• बंगाल में मतदाता सूची पर सियासी विस्फोट! आधी रात सप्लीमेंट्री सूची जारी होने से तनाव

    पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची  को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. इस दौरान सप्लीमेंट्री सूची को लेकर तृणमूल कांग्रेस और  बीजेपी आमने-सामने आ गए हैं. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट :-

    कोलकाता, 25 मार्च 2026. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले  सप्लीमेंट्री मतदाता सूची ने राज्य की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है. चुनाव आयोग ने सोमवार 23 मार्च की आधी रात को पहली एसआईआर सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी की, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कुल कितने वोटरों के नाम जोड़े गए या हटाए गए हैं, इस अनिश्चितता ने राजनीतिक दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप की जंग को तेज कर दिया है.

    बीते 28 फरवरी को जारी अंतिम मतदाता सूची में करीब 60 लाख नाम अंडर एडजुडिकेशन चिन्हित किए गए थे. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 705 न्यायिक अधिकारियों को इन मामलों की समीक्षा के लिए लगाया गया था. मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा था कि अब तक लगभग 29 लाख  नामों पर फैसला लिया जा चुका है, जबकि शेष मामलों की प्रक्रिया जारी है.

    तृणमूल कांग्रेस ने उठाए सवाल 

    तृणमूल  कांग्रेस ने इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं. कोलकाता के मेयर एवं मंत्री फिरहाद हकीम ने आरोप लगाया और कहा, "यह देखा गया है कि भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में करीब 40% लोगों के नामों से छेड़छाड़ हुई है. संविधान हमें वोट देने का अधिकार देता है और जो संविधान का विरोध करता है, वह भारत के खिलाफ है. चुनाव आयोग भारत के खिलाफ हैं  तो हम हाई कोर्ट का रुख करेंगे और उसे हटाने की मांग करेंगे, क्योंकि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि हर नागरिक को वोट करने का अवसर मिले."

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार का जवाब

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने भी इस प्रक्रिया को न्यायिक निगरानी में बताया. उन्होंने कहा, सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और कोलकाता हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त अधिकारियों की देख रेख में तैयार की गई है. रणनीतिक स्तर पर नितिन नवीन के साथ क्षेत्र- वार योजनाओं पर बैठकें हो रही है. इन बैठकों में  सीमित कार्यकर्ताओं को बुलाया जा रहा है और विशेष क्षेत्रों और सीटों पर फोकस किया जा रहा है.

    भाजपा प्रत्याशी प्रियंका टिबरेवाल ने सूची को सही ठहराते हुए कहा, "नाम आधी रात के बाद बदलते नहीं है. सुबह देखें या शाम, वहीं नाम रहते हैं. जो फर्जी मतदाता जोड़े गए थे, उन्हें अब हटा दिया गया है. लोकतंत्र में केवल  वैध वोटरों को वोट देने का अधिकार है, लेकिन अवैध मतदाताओं को नहीं."

    मतदाता सूची पर चुनावी राजनीति 

    मतदाताओं को अपना स्टेटस जांचने के लिए बूथ - स्तर की सूची डाउनलोड करने को कहा गया है, लेकिन इन लोगों ने तकनीकी दिक्कतों की  शिकायत की है. जिन वोटरों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें 15 दिनों के भीतर निर्दिष्ट ट्रिब्यूनल में अपील करने का अधिकार दिया गया है. वोटर लिस्ट पर जारी यह विवाद चुनावी राजनीति को और तीखा बना सकता है. एक तरफ बीजेपी इसे 'फर्जी मतदाताओं की सफाई' बता रही है, वहीं, तृणमूल कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करार दे रही हैं. अब सबकी नजर चुनाव आयोग के  अगले कदम पर है. अंतिम आंकड़े और आगे जारी होने वाली सूची ही तय करेगी कि यह विवाद थमेगा या चुनावी संग्राम को और तेज करेगा.