छोटा पैकेट, बड़ा धमाका
-डी. आर. साहू
पर्दे में रहने दो..
सूबे के एक माननीय स्वयं को मां आदि शक्ति का अनन्य भक्त बताते हैं। दिन में वह शाकाहारी होने का ढिंढ़ोरा पीटते हैं, लेकिन जैसे ही रात होती है, मांसाहारी बन जाते हैं और सब कुछ ग्रहण करते हैं। उनके शागिर्द बताते हैं कि भाई साहब राज जानने वाले लोगों को ज्यादा दिनों तक बर्दाश्त नहीं करते हैं और चाय में पड़ी मक्खी की तरह बाहर निकालकर फेंक देते हैं। दो साल में ही उन्होंने एक दर्जन से अधिक मातहतों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। हर समय उनके साथ साये की तरह चलने वाले एक पीए को उन्होंने हाल ही में बाहर का रास्ता दिखा दिया। बताया जाता है कि पीए माननीय के हर राज जान गए थे, इसलिए उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। पीए ने खूब मिन्नतें की कि मैं पहले की तरह कहीं जुबान नहीं खोलूंगा, मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं, प्लीज, मुझ पर दया कीजिये। लेकिन माननीय का दिल नहीं पसीजा। कई बार राजदारों को बाहर करना उल्टा भी पड़ जाता है।
तेरी यादों की चादर ओढ़े..
प्रदेश की एक चर्चित नेत्री का इन दिनों एक पांव जमीन पर तो दूसरा पांव सातवें माले पर रहता है। वह अक्सर 'तेरी यादों की चादर ओढ़े..' गाना गाकर खूब चहकती रहती हैं। पता चला है कि महोदया अपने गृह क्षेत्र में रात्रि विश्राम न कर संभाग मुख्यालय में रुकना ज्यादा पसंद करती हैं। बताया जाता है कि वह एक गेट से आवास गृह में प्रवेश करती हैं तो वहीं छिपकर दूसरे गेट से बाहर निकल जाती हैं। रात के अंधेरे में वह पीएसओ से गाड़ी चलवाकर शहर स्थित एक आवासीय परिसर में पहुंच जाती हैं और पीएसओ को नीचे छोड़कर खुद सातवें माले के एक फ्लैट में चली जाती हैं। सीधे सुबह छह बजे नीचे आती हैं। जब तक मैडम आवास गृह वापस नहीं लौट जातीं, तब तक पीएसओ की सांस अटकी रहती है। कहीं कोई 19-20 हो गया तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
गिग वर्कर्स पर घिरे मंत्री
सत्ता पक्ष के ही वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने विधानसभा में गिग वर्कर्स का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि ब्लिंकिट, स्विग्गी, जोमैटो, ओला, उबर जैसी कंपनियों में छत्तीसगढ़ के जो लाखों नौजवान काम करते हैं, वे संगठित मजदूर की श्रेणी में आते हैं या असंगठित? इस पर मंत्री लखनलाल देवांगन कहते हैं कि वे दोनों में नहीं आते। चंद्राकर ने कहा कि 10 मिनट में सामान पहुंचाने के दबाव में छत्तीसगढ़ के लाखों बच्चे शोषण के शिकार हो रहे हैं। किसी का एक्सीडेंट हो रहा है तो किसी को जेल जाना पड़ रहा है। जब चंद्राकर ने पूछा कि इनको सामाजिक सुरक्षा देने के लिए कोई अधिनियम बना रहे हैं क्या? तो मंत्री टालमटोल करने लगे और उन्होंने इसे केंद्र सरकार पर थोपने की कोशिश की। जोर देने पर बोले प्रक्रियाधीन है, लेकिन कोई टाइम लिमिट नहीं बता पाए।
सीधे ट्रांसफर की धमकी
कृषि उपज के अधिकारी इन दिनों पीए साहब की पेशी से काफी परेशान हैं। पता चला है कि वह एक-एक कर सचिवों को तलब कर रहे हैं। उनसे पूछा जाता है कि आपकी मंडी में कितना निर्माण कार्य चल रहा है तथा उनसे आय-व्यय का पूरा ब्योरा भी मांगा जाता है। उन्हें पूरी तैयारी के साथ आने की ताक़ीद दी जाती है। बताते हैं कि यदि कोई अधिकारी पेशी में बिना पूजा पाठ की सामग्री के आ जाते हैं तो पीए उनपर बरस पड़ते हैं। इस कार्यक्रम को व्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए ही पीए साहब ने एक नुमाइंदे की संविदा नियुक्ति भी कराई है। अपना दुखड़ा सुनाते हुए एक सचिव रो पड़े और बताए कि निर्धारित पूजा पाठ की सामग्री में एक भी सुपारी कम हो जाए तो साहब द्वारा गाली-गलौज के साथ सीधे ट्रांसफर की धमकी दी जाती है।
सांपनाथ गए तो नागनाथ आ गए
एक महकमे के लोगों को रिटायर्ड ओएसडी से छुटकारा मिला तो लगा ‘‘जान बची तो लाखों पाए’’, लेकिन दूसरे कठोर परपीड़क से पाला पड़ गया। नये ओएसडी के बारे में महकमे के अधिकारी कहते हैं कि पहले वाला पॉकेटमार था अब तो डकैत ही आ गया है। हर फाइल में गुंजाइश ही ढूंढते रहते हैं। इस फेर में फ़ाइलें महीनों पड़ी रहती हैं। सचिव के प्रस्तावों पर पूरा पोस्टमार्टम करके ही दम लेते हैं।
पुछल्ला
पिछली सरकार में आका की आंखों के नूर रहे एक आईपीएस मंत्रालय की सीढ़ी में एक आईएएस से टकरा जाते हैं तो उनसे पूछ पड़ते हैं- ‘‘तुम इतना खुश कैसे रहते हो?’’ तब लूपलाइन काट रहे आईएएस ने झट से कहा- ‘‘दुखी रहने की वजह भी नहीं है।’’ आईपीएस को नसीहत देते हुए उन्होंने यह भी कहा कि अपने आप को माफ करना सीखो। दिन के बाद रात और रात के बाद दिन आता है।
बूझो तो जानें
0 मंत्री के पूरे सिस्टम को ऑपरेट करने वाले एक करीबी रिश्तेदार का डायलॉग क्या आपने सुना है- "आते जाते सबपे नजर रखता हूं नाम मेरा अंशुल है।"
0 एक कथित सहकारी नेता बैंक की एक महिला अधिकारी को बार-बार होटल में क्यों बुलाते हैं?
0 हाल ही में ‘‘जंगल में मंगल’’ मनाते पकड़े गए आईएफएस जोड़े का किस्सा आपने सुना है?
0 अध्यक्ष बनते ही किस नेता ने अपने लिए पांच रुपये प्रति क्विंटल रेट तय कर लिया है?