया. तकनीकी ट्रैकिंग के आधार पर जांच की कड़ियां उत्तर प्रदेश और झारखंड तक जा पहुंची है.
सीसीटीवी में दिखी संदिग्ध सिल्वर कार
टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर पुलिस को हत्या से कुछ घंटे पहले एक सिल्वर रंग की निसान माइक्रा कार दिखाई दी, जिसमें तीन संदिग्ध सवार थे. जांचकर्ताओं का मानना है कि यही कार मध्यमग्राम में चंद्रनाथ रथ की स्कॉर्पियो को रोकने के लिए इस्तेमाल की गई थी. बाद में पुलिस ने इस कार को दोहरिया इलाके से बरामद कर लिया. आशंका है कि वारदात के बाद आरोपी कार छोड़कर दूसरी बाइक या वाहन से चंपत हो गए. जबकि हत्या में इस्तेमाल की गई एक बाइक भी जब्त की गई है. जांच में सामने आया है कि वाहनों पर फर्जी नंबर प्लेट लगाई गई थी. पहचान छिपाने के लिए चेचिस नंबर मिटाने की भी कोशिश की गई.
कई प्रदेशों का फैली साजिश की कडियां
पुलिस को शक है कि इस हत्याकांड को पेशवर शूटरों के जरिए अंजाम दिया गया. शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि हमलावरों को उत्तर प्रदेश या बिहार से बुलाया गया था. जांच एजेंसियों को यह भी संदेह है कि पूरी साजिश को एक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए संचालित किया जा रहा था, जिसमें स्थानीय अपराधियों के साथ बाहरी शार्प शूटर भी जुड़े थे. दरअसल, चंद्रनाथ रथ की उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम में उनके घर के समीप गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
पुलिस के मुताबिक, उनकी एसयूवी को घर से करीब 200 मीटर पहले एक सिल्वर निसान माइक्रा ने रोक लिया. जैसे ही गाड़ी रुकी, बाइक सवार हमलावरों ने करीब से फायरिंग कर दी, जिससे आगे की सीट पर बैठे चंद्रनाथ रथ की मौके पर ही मौत हो गई. सूत्र बताते हैं कि चंद्रनाथ रथ पर कई राउंड गोलियां चलाई गई और उनके पीएस सुरक्षा गार्ड बुद्धदेव को भी गोली मारी गई. उनकी हालत भी नाजुक बताई जा रही है. इस बीच भाजपा ने इसके लिए टीएमसी को जिम्मेदार ठहराया है. जबकि टीएमसी ने चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग उठाई है.