• बंगाल एसआईआर विवाद में बड़ा फैसला, ट्रिब्यूनल ने आधार कार्ड को  माना वैध पहचान

    पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची विवाद के बीच ट्रिब्यूनल के एक फैसले ने  बड़ा मोड़ ला दिया है. आधार कार्ड को पहचान के रूप में मान्यता मिलने से एसआईआर मामले में नई बहस  छिड़ गई है. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की  विशेष रिपोर्ट :-

    नई दिल्ली, 9 अप्रैल 2026. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है. विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बाद लाखों नाम हटाए जाने से राजनीतिक माहौल  गरमा गया है. अब इस मामले में न्यायाधिकरणों ने अपीलों पर सुनवाई शुरू कर दी है. इस बीच एक महत्वपूर्ण फैसले में ट्रिब्यूनल  ने आधार कार्ड को पहचान के रूप में मान्यता देते हुए एक प्रत्याशी के पक्ष में निर्णय सुनाया है. इस फैसले को एसआईआर विवाद में अहम मोड़ माना जा रहा है, जिससे भविष्य की सुनवाई पर भी असर पड़ सकता है.

    फरक्का के प्रत्याशी का मामला 
    यह मामला फरक्का क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी मोताब शेख से जुड़ा है, जिनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था. लेकिन ट्रिब्यूनल ने सुनवाई के दौरान पाया कि चुनाव आयोग उनके नाम को हटाने का कोई स्पष्ट कारण पेश नहीं कर सका. रिटायर्ड जस्टिस  टी. एस. शिवगणनम ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अधिकरण ने संबंधित अधिकारी से नाम हटाने के कारण मांगे थे, लेकिन आयोग ने तकनीकी कारणों का हवाला देकर जानकारी नहीं दी.

    आधार को मिली मान्यता
    ट्रिब्यूनल ने  अपने फैसले में आधार कार्ड को पहचान के रूप में स्वीकार किया. हालांकि, यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है, लेकिन पहचान के तौर पर इसे मान्य माना गया. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि अधिकारियों को यह बताना जरूरी है कि किस गड़बड़ी के आधार पर नाम हटाया गया या शामिल किया गया. 2025 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद चुनाव आयोग ने आधार को सहायक दस्तावेज के रूप में शामिल किया था. इसी आधार पर अधिकरण ने माना कि आधार में दर्ज नाम "मोताब शेख " कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में स्वीकार करने के लिए पर्याप्त है.