• ईरान- इजरायल- अमेरिका जंग का यूरोप पर गंभीर असर, क्रूड ऑयल व गैस हुआ महंगा

    ईरान - इजरायल और अमेरिका के बीच जारी भीषण जंग का गंभीर असर यूरोप पर पड़ा है. यूरोपीय देशों में गैस की कीमतों में 22%  से अधिक की भारी उछाल आया है, जबकि क्रूड ऑयल के दाम भी 12 से 14 प्रतिशत  तक बढे हैं. इस बीच ईरान ने साइप्रस में ब्रिटिश एयरबेस पर ड्रोन से हमला किया है, जिससे यूरोप सीधे तौर पर संघर्ष में खींचा चला आया है. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट:-

    नई दिल्ली, 4 मार्च 2026. मिडिल ईस्ट में भारी तनाव के कारण यूरोप में प्राकृतिक गैस की कीमतें करीब करीब 22% बढ़ गई है, जिससे आर्थिक संकट की आशंका है.

    सैन्य सुरक्षा पर भी खतरा

    ईरान ने  साइप्रस स्थित ब्रिटिश वायुसेना के बेस (एक्रोतिरी ) पर जोरदार हमला किया है, जिसे यूरोपीय धरती पर सीधा हमला माना जा रहा है. हालांकि, फ्रांस, जर्मनी और  ब्रिटेन ने  ईरान के जवाबी हमलों की निंदा की है और अमेरिका के साथ मिलकर तनाव और युद्ध को रोके जाने की बात कही है.

    इस बीच, ईरान  ने यूरोपीय संघ के नौसेना और वायुसेना को 'आतंकवादी संगठन ' करार दिया है. इधर, मध्य पूर्व से गुजरने वाली यूरोपीय एयरलाइंस की उड़ानों पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि क्षेत्र में हवाई क्षेत्र भी सुरक्षित नहीं है. खबर है कि यूरोपीय नेता ने इस युद्ध के वैश्विक स्थिरता पर पड़ने वाले भयानक दुष्परिणामों को लेकर चिंतित हैं और बातचीत की मांग कर रहे हैं. दरअसल, पिछले 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमले के बाद पूरी दुनिया सकते में आ गई. अचानक से हुए हमले ने सभी को हैरान कर दिया. फिलहाल सैन्य अभियानों में अमेरिका की मदद करने वाले यूरोपीय  देश ने इस हमले से खुद को दूरी बना ली है.

    इस युद्ध पर सबसे पहली प्रतिक्रिया फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दी है. उन्होंने कहा कि "इस युद्ध के दुष्परिणाम होंगे और वैश्विक शांति एवं स्थिरता पर इसका असर पड़ेगा." मैक्रों ने इस युद्ध को तुरंत रोकने की मांग की है. साथ ही उन्होंने कहा कि 'इलाके में बढ़ता तनाव सभी के लिए खतरनाक है.' हालांकि, ईरानी रीजीम के पास अब बातचीत शुरू करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है. उसे अपने न्यूक्लियर एवं बैलिस्टिक प्रोग्राम बंद करने होंगे. यह पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा के लिए जरूरी है.

    मैक्रों ने यूएनएससी ही तुरंत बैठक बुलाने की मांग की है 

    मैक्रों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तुरंत मीटिंग बुलाने की भी मांग की है. इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने  ईरान पर हमले के लिए साइप्रस स्थित ब्रिटेन के एयर बेस के इस्तेमाल की इजाजत मांगी, जिसे प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने खारिज कर दिया. स्टार्मर ने ईरान पर अमेरिकी इजरायल के हमले में शामिल नहीं होने के  अपने फैसले का बचाव किया और कहा कि  उनकी लेबर पार्टी सरकार 'हवाई हमलों के जरिए सत्ता परिवर्तन में विश्वास नहीं करती.'